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Deoria News: नर्सरी हो गई खराब तो न हों निराश, करें सब्जी की खेती, होगा मुनाफा
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- लू की चपेट में आने से खराब हो गई है धान की नर्सरी, रोपाई के लिए पौधे पड़ रहे कम
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। घाट मुजहना के प्रभुनाथ मिश्र ने दो एकड़ धान लगाने के लिए 28 मई को नर्सरी डाली। समय-समय पर पंपिंगसेट से सिंचाई करने के बाद भी पौधों की बढ़वार अच्छी नहीं हुई। इसके चलते तैयार पौधे डेढ़ एकड़ खेत में ही समाप्त हो गए। बाकी खेत खेत खाली होने की चिंता सता रही है। यही हाल बनकटा तिवारी निवासी शुभम पांडेय का है। इनकी नर्सरी भी लू की शिकार हो गई। अब रोपाई के लिए धान के पौधे कम पड़ रहे हैं। ऐसे किसानों को कृषि विशेषज्ञ सब्जी लगाने की सलाह दे रहे हैं।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी रतन शंकर ओझा ने बताया कि पॉली हाउस तकनीक का उपयोग करके टमाटर को किसी भी मौसम में उगाया जा सकता है। टमाटर की मांग पूरे 12 महीने बनी रहती है। पूसा शीतल, पूसा-120, पूसा रूबी, पूसा गौरव, अर्का विकास, अर्का सौरभ और सोनाली इसकी प्रमुख देशी किस्में हैं। इसके अलावा टमाटर की कई हाइब्रिड किस्में हैं। करेले की खेती भी बारिश के मौसम में की जा सकती है। करेला स्वास्थ्य की दृष्टि से काफी उपयोगी होता है। डायबिटिज वाले रोगियों को करेला खाने की सलाह दी जाती है। ये खून साफ करता है और शरीर में इंसुलिन के स्तर को नियंत्रित रखने में सहायक है। इसकी खेती के लिए दोमट मिट्टी उपयुक्त रहती है। अच्छे जल निकास वाली भूमि इसकी खेती के लिए अच्छी होती है। करेले की फसल के लिए 500 ग्राम बीज प्रति एकड़ पर्याप्त होता है। करेले की उन्नत किस्मों में पूसा हाइब्रिड वन, पूसा हाइब्रिड टू, पूसा विशेष आदि अधिक उत्पादन देने वाली किस्में हैं। इसके अलावा भिंडी की खेती कई प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है। इसके लिए सबसे उपयुक्त मिट्टी रेतीली और चिकनी होती है। भिंडी की उन्नत किस्मों में वर्षा उपहार, अर्का अभय, परभनी क्रांति, पूसा मखमली, पूसा सावनी आदि हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। घाट मुजहना के प्रभुनाथ मिश्र ने दो एकड़ धान लगाने के लिए 28 मई को नर्सरी डाली। समय-समय पर पंपिंगसेट से सिंचाई करने के बाद भी पौधों की बढ़वार अच्छी नहीं हुई। इसके चलते तैयार पौधे डेढ़ एकड़ खेत में ही समाप्त हो गए। बाकी खेत खेत खाली होने की चिंता सता रही है। यही हाल बनकटा तिवारी निवासी शुभम पांडेय का है। इनकी नर्सरी भी लू की शिकार हो गई। अब रोपाई के लिए धान के पौधे कम पड़ रहे हैं। ऐसे किसानों को कृषि विशेषज्ञ सब्जी लगाने की सलाह दे रहे हैं।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी रतन शंकर ओझा ने बताया कि पॉली हाउस तकनीक का उपयोग करके टमाटर को किसी भी मौसम में उगाया जा सकता है। टमाटर की मांग पूरे 12 महीने बनी रहती है। पूसा शीतल, पूसा-120, पूसा रूबी, पूसा गौरव, अर्का विकास, अर्का सौरभ और सोनाली इसकी प्रमुख देशी किस्में हैं। इसके अलावा टमाटर की कई हाइब्रिड किस्में हैं। करेले की खेती भी बारिश के मौसम में की जा सकती है। करेला स्वास्थ्य की दृष्टि से काफी उपयोगी होता है। डायबिटिज वाले रोगियों को करेला खाने की सलाह दी जाती है। ये खून साफ करता है और शरीर में इंसुलिन के स्तर को नियंत्रित रखने में सहायक है। इसकी खेती के लिए दोमट मिट्टी उपयुक्त रहती है। अच्छे जल निकास वाली भूमि इसकी खेती के लिए अच्छी होती है। करेले की फसल के लिए 500 ग्राम बीज प्रति एकड़ पर्याप्त होता है। करेले की उन्नत किस्मों में पूसा हाइब्रिड वन, पूसा हाइब्रिड टू, पूसा विशेष आदि अधिक उत्पादन देने वाली किस्में हैं। इसके अलावा भिंडी की खेती कई प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है। इसके लिए सबसे उपयुक्त मिट्टी रेतीली और चिकनी होती है। भिंडी की उन्नत किस्मों में वर्षा उपहार, अर्का अभय, परभनी क्रांति, पूसा मखमली, पूसा सावनी आदि हैं।
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