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Deoria News: बरहजिया बंद होने से बाजारों में 16 दिन का सन्नाटा, फिर आएगी बहार
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भटनी-सलेमपुर रेल खंड को दोहरीकरण के चलते रेल लाइन पर लगातार हो रहा है निर्माण कार्य
बरहजिया ट्रेन बंद होने से सलेमपुर बाजार का कारोबार हुआ प्रभावित, यात्रियों की बढ़ी परेशानी
दोहरीकरण पूरा होने के बाद ट्रेनों के संचलन शुरू होते बाजारों की बढ़ जाएगी रौनक
देवरिया। भटनी-सलेमपुर के बीच रेल लाइन के दोहरीकरण कार्य के चलते बरहजिया समेत कई ट्रेनें बंद चल रही हैं। दिन में चार फेरे लगाने वाली बरहजिया ट्रेन के थमते ही बरहज, सलेमपुर और भटनी के बाजारों की रौनक पर सीधा असर दिखाई देने लगा है। वहीं यात्रियों को भी आवागमन में परेशानी झेलनी पड़ रही है। हालांकि रेलवे के दोहरीकरण कार्य के पूरा होने के बाद लोगों की राह आसान हो जाएगी। साथ ही बाजारों में फिर से चहल-पहल लौट आएगी।
बरहजिया ट्रेन सिर्फ एक रेल सेवा नहीं, बल्कि इस पूरे क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक धुरी मानी जाती है। बरहज से सलेमपुर और भटनी तक आने-जाने वाले व्यापारी, छात्र, कर्मचारी, मरीज और ग्रामीण यात्री इसी ट्रेन पर निर्भर रहते हैं। ट्रेन बंद होने से अब यात्रियों को बस, ऑटो और निजी साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे खर्च बढ़ गया है और समय भी ज्यादा लग रहा है। इसका सीधा असर बाजारों पर पड़ा है, क्योंकि बाहर से आने वाले ग्राहकों की संख्या कम हुई है।
सलेमपुर प्रतिनिधि के अनुसार, बरहज के कपड़ा, किराना, जूता-चप्पल, कृषि सामग्री और दैनिक उपयोग की दुकानों पर इन दिनों ग्राहक पहले की तुलना में कम पहुंच रहे हैं। सब्जी मंडी और अन्य व्यापारियों का कहना है कि ट्रेन के जरिए आने वाले खरीदारों और छोटे सामान की आवाजाही रुकने से कारोबार में सुस्ती आ गई है। खासकर वे दुकानदार प्रभावित हैं जिनके ग्राहक कस्बाई और ग्रामीण इलाकों से ट्रेन पकड़कर बाजार पहुंचते थे। हालांकि इस अस्थायी बंदी के पीछे रेलवे का दोहरीकरण कार्य है, जिसे क्षेत्र के लोग लंबे समय से जरूरी मानते रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि करीब 15 दिन की इस असुविधा के बाद जब काम आगे बढ़ेगा और लाइन व्यवस्था बेहतर होगी, तब ट्रेनों का संचालन और सुचारु होगा। दोहरीकरण के बाद ट्रेनों की स्थिति सुधरेगी, परिचालन आसान होगा, भविष्य में नई रेल सेवाओं की संभावना बढ़ेंगी और व्यापार को भी रफ्तार मिलेगा। वहीं स्थानीय लोगों का मानना है कि अभी भले ही बाजारों में सन्नाटा है, लेकिन यह ठहराव स्थायी नहीं है। रेलवे परियोजना पूरी होने के बाद बरहज, सलेमपुर और भटनी के बीच आवागमन तेज होगा, ग्राहक संख्या बढ़ेगी और बाजारों की रौनक फिर लौटेगी। कारोबारियों को उम्मीद है कि मौजूदा परेशानी के बाद आने वाला समय इलाके के लिए ज्यादा फायदेमंद साबित होगा। बरहज प्रतिनिधि के अनुसार बरहजिया ट्रेन के जरिये रेल लाइन से जुड़े गांवों के अलावा दूर-दराज से आये स्कूली छात्र, नौकरीपेशा, दूधिया, सब्जी आदि के छोटे-बड़े कारोबारियों का आवागमन होता है। इस ट्रेन के जरिये रोजाना करीब 2500 लोग यात्रा करते हैं। लोगों के अनुसार 12 मार्च से सलेमपुर रेल खंड पर दोहरीकरण कार्य कराया जा रहा है। जिससे कुछ ट्रेनों के रूट बदले गये हैं। वहीं बरहजिया सहित कुछ अन्य ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं। रेल संचलन ठप होने