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तेज आवाज हुआ फिर आंखों के सामने छा गया अंधेरा
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बैरौना के पास हादसे में छह लोगो की मौत घायल रामबृक्ष यादव ।
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। न गाड़ी की रफ्तार तेज थी और न ही कोई नशे में था। सब लोग चुपचाप बैठे थे। अचानक से तेज आवाज के साथ गाड़ी रुकी और फिर जब आंख खुली तो अस्पताल में था। बाद में पता चला कि कार में सवार अन्य छह लोगों की मौत हो चुकी है। समझ नहीं आया कि आखिर यह कैसे हो गया। भगवान की कृपा ही रही जो मैं जिंदा बच गया। कुछ ऐसा ही कहना रहा हादसे में बचे रामवृक्ष यादव का।
जिला अस्पताल में भर्ती रामवृक्ष हादसे को याद कर सिहर उठते हैं। रुंधे गले और लड़खड़ाती जुबां ही हादसे की भयावहता बताने को काफी है। मदनपुर थानाक्षेत्र के खोखरवर गांव निवासी रामवृक्ष यादव 45 जेल चौकी के पास एक सरकारी बीयर की दुकान के सेल्समैन हैं। रामवृक्ष ने बताया कि गुरुवार की रात 10 बजे वह खाना खाकर अपने कमरे में आराम करने जा रहे थे। उसी दौरान ओमप्रकाश यादव आए और कहे कि एक जगह चलना है। मन तो नहीं था, लेकिन बात नहीं काट सके। हम सातों लोग एक ही कार में सवार होकर रामबली के घर बहोर गांव गए। रात साढ़े 11 बजे के बाद वहां से निकले। कार राकेश चला रहे थे। आगे की सीट पर ओमप्रकाश और संतोष बैठे थे। पीछे वाली सीट पर हम चार लोग बैठे थे। सबसे दाहिने तरफ मैं था। रात अधिक होने से सभी लोग चुप ही थे। मैं तो कार की बॉडी के सहारे आंख बंद कर बैठा था। मुझे अंदाजा है कि गाड़ी भी स्पीड बहुत अधिक नहीं थी। बैरौना के पास खड़े ट्रक में कार पीछे से घुस गई। इसके बाद क्या हुआ पता नहीं है, मैं बेहोश था। दो घंटे बाद होश आया तो मैं अपने को अस्पताल में भर्ती पाया। बाएं हाथ में पट्टी बंधी हुई थी। मुझे शुक्रवार की दोपहर मालूम हुआ कि साथ गए छह लोगों की मौत हो गई है। मैं कैसे बच गया, यही सोच रहा हूं। हो सकता है कि कोई पुण्य कार्य किए होंगे या परिवारवालों के भाग्य से बच गए। रामवृक्ष की पत्नी पार्वती और बड़ा बेटा राजन जिला अस्पताल में हैं। बेटी श्वेता और छोटा बेटा अनुज घर पर हैं।
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जिला अस्पताल में भर्ती रामवृक्ष हादसे को याद कर सिहर उठते हैं। रुंधे गले और लड़खड़ाती जुबां ही हादसे की भयावहता बताने को काफी है। मदनपुर थानाक्षेत्र के खोखरवर गांव निवासी रामवृक्ष यादव 45 जेल चौकी के पास एक सरकारी बीयर की दुकान के सेल्समैन हैं। रामवृक्ष ने बताया कि गुरुवार की रात 10 बजे वह खाना खाकर अपने कमरे में आराम करने जा रहे थे। उसी दौरान ओमप्रकाश यादव आए और कहे कि एक जगह चलना है। मन तो नहीं था, लेकिन बात नहीं काट सके। हम सातों लोग एक ही कार में सवार होकर रामबली के घर बहोर गांव गए। रात साढ़े 11 बजे के बाद वहां से निकले। कार राकेश चला रहे थे। आगे की सीट पर ओमप्रकाश और संतोष बैठे थे। पीछे वाली सीट पर हम चार लोग बैठे थे। सबसे दाहिने तरफ मैं था। रात अधिक होने से सभी लोग चुप ही थे। मैं तो कार की बॉडी के सहारे आंख बंद कर बैठा था। मुझे अंदाजा है कि गाड़ी भी स्पीड बहुत अधिक नहीं थी। बैरौना के पास खड़े ट्रक में कार पीछे से घुस गई। इसके बाद क्या हुआ पता नहीं है, मैं बेहोश था। दो घंटे बाद होश आया तो मैं अपने को अस्पताल में भर्ती पाया। बाएं हाथ में पट्टी बंधी हुई थी। मुझे शुक्रवार की दोपहर मालूम हुआ कि साथ गए छह लोगों की मौत हो गई है। मैं कैसे बच गया, यही सोच रहा हूं। हो सकता है कि कोई पुण्य कार्य किए होंगे या परिवारवालों के भाग्य से बच गए। रामवृक्ष की पत्नी पार्वती और बड़ा बेटा राजन जिला अस्पताल में हैं। बेटी श्वेता और छोटा बेटा अनुज घर पर हैं।
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