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तस्कर न रुकें तो गोली चलाने से नहीं हिचकेगी पुलिस
Mon, 14 Jan 2019 12:22 AM IST
राकेश पांडेय
deoria
deoria
Published by: राकेश पांडेय
Updated Mon, 14 Jan 2019 12:22 AM IST
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डेमो
- फोटो : डेमो
देवरिया। बॉर्डर के रास्ते बिहार में गोवंशीय मवेशी और शराब तस्करी का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा। तस्करी पर अंकुश के लिए एसपी ने बॉर्डर चौकी पर तैनात दरोगाओं को कड़े निर्देश दिए हैं। उन्हें यह भी छूट दिया है कि अगर तस्कर रोकने पर भी न रुकें तो फायरिंग से न चूकें। हालांकि, फायरिंग वाहन के पहियों पर करनी होगी। एसपी ने संबंधित दरोगाओं का प्रशिक्षण भी शुरू करा दिया है।
जिले में लगातार बढ़ती तस्करी रोकना पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई है। एसपी ने इसे गंभीरता से लिया और तेज तर्रार दरोगाओं को चौकी इंचार्ज के रूप में बॉर्डर चौकियों पर तैनात किया। लार के मेहरौना में दरोगा आशुतोष कुमार, खामपार के भवानी छापर चौकी पर अमरनाथ सोनकर और बनकटा के रामपुर में रामप्रताप यादव को जिम्मेदारी सौंपी गई। तस्करों पर शिकंजा कसने के लिए इन चौकी इंचार्जों को पुलिस लाइंस में बुलाकर एके 47, एसएलआर, इंसास समेत प्रमुख असलहा चलाने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। एसपी ने बॉर्डर चौकी इंचार्जों को निर्देश दे रखे हैं कि तस्कर अगर रोकने पर भी वाहन न रोकें तो टॉयर में गोली मारने से न हिचकें। किसी भी हाल में तस्कर बॉर्डर पार नहीं करने चाहिए। एसपी के इस निर्देश का असर भी दिखने लगा है। हालांकि, दरोगा अभी फायरिंग से परहेज कर रहे हैं। इसी का असर रहा कि एक सप्ताह पूर्व मेहरौना के रास्ते पुलिस के सामने तीन पिकअप गोवंशीय पशुओं को लेकर तस्कर भाग निकले। इसकी जानकारी होने पर एसपी ने चौकी इंचार्ज आशुतोष कुमार को तलब कर हिदायत भी दी थी।
मेहरौना बॉर्डर पर बरती जा रही सख्ती
देवरिया। गोरखपुर आईजी ने गोवंशीय मवेशी की तस्करी का रूट चिह्नित किया था। इसमें गोरखपुर के बड़हलगंज, बरहज, मईल, लार और मेहरौना के रास्ते बिहार भेजने के रूट शामिल थे। बावजूद इसके पशु तस्करों पर लगाम नहीं लग रही है। एसपी की सख्ती से पशु तस्करों में पहले की अपेक्षा काफी हद तक कमी आई है। रात को मेहरौना चौकी इंचार्ज के अलावा लार एसओ अनिल सिंह भी रामजानकी मार्ग पर गश्त बढ़ा दी है। पुलिस ने एक वर्ष में 430 पशुओं को तस्करों के शिकंजे से मुक्त करा चुकी है।
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पुलिस की उदासीनता से होती है तस्करी
देवरिया। हियुवा नेता अरुण कुमार सिंह का कहना है कि पुलिस की उदासीनता के कारण पशुओं की तस्करी होती है। इसका विरोध शुरू से लार में हियुवा कार्यकर्ता करते चले आ रहे हैं। तीन दर्जन से अधिक गायों को पकड़कर कार्यकर्ता पुलिस को सौंपे हैं। अब भी तस्करों पर नजर रखी जाती है।
कोट
