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Deoria News: गलन बढ़ते ही अस्पताल में आई मरीजों की बाढ़
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गलन बढ़ते ही अस्पताल में आई मरीजों की बाढ़
सांस, अस्थमा, एलर्जी, निमोनिया, बुखार, पेट दर्द से पीड़ित लोग पहुंचे जिला अस्पताल
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। दो दिन से गलन बढ़ गई है। इसका असर सांस, अस्थमा, एलर्जी के मरीजों पर दिख रहा है। मेडिकल कॉलेज के चेस्ट व टीबी विभाग में इन बीमारियों के मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। ठंड बढ़ने से छोटे बच्चे भी तेजी से बीमार पड़ रहे हैं। ऐसे में डॉक्टरों ने खासकर बच्चों और बूढ़ों को विशेष सतर्क बरतने की सलाह दी है। मरीजों के अचानक बढ़ने से स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ रहा है। दवाओं की कमी होने के चलते लोग बाहर से दवाएं खरीदने को मजबूर हैं।
दो दिन से हवा चलने से मौसम बदल गया है। गलन बढ़ गई है। थोड़ी सी लापरवाही बच्चों व बुजुर्गों पर भारी पड़ रही है। महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में सांस, निमोनिया, बुखार, पेट दर्द के मरीजों की संख्या में शुक्रवार को इजाफा देखा गया। ओपीडी के चेस्ट एवं टीबी विभाग में दो दिन से मरीजों की संख्या बढ़ गई है।
शुक्रवार को चिकित्सक कक्ष के बाहर भीड़ थी। कुछ लोग कुर्सी पर बैठकर प्रतीक्षा कर रहे थे। चिकित्सकों ने 120 से अधिक मरीजों का इलाज किया। इसमें सांस, अस्थमा से पीड़ित लोगों की संख्या ज्यादा थी। उन्हें दवा और इन्हेलर लेने को कहा गया। वहीं, क्षय रोग के करीब 10 मरीजों का इलाज किया गया।
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उधर, एमसीएच विंग स्थित बाल रोग विभाग में अभिभावक अपने बच्चों को लेकर लंबी लाइन में खड़े थे। इलाज के लिए उन्हें एक से दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा। इसमें अधिकतर बच्चे बुखार, निमोनिया, पेट दर्द से पीड़ित थे। कुछ महिलाएं बच्चों को लेकर फर्श पर बैठी दिखीं। बाल रोग विभाग में चिकित्सक ने तकरीबन डेढ़ सौ बच्चों का इलाज किया।
निमोनिया से पीड़ित गंभीर करीब पांच बच्चों को भर्ती किया गया, जबकि अन्य को दवा दी गई। गंभीर रूप से बीमार पांच मरीजों को भर्ती किया गया, जबकि अन्य को दवा देकर घर भेज दिया गया। अस्पताल में कुछ दवाएं न होने के कारण लोगों को बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। ऐसे में लोगों को परेशानी हो रही है।
- फोटो
थोड़ी सी लापरवाही पड़ सकती है भारी
चेस्ट एवं टीबी विभाग के असिस्टेंट प्रो. डॉ. अनुराग शुक्ला ने बताया कि ठंड के मौसम में एलर्जी, अस्थमा व सांस के मरीजों को खतरा बढ़ जाता है। मुंह से सांस लेने से ठंडी हवा जाती है। ठंड से नली सिकुड़ जाती है। नाक से सांस लेने से गर्म हवा जाती है। एलर्जी से सर्दी, जुकाम, आंख में खुजली, पानी आना, सिर दर्द होता है। अस्थमा में सांस फूलने लगता है। ऐसे में सावधानी आवश्यक है।
- फोटो
बच्चों पर रखे विशेष ध्यान