के कारण बाजार पर काफी असर पड़ा है। रेल मार्ग से आने वाले व्यापारियों की आवाजाही नहीं के बराबर हो जाने से सामानों की आवक कम हो गई है। यात्रियों के न आने-जाने के कारण स्टेशन परिसर में पूरे दिन सन्नाटा पसरा हुआ है। हालांकि 25 मार्च के बाद से स्टेशन के गुलजार होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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बरहजिया ट्रेन बंद होने का असर व्यवसाय में भी दिखने लगा है। बरहज और बीच के स्टेशनों से आने वाले ग्राहक अब कम हो गए हैं। पहले लोग सुबह ट्रेन से आते थे, खरीदारी करते थे और शाम तक लौट जाते थे। अब आने-जाने में दिक्कत और खर्च दोनों बढ़ गए हैं, जिससे बाजार में भीड़ घटी है।
- अरविंद जायसवाल कपड़ा व्यापारी सलेमपुर
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बरहजिया ट्रेन के बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों को हो रही है। बरहजिया ट्रेन सबसे सस्ती और सुविधाजनक साधन थी। अब बस या ऑटो से सफर करना पड़ रहा है, जिसमें किराया ज्यादा है और समय भी अधिक लगता है। रोज आने-जाने वालों के लिए यह बड़ी दिक्कत है।
- दिलीप कुमार निवासी- स्टेशन रोड
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कोट........
पिछले कई दिनों से लगातार रेल लाइन और प्लेट फार्म पर कार्य तेजी से चल रहा है। इसको देखते हुए 15 दिनों के लिए बरहजिया और कुछ अन्य ट्रेनें बंद कर दी गई है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद बंद ट्रेनों का संचालन शुरू करा दिया जाएगा।
बृजेश मिश्र, स्टेशन अधीक्षक सलेमपुर
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रेलवे स्टेशन परिसर में नहीं है शौचालय, शिकायत के बाद विभाग ने खुदाई कराकर छोड़ा
हाल्ट बताकर जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहा विभाग, जमींदोज हो रही करोड़ों की संपत्ति
फोटो........
संवाद न्यूज एजेंसी
बरहज। स्थानीय रेलवे स्टेशन परिसर में सुविधाएं नदारद हैं। स्टेशन पर शौचालय, प्याऊ आदि इंतजाम न होने के कारण लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। हालांकि जिम्मेदार बरहज स्टेशन को हाल्ट बताते हुए पल्ला झाड़ ले रहे हैं। उपेक्षाओं के कारण यहां करोड़ों की संपत्ति जमींदोज हो रही है। जिससे लोगों में नाराजगी है।
ब्रिटिश हुकूमत में अंग्रेजों ने जल मार्ग से व्यापार में होने वाली असुविधाओं के कारण यहां रेलवे लाइन बिछवाया था। लोगों के अनुसार मुसाफिरों, कर्मचारियों के रुकने और विश्राम करने की व्यवस्था के साथ जनपद के सबसे बड़े मालगोदाम का निर्माण कराया गया था। यहां से ट्रेन के जरिये व्यापार होता था। लोगों का कहना है कि आजाद होने के बाद देश तरक्की कर रहा है। लेकिन स्टेशन और बरहजिया ट्रेन का कायाकल्प होने की जगह सुविधाओं से वंचित है। एक माह पूर्व कांग्रेस कार्यकर्ता शौचालय आदि सुविधाओं को लेकर अनिश्चितकालीन धरना दिया था। रेल प्रशासन ने शौचालय के लिए गड्ढे की खुदाई करा दिया। लेकिन वह भी अधर में है। जबकि परिसर में प्याऊ का कोई ठोस इंतजाम नहीं है।
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बरहज स्टेशन पर ट्रेन बंद होने से सन्नाटा पसरा हुआ है। ट्रेन चलने से छोटे-बड़े व्यवसाईयों के साथ स्कूली छात्रों और रोजाना के यात्रियों को सहूलियत मिलती थी। लेकिन उन्हें अब परेशानियों का सामना करना पड़ा रहा है।
- अंबिकेश सिंह
