जाम का इलाज नहीं ढूंढ़ पा रहे अफसर
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रुद्रपुर मोड से सुभाष चौक तक वाहनों की लंबी कतार लगी थी। पैदल चलना भी मुश्किल हो गया था। हालांकि, जाम के लिए लोग खुद भी जिम्मेदार हैं। लोगों के गलत साइट चलने की वजह से ही यह समस्या और भीषण हो जा रही है।
सड़कें संकरी हैं, वाहनों की संख्या काफी है। यातायात व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए मुठ्ठी भर पुलिसकर्मी हैं। ऐसे में जाम लगना स्वाभाविक है। बिहार के अलावा गोरखपुर, बलिया जिले को जोड़ने वाला यह मार्ग खस्ताहाल भी है।
इस पर वाहन हिचकोले तो खाते ही हैं, साथ में जाम भी परेशानी का सबब बन जाती है। स्कूल, कॉलेज और कार्यालयों के खुलने और बंद होने के समय हालत और भी बदतर हो जाती है। यदि जाम में बच्चे फंस गए तो उनका समय से स्कूल पहुंचना मुश्किल हो जाता है। यही हाल कर्मचारियों का भी है।
तत्कालीन एसपी प्रभाकर चौधरी ने चार माह पहले शहर की यातायात व्यवस्था को पटरी पर लाने में दिलचस्पी दिखाई थी। एसपी कार्यालय से सुभाष चौक तक यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए वन वे व्यवस्था की। फिलहाल यह व्यवस्था अभी लागू है। फिर भी जाम से मुक्ति नहीं मिल पा रही है।