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जिला अस्पताल में युवक की मौत के बाद इमरजेंसी पर बवाल
देवरिया
Updated Wed, 26 Apr 2017 10:39 PM IST
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युवक की मौत को लेकर जिला अस्पताल के इमरजेंसी में हंगामा करते लोग।
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। युवक की मौत के बाद नाराज परिजनों ने जिला अस्पताल की इमरजेंसी में जमकर हंगामा किया। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर और कर्मचारी अस्पताल छोड़कर भाग निकले। करीब आधे घंटे तक अस्पताल में अफरातफरी मची रही। मौके पर पहुंची फोर्स ने किसी तरह विवाद को शांत कराया। शहर के कैलाशपुरी लेन नंबर दो निवासी विकास गुप्ता पुत्र गुड्डू ने बुधवार की शाम कमरे में फंदा लगा लिया। जानकारी होने पर परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया।
शव लेकर परिजन घर पहुंचे। पिता को आभास हुआ कि विकास जिंदा है और उसे लेकर फिर जिला अस्पताल पहुंच गए। आरोप था कि डाक्टर ने सही तरीके से विकास को चेक नहीं किया। इसी बात पर हंगामा शुरू हो गया। विवाद बढ़ा देख डाक्टर और कर्मचारी इमरजेंसी कक्ष छोड़कर भाग गए। नाराज लोग नारेबाजी करते रहे। विवाद की सूचना पर सीओ सिटी अजय कुमार सिंह कई चौकी प्रभारी के साथ मौके पर पहुंचे और विवाद कर रहे लोगों को शांत कराया।
डॉक्टर ने दूसरी बार भी चेक किया और विकास को मृत घोषित कर दिया। परिजन फिर भी नहीं माने और एक निजी अस्पताल चले गए। विवाद के बाद एसएसआई मृत्युंजय पाठक ने ड्यूटी में तैनात डॉक्टर और कर्मचारियों से बातचीत की। इसके बाद डॉक्टर काम पर लौटे। मजे की बात यह है कि इमरजेंसी में होने वाले विवाद को रोकने के लिए अस्पताल में पुलिस सहायता केंद्र खोला गया है।
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जहां हमेशा एक दरोगा औैर दो पुलिसकर्मियों की तैनात की जाती थी। विवाद के दौरान कोई भी पुलिसवाला मौके पर नहीं था। सीओ ने इस संबंध में जानकारी जुटाई और मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कहीं।
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शव लेकर परिजन घर पहुंचे। पिता को आभास हुआ कि विकास जिंदा है और उसे लेकर फिर जिला अस्पताल पहुंच गए। आरोप था कि डाक्टर ने सही तरीके से विकास को चेक नहीं किया। इसी बात पर हंगामा शुरू हो गया। विवाद बढ़ा देख डाक्टर और कर्मचारी इमरजेंसी कक्ष छोड़कर भाग गए। नाराज लोग नारेबाजी करते रहे। विवाद की सूचना पर सीओ सिटी अजय कुमार सिंह कई चौकी प्रभारी के साथ मौके पर पहुंचे और विवाद कर रहे लोगों को शांत कराया।
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डॉक्टर ने दूसरी बार भी चेक किया और विकास को मृत घोषित कर दिया। परिजन फिर भी नहीं माने और एक निजी अस्पताल चले गए। विवाद के बाद एसएसआई मृत्युंजय पाठक ने ड्यूटी में तैनात डॉक्टर और कर्मचारियों से बातचीत की। इसके बाद डॉक्टर काम पर लौटे। मजे की बात यह है कि इमरजेंसी में होने वाले विवाद को रोकने के लिए अस्पताल में पुलिस सहायता केंद्र खोला गया है।
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जहां हमेशा एक दरोगा औैर दो पुलिसकर्मियों की तैनात की जाती थी। विवाद के दौरान कोई भी पुलिसवाला मौके पर नहीं था। सीओ ने इस संबंध में जानकारी जुटाई और मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कहीं।