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बरहज स्टेशन के स्थापित होने पर व्यवसाय को बहुत लाभ मिलता था। लेकिन उपेक्षाओं के कारण गोदाम, भवन, आवास आदि भहरा गए हैं। बीच-बीच में ट्रेन को बंद कर दिया जाता है। जिससे लोगों को काफी दिक्कतें पेश आती हैं।
- चंद्रगुप्त यादव
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बरहजिया ट्रेन बंद होने से सलेमपुर बाजार का कारोबार हुआ प्रभावित, यात्रियों की बढ़ी परेशानी
दोहरीकरण पूरा होने के बाद ट्रेनों के संचलन शुरू होते बाजारों की बढ़ जाएगी रौनक
देवरिया। भटनी-सलेमपुर के बीच रेल लाइन के दोहरीकरण कार्य के चलते बरहजिया समेत कई ट्रेनें बंद चल रही हैं। दिन में चार फेरे लगाने वाली बरहजिया ट्रेन के थमते ही बरहज, सलेमपुर और भटनी के बाजारों की रौनक पर सीधा असर दिखाई देने लगा है। वहीं यात्रियों को भी आवागमन में परेशानी झेलनी पड़ रही है। हालांकि रेलवे के दोहरीकरण कार्य के पूरा होने के बाद लोगों की राह आसान हो जाएगी। साथ ही बाजारों में फिर से चहल-पहल लौट आएगी।
बरहजिया ट्रेन सिर्फ एक रेल सेवा नहीं, बल्कि इस पूरे क्षेत्र की आर्थिक और सामाजिक धुरी मानी जाती है। बरहज से सलेमपुर और भटनी तक आने-जाने वाले व्यापारी, छात्र, कर्मचारी, मरीज और ग्रामीण यात्री इसी ट्रेन पर निर्भर रहते हैं। ट्रेन बंद होने से अब यात्रियों को बस, ऑटो और निजी साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे खर्च बढ़ गया है और समय भी ज्यादा लग रहा है। इसका सीधा असर बाजारों पर पड़ा है, क्योंकि बाहर से आने वाले ग्राहकों की संख्या कम हुई है।
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सलेमपुर प्रतिनिधि के अनुसार, बरहज के कपड़ा, किराना, जूता-चप्पल, कृषि सामग्री और दैनिक उपयोग की दुकानों पर इन दिनों ग्राहक पहले की तुलना में कम पहुंच रहे हैं। सब्जी मंडी और अन्य व्यापारियों का कहना है कि ट्रेन के जरिए आने वाले खरीदारों और छोटे सामान की आवाजाही रुकने से कारोबार में सुस्ती आ गई है। खासकर वे दुकानदार प्रभावित हैं जिनके ग्राहक कस्बाई और ग्रामीण इलाकों से ट्रेन पकड़कर बाजार पहुंचते थे। हालांकि इस अस्थायी बंदी के पीछे रेलवे का दोहरीकरण कार्य है, जिसे क्षेत्र के लोग लंबे समय से जरूरी मानते रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि करीब 15 दिन की इस असुविधा के बाद जब काम आगे बढ़ेगा और लाइन व्यवस्था बेहतर होगी, तब ट्रेनों का संचालन और सुचारु होगा। दोहरीकरण के बाद ट्रेनों की स्थिति सुधरेगी, परिचालन आसान होगा, भविष्य में नई रेल सेवाओं की संभावना बढ़ेंगी और व्यापार को भी रफ्तार मिलेगा। वहीं स्थानीय लोगों का मानना है कि अभी भले ही बाजारों में सन्नाटा है, लेकिन यह ठहराव स्थायी नहीं है। रेलवे परियोजना पूरी होने के बाद बरहज, सलेमपुर और भटनी के बीच आवागमन तेज होगा, ग्राहक संख्या बढ़ेगी और बाजारों की रौनक फिर लौटेगी। कारोबारियों को उम्मीद है कि मौजूदा परेशानी के बाद आने वाला समय इलाके के लिए ज्यादा फायदेमंद साबित होगा। बरहज प्रतिनिधि के अनुसार बरहजिया ट्रेन के जरिये रेल लाइन से जुड़े गांवों के अलावा दूर-दराज से आये स्कूली छात्र, नौकरीपेशा, दूधिया, सब्जी आदि के छोटे-बड़े कारोबारियों का आवागमन होता है। इस ट्रेन के जरिये रोजाना करीब 2500 लोग यात्रा करते हैं। लोगों के अनुसार 12 मार्च से सलेमपुर रेल खंड पर दोहरीकरण कार्य कराया जा रहा है। जिससे कुछ ट्रेनों के रूट बदले गये हैं। वहीं बरहजिया सहित कुछ अन्य ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं। रेल