गोवंशीय मवेशी और शराब की तस्करी किसी भी हाल में बॉर्डर इलाके से नहीं होने दी जाएगी। इसके लिए बनकटा, खामपार और लार के बॉर्डर चौकी पर तेज तर्रार चौकी इंचार्जों की तैनाती की गई है। इन्हें असलहा चलाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। भागने वाले तस्करों को पकड़ने के लिए वाहन के टॉयर में गोली मारने के निर्देश दिए गए हैं।
-एन. कोलांचि, एसपी।
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जिले में लगातार बढ़ती तस्करी रोकना पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई है। एसपी ने इसे गंभीरता से लिया और तेज तर्रार दरोगाओं को चौकी इंचार्ज के रूप में बॉर्डर चौकियों पर तैनात किया। लार के मेहरौना में दरोगा आशुतोष कुमार, खामपार के भवानी छापर चौकी पर अमरनाथ सोनकर और बनकटा के रामपुर में रामप्रताप यादव को जिम्मेदारी सौंपी गई। तस्करों पर शिकंजा कसने के लिए इन चौकी इंचार्जों को पुलिस लाइंस में बुलाकर एके 47, एसएलआर, इंसास समेत प्रमुख असलहा चलाने के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। एसपी ने बॉर्डर चौकी इंचार्जों को निर्देश दे रखे हैं कि तस्कर अगर रोकने पर भी वाहन न रोकें तो टॉयर में गोली मारने से न हिचकें। किसी भी हाल में तस्कर बॉर्डर पार नहीं करने चाहिए। एसपी के इस निर्देश का असर भी दिखने लगा है। हालांकि, दरोगा अभी फायरिंग से परहेज कर रहे हैं। इसी का असर रहा कि एक सप्ताह पूर्व मेहरौना के रास्ते पुलिस के सामने तीन पिकअप गोवंशीय पशुओं को लेकर तस्कर भाग निकले। इसकी जानकारी होने पर एसपी ने चौकी इंचार्ज आशुतोष कुमार को तलब कर हिदायत भी दी थी।
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मेहरौना बॉर्डर पर बरती जा रही सख्ती
देवरिया। गोरखपुर आईजी ने गोवंशीय मवेशी की तस्करी का रूट चिह्नित किया था। इसमें गोरखपुर के बड़हलगंज, बरहज, मईल, लार और मेहरौना के रास्ते बिहार भेजने के रूट शामिल थे। बावजूद इसके पशु तस्करों पर लगाम नहीं लग रही है। एसपी की सख्ती से पशु तस्करों में पहले की अपेक्षा काफी हद तक कमी आई है। रात को मेहरौना चौकी इंचार्ज के अलावा लार एसओ अनिल सिंह भी रामजानकी मार्ग पर गश्त बढ़ा दी है। पुलिस ने एक वर्ष में 430 पशुओं को तस्करों के शिकंजे से मुक्त करा चुकी है।
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पुलिस की उदासीनता से होती है तस्करी
देवरिया। हियुवा नेता अरुण कुमार सिंह का कहना है कि पुलिस की उदासीनता के कारण पशुओं की तस्करी होती है। इसका विरोध शुरू से लार में हियुवा कार्यकर्ता करते चले आ रहे हैं। तीन दर्जन से अधिक गायों को पकड़कर कार्यकर्ता पुलिस को सौंपे हैं। अब भी तस्करों पर नजर रखी जाती है।
कोट
गोवंशीय मवेशी और शराब की तस्करी किसी भी हाल में बॉर्डर इलाके से नहीं होने दी जाएगी। इसके लिए बनकटा, खामपार और लार के बॉर्डर चौकी पर तेज तर्रार चौकी इंचार्जों की तैनाती की गई है। इन्हें असलहा चलाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। भागने वाले तस्करों को पकड़ने के लिए वाहन के टॉयर में गोली मारने के निर्देश दिए गए हैं।
-एन. कोलांचि, एसपी।