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Deoria News: सिरप के लिए हांफ रहे खांसी से पीड़ित मरीज
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सिरप के लिए हांफ रहे खांसी से पीड़ित मरीज
देवरिया। ठंड के मौसम में फेफड़ा और सांस के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। खांसी के कारण हफ्तों तक मरीज परेशान रह रहे हैं। इनके इलाज के लिए आने वाला सिरप जिला अस्पताल से लगायत सीएचसी व पीएचसी तक नहीं मिल रहा है। आपूर्ति कम होने के कारण सिरप का टोटा पड़ गया है। ऐसे में मरीजों को बाहर की दुकानों के चक्कर लगाने पड़ रहे, जिससे उन्हें हांफना पड़ जा रहा है।
इस मौसम में अगर किसी को खांसी आ रही तो जल्द उससे पीछा नहीं छूट रहा। कुछ मरीजों को तो दवा लेने के बाद एक हफ्ते बाद ही खांसी से राहत मिल रही है। वायरल इंफेक्शन से सांस की नली प्रभावित हो जा रही है। मरीजों में एक्यूट आनक्रोनिक ब्रोंकाइटिस की समस्या मिल रही है। इसके कारण सीने में जकड़न और सांस की नली में सूजन की भी शिकायत आ रही है।
मरीज मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल और सीएचसी व पीएचसी पहुंच रहे हैं। चिकित्सक इनको देखकर पर्ची पर खाने की गोली और सिरप भी लिख रहे हैं। सबसे गंभीर समस्या यह है कि आपूर्ति ठप होने के कारण मेडिकल कॉलेज से लगायत सीएचसी, पीएचसी से सिरप खत्म है। खांसी के लिए कफ सिरप (एम्ब्राक्सीन) की आपूर्ति ड्रग वेयर हाउस से की जाती है, लेकिन काफी दिनों से इसकी कमी है।
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मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल के चेस्ट विभाग हर रोज औसतन 80 मरीज खांसी से पीड़ित आ रहे हैं। वहीं, मेडिसिन वार्ड में भी करीब दस लोग इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। मरीज सुनैना देवी निवासी खोराराम, रामपुर कारखाना की वृजमती देवी, साकेत नगर निवासी गीता देवी और संदीप ने बताया कि छह दिन से खांसी आ रही है। सीने में जकड़न है। अस्पताल में सिरप न मिलने के कारण उसे बाहर से खरीदना पड़ा है।
अपने मन से न लें सिरप
डॉ. एचके मिश्रा ने बताया कि इस समय खांसी एवं जुकाम होने पर मरीज अपने मन से सिरप न लें। चिकित्सक को दिखाने के बाद ही दवा लेनी चाहिए। वायरल इंफेक्शन से जिन मरीजों की सांस की नली में सूजन और छाती में जकड़न है, उन्हें गर्म पानी और भोजन के सेवन के साथ भांप भी लेना चाहिए। इसके लिए दवा भी अलग से आती है। केवल सिरप से ठीक नहीं होता है।
धूम्रपान करने वालों को होती है ज्यादा परेशानी
चेस्ट विभाग के असिस्टेंट प्रो. डॉ. अनुराग शुक्ला व सीनियर रेजिडेंट डॉ. संदीप कुमार ने बताया कि ठंड व मौसम बदलने से अस्थमा, एलर्जी व अन्य लोगों को दिक्कत होती है। मुंह से सांस लेने से ठंडी हवा अंदर जाती है। ठंड के कारण सांस की नली सिकुड़ जाती है। वायरल इंफेक्शन भी होता है। धूम्रपान करने वालों को ज्यादा परेशानी होती है। ब्रोंकाइटिस के मरीजों को बलगम आता है। न निकलने पर जकड़न हो जाती है और इंफेक्शन बढ़ने से निमोनिया हो जाता है। वायरल के मरीजों की खांसी ठीक होने में पांच से दस दिन तथा ब्रोंकाइटिस के मरीजों को बीस से पचीस दिन लग जाता है।
