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पटाखों-आतिशबाजी से हवा हुई प्रदूषित
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। दीपावली के अवसर पर फोड़े गए पटाखे और की गई आतिशबाजी से जिले की हवा प्रदूषित हो गई। जानकार इसे मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक मान रहे हैं।
प्रदेश सरकार की मनाही के बावजूद भी शहर से लेकर गांवों तक लोगों ने खूब आतिशबाजी की। प्रदूषण बोर्ड सूचकांक मानक के अनुसार एक्यूआई 0-50 अच्छा, 51 से 100 संतोषजनक, 101 से 200 मध्यम, 201 से 300 खराब, 301 से 400 बेहद खराब, 401 से 500 गंभीर स्थिति का स्तर है। छह नवंबर की शाम साढ़े पांच बजे तक जिले का प्रदूषण स्तर 154 एक्यूूआई आंका गया। दीपावली के पहले तक जिले का एक्यूआई स्तर 51 से 100 के बीच रहा। एआरटीओ राजीव चतुर्वेदी ने बताया कि दीपावली के बाद उत्पन्न हुए प्रदूषण से स्वाभाविक रूप से बड़े शहरों की भांति यहां की हवा भी प्रदूषित हुई। जिला अस्पताल के चेस्ट रोग विशेषज्ञ डॉ.डीके सिंह ने बताया कि पटाखों से निकलने वाला धुआं सीओपीडी मरीजों को एग्रेसिव बना देता है। बच्चों को तो इस खतरनाक धुएं व प्रदूषण से बचाना अति आवश्यक है।
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देवरिया। दीपावली के अवसर पर फोड़े गए पटाखे और की गई आतिशबाजी से जिले की हवा प्रदूषित हो गई। जानकार इसे मानव स्वास्थ्य के लिए खतरनाक मान रहे हैं।
प्रदेश सरकार की मनाही के बावजूद भी शहर से लेकर गांवों तक लोगों ने खूब आतिशबाजी की। प्रदूषण बोर्ड सूचकांक मानक के अनुसार एक्यूआई 0-50 अच्छा, 51 से 100 संतोषजनक, 101 से 200 मध्यम, 201 से 300 खराब, 301 से 400 बेहद खराब, 401 से 500 गंभीर स्थिति का स्तर है। छह नवंबर की शाम साढ़े पांच बजे तक जिले का प्रदूषण स्तर 154 एक्यूूआई आंका गया। दीपावली के पहले तक जिले का एक्यूआई स्तर 51 से 100 के बीच रहा। एआरटीओ राजीव चतुर्वेदी ने बताया कि दीपावली के बाद उत्पन्न हुए प्रदूषण से स्वाभाविक रूप से बड़े शहरों की भांति यहां की हवा भी प्रदूषित हुई। जिला अस्पताल के चेस्ट रोग विशेषज्ञ डॉ.डीके सिंह ने बताया कि पटाखों से निकलने वाला धुआं सीओपीडी मरीजों को एग्रेसिव बना देता है। बच्चों को तो इस खतरनाक धुएं व प्रदूषण से बचाना अति आवश्यक है।