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झोपड़ी फुंकी, बच्ची जिंदा जली
ब्यूरो अमर उजाला/ देवरिया
Updated Tue, 15 Mar 2016 10:45 PM IST
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इसी जगह झाेपड़ी में जिंदा जली थी बच्ची।
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया के भटनी में झोपड़ी में आग लगने से उसमें मौजूद बच्ची की जलकर मौत हो गई। बच्ची को बचाने में नानी गंभीर रूप से झुलस गईं। एक घंटे की मशक्कत के बाद गांव वालों ने आग पर काबू पाया।
पुलिस ने बच्ची की लाश को कब्जे में लेकर पीएम के लिए भेज दिया। मौके पर पहुंचे तहसीलदार ने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया और घटना की जानकारी ली।
डेमुसा गांव निवासी जावेद पत्नी आसिमा के साथ सोमवार की रात अपने बहन के घर करौंदी गया था। घर पर जावेद की पांच वर्षीय बेटी परवीन अपनी नानी रैतुन्निशा के साथ थी। भोजन करने के बाद दोनों झोपड़ी में सो रही थीं।
रात करीब 11 बजे ढिबरी की लपट से झोपड़ी में आग पकड़ ली। आग की लपट पता लगने पर रैतुन्निशा की नींद खुली तो वह नतिनी परवीन को बचाने की कोशिश की। लेकिन आग की लपटों से उसे नहीं बचा सकीं।
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इस दौरान वह खुद झुलस गईं। महिला के शोर करने पर गांव वाले पहुंचे और आग बुझाना शुरू किया। आग बुझाने के बाद किसी तरह लोगों ने बच्ची को बाहर निकाला। लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
झोपड़ी के अंदर बंधी पांच बकरियां भी जलकर राख हो गईं। झोपड़ी में रखा 40 हजार रुपये नकदी समेत करीब एक लाख रुपये का सामान जलकर राख हो गया। बच्ची की मौत के बाद घर वालों में कोहराम मच गया।
मंगलवार को भाटपाररानी के तहसीलदार ओमप्रकाश गांव पहुंचे और आग में हुए नुकसान का आंकलन किया। इस बाबत थानाध्यक्ष राजेंद्र प्रताप सिंह यादव ने बताया कि लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
पुलिस ने बच्ची की लाश को कब्जे में लेकर पीएम के लिए भेज दिया। मौके पर पहुंचे तहसीलदार ने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया और घटना की जानकारी ली।
डेमुसा गांव निवासी जावेद पत्नी आसिमा के साथ सोमवार की रात अपने बहन के घर करौंदी गया था। घर पर जावेद की पांच वर्षीय बेटी परवीन अपनी नानी रैतुन्निशा के साथ थी। भोजन करने के बाद दोनों झोपड़ी में सो रही थीं।
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रात करीब 11 बजे ढिबरी की लपट से झोपड़ी में आग पकड़ ली। आग की लपट पता लगने पर रैतुन्निशा की नींद खुली तो वह नतिनी परवीन को बचाने की कोशिश की। लेकिन आग की लपटों से उसे नहीं बचा सकीं।
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इस दौरान वह खुद झुलस गईं। महिला के शोर करने पर गांव वाले पहुंचे और आग बुझाना शुरू किया। आग बुझाने के बाद किसी तरह लोगों ने बच्ची को बाहर निकाला। लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
झोपड़ी के अंदर बंधी पांच बकरियां भी जलकर राख हो गईं। झोपड़ी में रखा 40 हजार रुपये नकदी समेत करीब एक लाख रुपये का सामान जलकर राख हो गया। बच्ची की मौत के बाद घर वालों में कोहराम मच गया।
मंगलवार को भाटपाररानी के तहसीलदार ओमप्रकाश गांव पहुंचे और आग में हुए नुकसान का आंकलन किया। इस बाबत थानाध्यक्ष राजेंद्र प्रताप सिंह यादव ने बताया कि लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।