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Deoria News: ‘पट्टी’ में होता है सौदा, ठिकाना बदलने पर बढ़ता है दाम
Wed, 20 Nov 2024 02:37 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Wed, 20 Nov 2024 02:37 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
तरकुलवा। क्षेत्र में पशु तस्करों का गिरोह काफी सक्रिय है। यह रात में वाहनों से पशुओं को बाहर भेजता है। पुलिस इन पर कार्रवाई के लिए गंभीर नहीं है। प्रत्येक शुक्रवार को बड़ी संख्या में पशु बाहर भेजे जाते हैं।
मामला तब उजागर होता है जब तस्करों की गाड़ी कहीं टकरा जाती है। तस्करों ने पूरे काम को अंजाम देने के लिए कई जिलों में अपना नेटवर्क बना रखा है। पशुओं का सौदा पट्टी में करते हैं। सौदा फाइनल तक होने तक मुनाफा बढ़ता जाता है।
तस्करों ने थाना क्षेत्र के नरायनपुर, सिसवा, मुड़िकटवा, भरौटा, कंचनपुर आदि गांवों में अपना नेटवर्क बना रखा है। इसके अलावा बरियारपुर, हेतिमपुर से भी पशुओं की तस्करी होती है। इसी तरह कुशीनगर, महाराजगंज, बहराइच, बरेली आदि जिलों से भी तस्करों के संबंध हैं।
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काम को अंजाम देने के लिए इन्होंने अपराधी, छोटे-बड़े कारोबारी, स्थानीय युवा, एजेंट और ट्रक मालिक को अपने नेटवर्क में शामिल किया है। तस्करों ने सभी का काम बांट रखा है। ज्यादातर मामलों में एक नेटवर्क के सदस्य दूसरे को नहीं जानते हैं।
चरवाहों के जरिए तय होता है सौदा
पशुओं को खरीदने के लिए तस्कर पट्टी (किलोग्राम) के भाव से सौदा करते हैं। ये सौदा ग्रामीणों और चरवाहों के जरिए किया जाता है। 100 किलो पर तीन और 200 किलो पर चार हजार रुपये का भाव होता है। आगे सौदा के क्रम में उसकी कीमत बढ़ती जाती है।
ट्रक-कंटेनर से भेजे जाते हैं पशु
पशुओं को ट्रक या कंटेनर में लोड कर भेजा जाता है। इन गाड़ियों को रात में बॉर्डर पार कराया जाता है।
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तरकुलवा। क्षेत्र में पशु तस्करों का गिरोह काफी सक्रिय है। यह रात में वाहनों से पशुओं को बाहर भेजता है। पुलिस इन पर कार्रवाई के लिए गंभीर नहीं है। प्रत्येक शुक्रवार को बड़ी संख्या में पशु बाहर भेजे जाते हैं।
मामला तब उजागर होता है जब तस्करों की गाड़ी कहीं टकरा जाती है। तस्करों ने पूरे काम को अंजाम देने के लिए कई जिलों में अपना नेटवर्क बना रखा है। पशुओं का सौदा पट्टी में करते हैं। सौदा फाइनल तक होने तक मुनाफा बढ़ता जाता है।
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तस्करों ने थाना क्षेत्र के नरायनपुर, सिसवा, मुड़िकटवा, भरौटा, कंचनपुर आदि गांवों में अपना नेटवर्क बना रखा है। इसके अलावा बरियारपुर, हेतिमपुर से भी पशुओं की तस्करी होती है। इसी तरह कुशीनगर, महाराजगंज, बहराइच, बरेली आदि जिलों से भी तस्करों के संबंध हैं।
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काम को अंजाम देने के लिए इन्होंने अपराधी, छोटे-बड़े कारोबारी, स्थानीय युवा, एजेंट और ट्रक मालिक को अपने नेटवर्क में शामिल किया है। तस्करों ने सभी का काम बांट रखा है। ज्यादातर मामलों में एक नेटवर्क के सदस्य दूसरे को नहीं जानते हैं।
चरवाहों के जरिए तय होता है सौदा
पशुओं को खरीदने के लिए तस्कर पट्टी (किलोग्राम) के भाव से सौदा करते हैं। ये सौदा ग्रामीणों और चरवाहों के जरिए किया जाता है। 100 किलो पर तीन और 200 किलो पर चार हजार रुपये का भाव होता है। आगे सौदा के क्रम में उसकी कीमत बढ़ती जाती है।
ट्रक-कंटेनर से भेजे जाते हैं पशु
पशुओं को ट्रक या कंटेनर में लोड कर भेजा जाता है। इन गाड़ियों को रात में बॉर्डर पार कराया जाता है।