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Deoria News: भगवान के वन गमन का प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु
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कथा व्यास निहारिका, श्रोत संवाद
- प्राचीन शिव मंदिर मठिया परिसर में चल रही है श्रीराम कथा
- राजा दशरथ अंदर ही अंदर पश्चाताप की अग्नि में जल रहे हैं कि मेरा राम वन जा रहा है
संवाद न्यूज एजेंसी
खुखुंदू। प्राचीन शिव मंदिर मठिया में चल रही श्रीराम कथा में शनिवार को कथा व्यास निहारिका ने भगवान राम के वन गमन का प्रसंग सुनाया। इसे सुन श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। अपने प्रभु को वन जाते देख अयोध्यावासी भी उनके पीछे-पीछे चल दिए।
उन्होंने बताया कि राम को वन जाता देख राजा दशरथ अंदर ही अंदर पश्चाताप की अग्नि में जल रहे थे। वह बार-बार यही कहते कि मेरे राम को रोको, देखो मेरा राम वन के लिए चल दिया। फिर राजा दशरथ राम-राम कहते धरा पर गिर जाते हैं। इसके बाद उन्होंने अपने मंत्री सुमंत से बिलखते हुए कहा कि रथ से राम को ले जाओ। भगवान राम रथ पर माता सीता और लक्ष्मण के साथ सवार होकर अयोध्या से जैसे निकलते हैं, उनके पीछे-पीछे अयोध्यावासी भी चल देते हैं।
भगवान अयोध्यावासियों को समझाते हैं, लेकिन वह प्रभु को छोड़ने को तैयार नहीं हो रहे हैं। भगवान ने वन जाते समय पहला विश्राम सिंहबीरापुर में किया। इसके बाद भगवान राम निषाद राज से मिले। वहीं सुबह जल्दी उठकर अयोध्यावासियों और सुमंत को सोते हुए छोड़कर चल दिए। कथा वाचक ने बताया कि फिर भगवान राम केवट से मिले और केवट से उन्होंने निवेदन किया कि मुझे गंगा पार करा दो। केवट ने कहा कि प्रभु पार तो करा दूंगा, लेकिन पहले आपके पांव पखारुंगा। केवट ने भगवान का पांव पखारा और नौका में बैठाकर गंगा पार करा दी। कथा के बीच-बीच में संगीतमय भजन-कीर्तन चलता रहा।
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- राजा दशरथ अंदर ही अंदर पश्चाताप की अग्नि में जल रहे हैं कि मेरा राम वन जा रहा है
संवाद न्यूज एजेंसी
खुखुंदू। प्राचीन शिव मंदिर मठिया में चल रही श्रीराम कथा में शनिवार को कथा व्यास निहारिका ने भगवान राम के वन गमन का प्रसंग सुनाया। इसे सुन श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। अपने प्रभु को वन जाते देख अयोध्यावासी भी उनके पीछे-पीछे चल दिए।
उन्होंने बताया कि राम को वन जाता देख राजा दशरथ अंदर ही अंदर पश्चाताप की अग्नि में जल रहे थे। वह बार-बार यही कहते कि मेरे राम को रोको, देखो मेरा राम वन के लिए चल दिया। फिर राजा दशरथ राम-राम कहते धरा पर गिर जाते हैं। इसके बाद उन्होंने अपने मंत्री सुमंत से बिलखते हुए कहा कि रथ से राम को ले जाओ। भगवान राम रथ पर माता सीता और लक्ष्मण के साथ सवार होकर अयोध्या से जैसे निकलते हैं, उनके पीछे-पीछे अयोध्यावासी भी चल देते हैं।
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भगवान अयोध्यावासियों को समझाते हैं, लेकिन वह प्रभु को छोड़ने को तैयार नहीं हो रहे हैं। भगवान ने वन जाते समय पहला विश्राम सिंहबीरापुर में किया। इसके बाद भगवान राम निषाद राज से मिले। वहीं सुबह जल्दी उठकर अयोध्यावासियों और सुमंत को सोते हुए छोड़कर चल दिए। कथा वाचक ने बताया कि फिर भगवान राम केवट से मिले और केवट से उन्होंने निवेदन किया कि मुझे गंगा पार करा दो। केवट ने कहा कि प्रभु पार तो करा दूंगा, लेकिन पहले आपके पांव पखारुंगा। केवट ने भगवान का पांव पखारा और नौका में बैठाकर गंगा पार करा दी। कथा के बीच-बीच में संगीतमय भजन-कीर्तन चलता रहा।
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