संचलन ठप होने के कारण बाजार पर काफी असर पड़ा है। रेल मार्ग से आने वाले व्यापारियों की आवाजाही नहीं के बराबर हो जाने से सामानों की आवक कम हो गई है। यात्रियों के न आने-जाने के कारण स्टेशन परिसर में पूरे दिन सन्नाटा पसरा हुआ है। हालांकि 25 मार्च के बाद से स्टेशन के गुलजार होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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बरहजिया ट्रेन बंद होने का असर व्यवसाय में भी दिखने लगा है। बरहज और बीच के स्टेशनों से आने वाले ग्राहक अब कम हो गए हैं। पहले लोग सुबह ट्रेन से आते थे, खरीदारी करते थे और शाम तक लौट जाते थे। अब आने-जाने में दिक्कत और खर्च दोनों बढ़ गए हैं, जिससे बाजार में भीड़ घटी है।
- अरविंद जायसवाल कपड़ा व्यापारी सलेमपुर
बरहजिया ट्रेन के बंद होने से सबसे ज्यादा परेशानी मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों को हो रही है। बरहजिया ट्रेन सबसे सस्ती और सुविधाजनक साधन थी। अब बस या ऑटो से सफर करना पड़ रहा है, जिसमें किराया ज्यादा है और समय भी अधिक लगता है। रोज आने-जाने वालों के लिए यह बड़ी दिक्कत है।
- दिलीप कुमार निवासी- स्टेशन रोड
कोट........
पिछले कई दिनों से लगातार रेल लाइन और प्लेट फार्म पर कार्य तेजी से चल रहा है। इसको देखते हुए 15 दिनों के लिए बरहजिया और कुछ अन्य ट्रेनें बंद कर दी गई है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद बंद ट्रेनों का संचालन शुरू करा दिया जाएगा।
बृजेश मिश्र, स्टेशन अधीक्षक सलेमपुर
रेलवे स्टेशन परिसर में नहीं है शौचालय, शिकायत के बाद विभाग ने खुदाई कराकर छोड़ा
हाल्ट बताकर जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहा विभाग, जमींदोज हो रही करोड़ों की संपत्ति
फोटो........
संवाद न्यूज एजेंसी
बरहज। स्थानीय रेलवे स्टेशन परिसर में सुविधाएं नदारद हैं। स्टेशन पर शौचालय, प्याऊ आदि इंतजाम न होने के कारण लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। हालांकि जिम्मेदार बरहज स्टेशन को हाल्ट बताते हुए पल्ला झाड़ ले रहे हैं। उपेक्षाओं के कारण यहां करोड़ों की संपत्ति जमींदोज हो रही है। जिससे लोगों में नाराजगी है।
ब्रिटिश हुकूमत में अंग्रेजों ने जल मार्ग से व्यापार में होने वाली असुविधाओं के कारण यहां रेलवे लाइन बिछवाया था। लोगों के अनुसार मुसाफिरों, कर्मचारियों के रुकने और विश्राम करने की व्यवस्था के साथ जनपद के सबसे बड़े मालगोदाम का निर्माण कराया गया था। यहां से ट्रेन के जरिये व्यापार होता था। लोगों का कहना है कि आजाद होने के बाद देश तरक्की कर रहा है। लेकिन स्टेशन और बरहजिया ट्रेन का कायाकल्प होने की जगह सुविधाओं से वंचित है। एक माह पूर्व कांग्रेस कार्यकर्ता शौचालय आदि सुविधाओं को लेकर अनिश्चितकालीन धरना दिया था। रेल प्रशासन ने शौचालय के लिए गड्ढे की खुदाई करा दिया। लेकिन वह भी अधर में है। जबकि परिसर में प्याऊ का कोई ठोस इंतजाम नहीं है।
बरहज स्टेशन पर ट्रेन बंद होने से सन्नाटा पसरा हुआ है। ट्रेन चलने से छोटे-बड़े व्यवसाईयों के साथ स्कूली छात्रों और रोजाना के यात्रियों को सहूलियत मिलती थी। लेकिन उन्हें अब परेशानियों का सामना करना पड़ा रहा है।
- अंबिकेश सिंह
बरहज स्टेशन के स्थापित होने पर व्यवसाय को बहुत लाभ मिलता था। लेकिन उपेक्षाओं के कारण गोदाम, भवन, आवास आदि भहरा गए हैं। बीच-बीच में ट्रेन को बंद कर दिया जाता है। जिससे लोगों को काफी दिक्कतें पेश आती हैं।
- चंद्रगुप्त यादव