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एचके मिश्रा ने बताया कि ठंड का बच्चों पर ज्यादा असर पड़ता है। ठंड से गले में संक्रमण से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। इससे बच्चों को सर्दी, जुकाम, खांसी के बाद इंफेक्शन फेफड़े में उतरने पर निमोनिया हो जाता है। ठंड से सांस लेने में परेशानी, बुखार, उल्टी, पेट दर्द, गैस बनना, आंत में सूजन, भूूूख नहीं लगती है। ऐसे में बच्चों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
इन दवाओं की है कमी
अस्पताल में मरीजों को सभी दवाएं नहीं मिल रही हैं। इस समय सांस की बीमारी से पीड़ित लोग व बच्चों के लिए दवा की कमी है। लीओ सिट्रीजीन व मांटेलुकास्ट टैबलेट, सांस का इंजेक्शन ट्राइमाकार्ट, गैस का इंजेक्शन, दर्द की दवा एसेक्लोफेनिक, डाइक्लोफेनिक, इप्सोलीन इंजेक्शन की कमी है। इसे लोगों को बाहर से खरीदनी पड़ रही है।
ये बरतें सावधानी
सांस के मरीज मास्क पहनें, हाथ धोकर खाना खाएं
घी, पापड़, अचार, खटाई, चाय का सेवन न करें, फल खाएं
ठंड से बचने के लिए टोपी, मोजा व अच्छे से कपड़ा पहनें
ठंडी हवा, धूल, धुआं से बचें, सुबह प्राणायाम व योग करें
बच्चों को गर्म कपड़े पहनाकर रखें
बच्चों को बाहर की चीजें खाने को न दें, गर्म भोजन, दूध, दाल, सूप व मौसमी फल दें
खुली ठंडी हवा में अनावश्यक न घूमने दें
साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें
कोट
अस्पताल में मरीज बढ़े हैं। थोड़ी सी दिक्कत होने पर लापरवाही न बरतें, तत्काल चिकित्सक के पास जाएं और इलाज कराएं। अस्पताल में इलाज की सुविधा है। जो कमी है वह शीघ्र दूर हो जाएगी।
-डॉ. एचके मिश्रा, चिकित्सा अधीक्षक
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सांस, अस्थमा, एलर्जी, निमोनिया, बुखार, पेट दर्द से पीड़ित लोग पहुंचे जिला अस्पताल
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। दो दिन से गलन बढ़ गई है। इसका असर सांस, अस्थमा, एलर्जी के मरीजों पर दिख रहा है। मेडिकल कॉलेज के चेस्ट व टीबी विभाग में इन बीमारियों के मरीजों की भीड़ बढ़ गई है। ठंड बढ़ने से छोटे बच्चे भी तेजी से बीमार पड़ रहे हैं। ऐसे में डॉक्टरों ने खासकर बच्चों और बूढ़ों को विशेष सतर्क बरतने की सलाह दी है। मरीजों के अचानक बढ़ने से स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ रहा है। दवाओं की कमी होने के चलते लोग बाहर से दवाएं खरीदने को मजबूर हैं।
दो दिन से हवा चलने से मौसम बदल गया है। गलन बढ़ गई है। थोड़ी सी लापरवाही बच्चों व बुजुर्गों पर भारी पड़ रही है। महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल में सांस, निमोनिया, बुखार, पेट दर्द के मरीजों की संख्या में शुक्रवार को इजाफा देखा गया। ओपीडी के चेस्ट एवं टीबी विभाग में दो दिन से मरीजों की संख्या बढ़ गई है।
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शुक्रवार को चिकित्सक कक्ष के बाहर भीड़ थी। कुछ लोग कुर्सी पर बैठकर प्रतीक्षा कर रहे थे। चिकित्सकों ने 120 से अधिक मरीजों का इलाज किया। इसमें सांस, अस्थमा से पीड़ित लोगों की संख्या ज्यादा थी। उन्हें दवा और इन्हेलर लेने को कहा गया। वहीं, क्षय रोग के करीब 10 मरीजों का इलाज किया गया।
