जनपद की जेल में बंदियों को इलाज की दरकार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विवाद के पांच दिन बीत जाने के बाद भी घायल बंदियों का समुचित इलाज नहीं हो पा रहा है। जेल प्रशासन काम चलाऊ उपचार करके बंदियों को राहत दे रही है। दर्द की गोली और सुई के भरोसे पूरा जेल है। बंदियों के परिजन बाहर से दवा जेल में ले जा रहे हैं।
पिटाई से घायल कई बंदी ऐसे हैं जिनके हाथ पैट टूट गए हैं। अब हड्डी सड़ने का खतरा पैदा हो गया है।
गैररीन होने की आशंका से बंदी भयभीत हैं। जेल में मुलाकात कर लौट रहे घर वाले फिर जेल प्रशासन को कोस रहे हैं। उनका कहना था कि जेल में इलाज की व्यवस्था ठीक नहीं है। इधर, पिटाई से घायल बंदियों को धीरे-धीरे अस्पताल पहुंचाया जा रहा है।
मंगलवार की सुबह जेल में दो गुटों के बीच बवाल हो गया था। एक गुट ने जेल में सुविधा को लेकर राइटर को पीट दिया है। आरोप था कि राइटर जेल अधीक्षक के लिए मुखबिरी करता है और जेल की हर सूचना को लीक करता है। विवाद के बाद जेल अधीक्षक ने कड़ाई की कोशिश की तो बंदियों ने उन्हें मारने के लिए दौड़ा लिया था। हजारों बंदियों ने जेल में करीब चार घंटे तक जमकर उत्पात मचाया था। कुछ लोग जेल को उड़ाने की साजिश रच रहे थे। लेकिन एसपी प्रभाकर चौधरी ने फोर्स के साथ जेल में उत्पात कर रहे लोगों पर सख्ती शुरू कर दी जिससे बड़ी घटना टल गई।
फायरिंग और आंसू गैस के गोले दागने के बाद मामला शांत हुआ। पुलिस और बंदियों के बीच घंटों पत्थर चले। पुलिस का दावा है कि पत्थरबाजी में कई बंदियों के सिर फट गए। करीब दो सौ बंदी गंभीर रुप से घायल हो गए। शुक्रवार की दोपहर जेल में मुलाकात कर लौटे परिजनों ने बताया कि करीब सैकड़ों लोग इलाज के अभाव में तड़प रहे हैं। दर्द की दवा देकर बंदियों को इलाज किया जा रहा है। करीब तीस बंदी ऐसे हैं जिनका हाथ पैट टूट गया है और प्लास्टर तक नहीं मुहैया हो सका है।
परिवार के लोग बाहर इलाज करने जाने की मांग रहे रहे है। शुक्रवार को भी सैकड़ों महिला बंदियों का हाल जानने को जेल पहुंची। सूत्रों की मानें तो जिन बंदियों की हालत खराब है। उन्हें मिलने नहीं दिया जा रहा है।