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देवरिया। ठंड के मौसम में फेफड़ा और सांस के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। खांसी के कारण हफ्तों तक मरीज परेशान रह रहे हैं। इनके इलाज के लिए आने वाला सिरप जिला अस्पताल से लगायत सीएचसी व पीएचसी तक नहीं मिल रहा है। आपूर्ति कम होने के कारण सिरप का टोटा पड़ गया है। ऐसे में मरीजों को बाहर की दुकानों के चक्कर लगाने पड़ रहे, जिससे उन्हें हांफना पड़ जा रहा है।
इस मौसम में अगर किसी को खांसी आ रही तो जल्द उससे पीछा नहीं छूट रहा। कुछ मरीजों को तो दवा लेने के बाद एक हफ्ते बाद ही खांसी से राहत मिल रही है। वायरल इंफेक्शन से सांस की नली प्रभावित हो जा रही है। मरीजों में एक्यूट आनक्रोनिक ब्रोंकाइटिस की समस्या मिल रही है। इसके कारण सीने में जकड़न और सांस की नली में सूजन की भी शिकायत आ रही है।
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मरीज मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल और सीएचसी व पीएचसी पहुंच रहे हैं। चिकित्सक इनको देखकर पर्ची पर खाने की गोली और सिरप भी लिख रहे हैं। सबसे गंभीर समस्या यह है कि आपूर्ति ठप होने के कारण मेडिकल कॉलेज से लगायत सीएचसी, पीएचसी से सिरप खत्म है। खांसी के लिए कफ सिरप (एम्ब्राक्सीन) की आपूर्ति ड्रग वेयर हाउस से की जाती है, लेकिन काफी दिनों से इसकी कमी है।
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मेडिकल कॉलेज से संबद्ध जिला अस्पताल के चेस्ट विभाग हर रोज औसतन 80 मरीज खांसी से पीड़ित आ रहे हैं। वहीं, मेडिसिन वार्ड में भी करीब दस लोग इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। मरीज सुनैना देवी निवासी खोराराम, रामपुर कारखाना की वृजमती देवी, साकेत नगर निवासी गीता देवी और संदीप ने बताया कि छह दिन से खांसी आ रही है। सीने में जकड़न है। अस्पताल में सिरप न मिलने के कारण उसे बाहर से खरीदना पड़ा है।
अपने मन से न लें सिरप
डॉ. एचके मिश्रा ने बताया कि इस समय खांसी एवं जुकाम होने पर मरीज अपने मन से सिरप न लें। चिकित्सक को दिखाने के बाद ही दवा लेनी चाहिए। वायरल इंफेक्शन से जिन मरीजों की सांस की नली में सूजन और छाती में जकड़न है, उन्हें गर्म पानी और भोजन के सेवन के साथ भांप भी लेना चाहिए। इसके लिए दवा भी अलग से आती है। केवल सिरप से ठीक नहीं होता है।
धूम्रपान करने वालों को होती है ज्यादा परेशानी
चेस्ट विभाग के असिस्टेंट प्रो. डॉ. अनुराग शुक्ला व सीनियर रेजिडेंट डॉ. संदीप कुमार ने बताया कि ठंड व मौसम बदलने से अस्थमा, एलर्जी व अन्य लोगों को दिक्कत होती है। मुंह से सांस लेने से ठंडी हवा अंदर जाती है। ठंड के कारण सांस की नली सिकुड़ जाती है। वायरल इंफेक्शन भी होता है। धूम्रपान करने वालों को ज्यादा परेशानी होती है। ब्रोंकाइटिस के मरीजों को बलगम आता है। न निकलने पर जकड़न हो जाती है और इंफेक्शन बढ़ने से निमोनिया हो जाता है। वायरल के मरीजों की खांसी ठीक होने में पांच से दस दिन तथा ब्रोंकाइटिस के मरीजों को बीस से पचीस दिन लग जाता है।