{"_id":"5c377a1fbdec2273ad00a6f2","slug":"91547139615-deoria-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एक ही चिता पर मां-बेटे का हुआ अंतिम संस्कार","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
एक ही चिता पर मां-बेटे का हुआ अंतिम संस्कार
विज्ञापन
भाटपाररानी। पति से विवाद के बाद तीन बच्चों के साथ ट्रेन से कटकर जान देने वाली महिला और तीन बच्चों का शव गुरुवार को पोस्टमार्टम के बाद टीकमपार गांव पहुंचा। मासूम बच्चों और मां का शव देख लोग सिहर उठे। मां और बेटे के शव का एक ही चिता पर दाह संस्कार हुआ। सुग्रीव ने दोनों शव को मुखाग्नि दी। चार माह के बच्चे को मिट्टी में दफन किया गया।
डीएम के आदेश पर मां मालती देवी और रितेश और नितेश के शव का पोस्टमार्टम बुधवार की देर रात ही होना था। चिकित्सकों के नहीं पहुंचने पर गुरुवार को सुबह पोस्टमार्टम हुआ। पोस्टमार्टम के दोपहर साढ़े 11 बजे शव गांव पहुंचा। बेटी ऋतु का शव सदर अस्पताल में होने के कारण समय से पोस्टमार्टम नहीं हो सका। लिहाजा मां और रितेश के शव को एक चिता पर रखकर रखकर मुखाग्नि दी गई। नीतेश के शव को दफनाया गया। शाम को पोस्टमार्टम के बाद ऋतु के शव का अंतिम संस्कार हुआ। इस हृदयविदारक मंजर को देख लोगों की आंखें नम थीं। महिलाओं के करुण क्रंदन से पूरा वातावरण शोक में डूब गया था। पति सुग्रीव उसके बड़े भाई चंद्रजीत यादव उर्फ आल्हा, अशोक यादव व उनके पिता दूधनाथ यादव का रोते-रोते बुरा हाल था। सुग्रीव बार-बार चीखते हुए कह रहा था कि कल्पना भी नहीं थी, उसे यह दिन देखना पड़ेगा। अंतिम संस्कार के समय ग्राम प्रधान लाल मोहम्मद, राधा यादव, ब्लॉक प्रमुख व्यास यादव, जिला पंचायत सदस्य अशोक यादव, गुंजन सिंह, रामा यादव आदि मौजूद रहे। महिला के मायके से भाई द्वारिका यादव, प्रेमचंद यादव, संतोष यादव, संजय यादव सहित अन्य लोग पहुंचे थे। सभी ने नम आंखों से अपनी बहन और भांजों को अंतिम विदाई दी। मायके वालों का कहना था कि अगर परिवार के लोग रात में ही उनकी अच्छी तरह से खोजबीन किए होते तो इतना बड़ा हादसा नहीं होता। विधि का विधान बताकर लोग एक-दूसरे को सांत्वना दे रहे थे।
विज्ञापन
डीएम के आदेश पर मां मालती देवी और रितेश और नितेश के शव का पोस्टमार्टम बुधवार की देर रात ही होना था। चिकित्सकों के नहीं पहुंचने पर गुरुवार को सुबह पोस्टमार्टम हुआ। पोस्टमार्टम के दोपहर साढ़े 11 बजे शव गांव पहुंचा। बेटी ऋतु का शव सदर अस्पताल में होने के कारण समय से पोस्टमार्टम नहीं हो सका। लिहाजा मां और रितेश के शव को एक चिता पर रखकर रखकर मुखाग्नि दी गई। नीतेश के शव को दफनाया गया। शाम को पोस्टमार्टम के बाद ऋतु के शव का अंतिम संस्कार हुआ। इस हृदयविदारक मंजर को देख लोगों की आंखें नम थीं। महिलाओं के करुण क्रंदन से पूरा वातावरण शोक में डूब गया था। पति सुग्रीव उसके बड़े भाई चंद्रजीत यादव उर्फ आल्हा, अशोक यादव व उनके पिता दूधनाथ यादव का रोते-रोते बुरा हाल था। सुग्रीव बार-बार चीखते हुए कह रहा था कि कल्पना भी नहीं थी, उसे यह दिन देखना पड़ेगा। अंतिम संस्कार के समय ग्राम प्रधान लाल मोहम्मद, राधा यादव, ब्लॉक प्रमुख व्यास यादव, जिला पंचायत सदस्य अशोक यादव, गुंजन सिंह, रामा यादव आदि मौजूद रहे। महिला के मायके से भाई द्वारिका यादव, प्रेमचंद यादव, संतोष यादव, संजय यादव सहित अन्य लोग पहुंचे थे। सभी ने नम आंखों से अपनी बहन और भांजों को अंतिम विदाई दी। मायके वालों का कहना था कि अगर परिवार के लोग रात में ही उनकी अच्छी तरह से खोजबीन किए होते तो इतना बड़ा हादसा नहीं होता। विधि का विधान बताकर लोग एक-दूसरे को सांत्वना दे रहे थे।
विज्ञापन