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उधर, एमसीएच विंग स्थित बाल रोग विभाग में अभिभावक अपने बच्चों को लेकर लंबी लाइन में खड़े थे। इलाज के लिए उन्हें एक से दो घंटे तक इंतजार करना पड़ा। इसमें अधिकतर बच्चे बुखार, निमोनिया, पेट दर्द से पीड़ित थे। कुछ महिलाएं बच्चों को लेकर फर्श पर बैठी दिखीं। बाल रोग विभाग में चिकित्सक ने तकरीबन डेढ़ सौ बच्चों का इलाज किया।
निमोनिया से पीड़ित गंभीर करीब पांच बच्चों को भर्ती किया गया, जबकि अन्य को दवा दी गई। गंभीर रूप से बीमार पांच मरीजों को भर्ती किया गया, जबकि अन्य को दवा देकर घर भेज दिया गया। अस्पताल में कुछ दवाएं न होने के कारण लोगों को बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। ऐसे में लोगों को परेशानी हो रही है।
- फोटो
थोड़ी सी लापरवाही पड़ सकती है भारी
चेस्ट एवं टीबी विभाग के असिस्टेंट प्रो. डॉ. अनुराग शुक्ला ने बताया कि ठंड के मौसम में एलर्जी, अस्थमा व सांस के मरीजों को खतरा बढ़ जाता है। मुंह से सांस लेने से ठंडी हवा जाती है। ठंड से नली सिकुड़ जाती है। नाक से सांस लेने से गर्म हवा जाती है। एलर्जी से सर्दी, जुकाम, आंख में खुजली, पानी आना, सिर दर्द होता है। अस्थमा में सांस फूलने लगता है। ऐसे में सावधानी आवश्यक है।
- फोटो
बच्चों पर रखे विशेष ध्यान
बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एचके मिश्रा ने बताया कि ठंड का बच्चों पर ज्यादा असर पड़ता है। ठंड से गले में संक्रमण से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है। इससे बच्चों को सर्दी, जुकाम, खांसी के बाद इंफेक्शन फेफड़े में उतरने पर निमोनिया हो जाता है। ठंड से सांस लेने में परेशानी, बुखार, उल्टी, पेट दर्द, गैस बनना, आंत में सूजन, भूूूख नहीं लगती है। ऐसे में बच्चों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
इन दवाओं की है कमी
अस्पताल में मरीजों को सभी दवाएं नहीं मिल रही हैं। इस समय सांस की बीमारी से पीड़ित लोग व बच्चों के लिए दवा की कमी है। लीओ सिट्रीजीन व मांटेलुकास्ट टैबलेट, सांस का इंजेक्शन ट्राइमाकार्ट, गैस का इंजेक्शन, दर्द की दवा एसेक्लोफेनिक, डाइक्लोफेनिक, इप्सोलीन इंजेक्शन की कमी है। इसे लोगों को बाहर से खरीदनी पड़ रही है।
ये बरतें सावधानी
सांस के मरीज मास्क पहनें, हाथ धोकर खाना खाएं
घी, पापड़, अचार, खटाई, चाय का सेवन न करें, फल खाएं
ठंड से बचने के लिए टोपी, मोजा व अच्छे से कपड़ा पहनें
ठंडी हवा, धूल, धुआं से बचें, सुबह प्राणायाम व योग करें
बच्चों को गर्म कपड़े पहनाकर रखें
बच्चों को बाहर की चीजें खाने को न दें, गर्म भोजन, दूध, दाल, सूप व मौसमी फल दें
खुली ठंडी हवा में अनावश्यक न घूमने दें
साफ-सफाई पर विशेष ध्यान दें
कोट
अस्पताल में मरीज बढ़े हैं। थोड़ी सी दिक्कत होने पर लापरवाही न बरतें, तत्काल चिकित्सक के पास जाएं और इलाज कराएं। अस्पताल में इलाज की सुविधा है। जो कमी है वह शीघ्र दूर हो जाएगी।
-डॉ. एचके मिश्रा, चिकित्सा अधीक्षक