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कांपते हाथों ने दी मुखाग्नि: एक साथ जलीं चार चिताएं और दो को दफनाया गया तो रो पड़ा पूरा गांव, हर ओर छाया मातम
Sun, 09 Apr 2023 01:05 PM IST
विजय पुंडीर
अमर उजाला नेटवर्क, देवरिया
अमर उजाला नेटवर्क, देवरिया
Published by: विजय पुंडीर
Updated Sun, 09 Apr 2023 01:05 PM IST
सार
शनिवार की आधी रात के बाद जब झरही नदी के तट पर सभी की चिता अगल-बगल सजीं। पिता पारस शाह ने जब चार चिताओं को बारी-बारी से मुखाग्नि दी तो मौजूद लोग रो पड़े। वहीं, रुचिका और दिव्यांशु के शव को नदी के किनारे ही दफनाया गया।
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Deoria News
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
देवरिया जिले के श्रीरामपुर थाना क्षेत्र के बंकुल गांव के झरही नदी के तट पर एक ही परिवार के चार लोगों की चिताएं सजीं और दो मासूमों के शव को दफनाया गया। रोते-बिलखते हुए कांपते हाथों ने मुखाग्नि दी तो मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। पूरी रात गांव में रोने की आवाज सुनाई दे रही थी। अंतिम संस्कार में आसपास के कई गांवों के लोग भी शामिल हुए।
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शुक्रवार की रात बंकुल गांव निवासी सोनू शाह 32 वर्ष, पत्नी सुजावती देवी, बेटा दिव्यांशु 4 वर्ष, बेटी रूचिका 7 वर्ष, बहन खुशी 13 वर्ष, भाई रवि शाह 18 वर्ष कार से उत्तराखंड के लालकुआं से आ रहे थे। रात में करीब श्रीदतगंज थाना क्षेत्र के गालिबपुर के पास कार किसी वाहन से टकरा गई, जिससे कार में सवार सभी छह लोगों की मौत हो गई।
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शनिवार की आधी रात के बाद जब झरही नदी के तट पर सभी की चिता अगल-बगल सजीं। पिता पारस शाह ने जब चार चिताओं को बारी-बारी से मुखाग्नि दी तो मौजूद लोग रो पड़े, वहीं रुचिका और दिव्यांशु के शव को नदी के किनारे ही दफनाया गया। रविवार की सुबह गांव में सन्नाटा पसरा रहा। आने-जाने वाले लोगों का तांता लगा रहा। वहीं सलेमपुर के सांसद रविंद्र कुशवाहा, भाटपाररानी एसडीएम संजीव उपाध्याय, सीओ विनय यादव ने परिवार को ढांढस बंधाया।
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उनकी भी आंखें नम थीं जिनका नहीं था कोई रिश्ता
रात होने के बावजूद जब एक साथ चार चिताएं जलीं तो आसपास के गांवों के सैकड़ों लोगों की आंखें भी नम हो गईं। वे भी रो पड़े जिनसे मरने वालों का न कोई रिश्ता, न कोई ताल्लुक। आंधी रात के बाद जब चिताएं जल रही थीं तो वहां मौजूद लोग उस समय को कोस रहे थे जब पूरा परिवार एक साथ कार से अपने गांव आने के लिए निकला था। सबकी जुबान पर यही चर्चा थी कि परिवार अगर एक साथ कार से न आता तो इतना बड़ा हादसा न होता।