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हत्या के जुर्म में तीन भाइयों को सजा
देवरिया
Updated Fri, 12 Aug 2016 10:21 PM IST
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चंडीगढ़ कोर्ट, हाईकोर्ट, अदालत, न्यायालय
- फोटो : file photo
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देवरिया। ढाई साल पहले हत्या के मामले में कोर्ट ने सगे तीन भाइयों को दोषी पाते हुए कठोर कारावास की सजा सुनाई है। मुकदमा का निर्णय 30 माह में हुआ है। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता फौजदारी रामसिंगार यादव ने बताया कि घटना सदर कोतवाली के सरौरा टोला धूमनगर में पुरानी दुश्मनी में आठ दिसंबर 2013 को सुबह सात बजे की है। रामप्रवेश और रमेश को मारने के लिए तीन सगे भाइयों रामकविला, रामबेेलास, रामदुलार ने दौड़ा लिया। अपनी जान बचाने के लिए रामप्रवेश और रमेश घर में चले गए।
तीनों आरोपियों ने घर में घुसकर हमला कर दिया। जिसमें रामप्रवेश का सिर फट गया और हड्डियां टूट गईं। इसके बाद रामप्रवेश और रमेश बेहोश हो गए। परिवारवालों ने दोनों को जिला अस्पताल पहुंचाया। रामप्रवेश की हालत नाजुक देखकर डॉक्टर ने मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। मेडिकल कॉलेज में तीन दिन बाद इलाज के दौरान रामप्रवेश की मौत हो गई। रामप्रवेश के पिता गंगा प्रसाद की तहरीर पर तीनों भाइयों पर गैर इरादतन हत्या समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज हुआ।
अभियोजन पक्ष ने सात गवाहों को पेश किया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अपर जिला जज साधना रानी ठाकुर की अदालत ने गैर इरादतन हत्या में आठ वर्ष की कठोर सजा और अन्य दो धाराओं में तीन वर्ष और एक वर्ष की सजा सुनाया। साथ ही सात हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। न्यायालय ने सभी सजाएं साथ-साथ चलने का आदेश दिया।
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तीनों आरोपियों ने घर में घुसकर हमला कर दिया। जिसमें रामप्रवेश का सिर फट गया और हड्डियां टूट गईं। इसके बाद रामप्रवेश और रमेश बेहोश हो गए। परिवारवालों ने दोनों को जिला अस्पताल पहुंचाया। रामप्रवेश की हालत नाजुक देखकर डॉक्टर ने मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। मेडिकल कॉलेज में तीन दिन बाद इलाज के दौरान रामप्रवेश की मौत हो गई। रामप्रवेश के पिता गंगा प्रसाद की तहरीर पर तीनों भाइयों पर गैर इरादतन हत्या समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज हुआ।
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अभियोजन पक्ष ने सात गवाहों को पेश किया। दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अपर जिला जज साधना रानी ठाकुर की अदालत ने गैर इरादतन हत्या में आठ वर्ष की कठोर सजा और अन्य दो धाराओं में तीन वर्ष और एक वर्ष की सजा सुनाया। साथ ही सात हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया। न्यायालय ने सभी सजाएं साथ-साथ चलने का आदेश दिया।
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