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Deoria News: श्रीराम के राज्याभिषेक पर उमड़ा श्रद्धालुओ का रेला
Mon, 23 Feb 2026 01:39 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Mon, 23 Feb 2026 01:39 AM IST
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भवानीगंज। नगर पंचायत बढ़नी चाफा के बरघाट स्थित श्रीदुर्गा मंदिर परिसर में कर्मयोगी परिवार के तत्वावधान में आयोजित सनातन उद्घोष कथा महोत्सव का भव्य समापन हुआ। श्रीआदि शक्ति मां दुर्गा की प्राण-प्रतिष्ठा के अवसर पर आयोजित कथा महोत्सव में श्रीरुद्र महायज्ञ और सवा पांच लाख पार्थिव शिवलिंग पूजन भी हुई।
महोत्सव के अंतिम दिन शनिवार की रात भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक का भव्य आयोजन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और जयघोष के बीच जैसे ही भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक संपन्न हुआ, पूरा परिसर भक्तिरस में सराबोर हो गया। श्रद्धालुओं ने फूलों की पंखुड़ियों से होली खेलते हुए इस पावन क्षण को उत्सव के रूप में मनाया और जय श्रीराम के गगनभेदी नारों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
कथा के दौरान रावण वध प्रसंग का वर्णन करते हुए साध्वी सरस्वती ने कहा कि त्रेता युग में रावण का अंत हुआ, लेकिन आज भी समाज में रावण विभिन्न रूपों में मौजूद है। उन्होंने अपने उद्बोधन के माध्यम से सामाजिक जागरूकता, आत्मबल और राष्ट्र के प्रति सजगता का संदेश देते हुए कहा कि प्रत्येक स्त्री और पुरुष को अपने भीतर भगवान श्रीराम की शक्ति को जागृत करना होगा, तभी समाज की अस्मिता और मूल्यों की रक्षा संभव है।
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महोत्सव के अंतिम दिन शनिवार की रात भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक का भव्य आयोजन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और जयघोष के बीच जैसे ही भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक संपन्न हुआ, पूरा परिसर भक्तिरस में सराबोर हो गया। श्रद्धालुओं ने फूलों की पंखुड़ियों से होली खेलते हुए इस पावन क्षण को उत्सव के रूप में मनाया और जय श्रीराम के गगनभेदी नारों से वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
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कथा के दौरान रावण वध प्रसंग का वर्णन करते हुए साध्वी सरस्वती ने कहा कि त्रेता युग में रावण का अंत हुआ, लेकिन आज भी समाज में रावण विभिन्न रूपों में मौजूद है। उन्होंने अपने उद्बोधन के माध्यम से सामाजिक जागरूकता, आत्मबल और राष्ट्र के प्रति सजगता का संदेश देते हुए कहा कि प्रत्येक स्त्री और पुरुष को अपने भीतर भगवान श्रीराम की शक्ति को जागृत करना होगा, तभी समाज की अस्मिता और मूल्यों की रक्षा संभव है।
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