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Deoria News: ठंड ने बढ़ाई अस्थमा रोगियों की परेशानी मेडिकल काॅलेज में बढ़ गए सांस के मरीज
Thu, 11 Dec 2025 11:50 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Thu, 11 Dec 2025 11:50 PM IST
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देवरिया। जैसे-जैसे ठंड ने अपनी पकड़ मजबूत की है, जिले में सांस और अस्थमा के रोगियों की परेशानी बढ़ गई है। महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में श्वास रोग विभाग की ओपीडी में मरीजों की संख्या में भारी वृद्धि दर्ज की गई है, जहां रोजाना औसतन 200 के करीब मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में आने वाले आधे से अधिक मरीज अस्थमा (दमा) और अन्य श्वास संबंधी रोगों से पीड़ित हैं। इसके अलावा, करीब 15 प्रतिशत मरीज गंभीर एलर्जी की शिकायत लेकर आ रहे हैं। जिनकी स्थिति ठंड और वायु गुणवत्ता में बदलाव के कारण बिगड़ गई है।
डॉक्टर इन मरीजों का परीक्षण कर दवाइयों के साथ एहतियात बरतने की सलाह दे रहे हैं।
बंद कमरे में ब्लोअर चलाने से बचें, धुआं जानलेवा : डॉक्टर ने बताया कि मरीज अपनी निर्धारित दवाइयों और इन्हेलर को नियमित रूप से लेने की आदत डालें। किसी भी स्थिति में इसको न छोड़ें। बंद कमरे में ब्लोअर (हीटर) का प्रयोग न करें।
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ऐसा करने से कमरे की हवा शुष्क हो जाती है और ऑक्सीजन का स्तर घट जाता है, जो सांस के रोगियों के लिए खतरा बन सकता है।
साथ ही किसी भी प्रकार का धुआं (लकड़ी का, सिगरेट का, या प्रदूषण का) अस्थमा के मरीजों की नसों में सिकुड़न पैदा करता है, इसलिए धुएं वाले वातावरण से तुरंत बचें।
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मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में आने वाले आधे से अधिक मरीज अस्थमा (दमा) और अन्य श्वास संबंधी रोगों से पीड़ित हैं। इसके अलावा, करीब 15 प्रतिशत मरीज गंभीर एलर्जी की शिकायत लेकर आ रहे हैं। जिनकी स्थिति ठंड और वायु गुणवत्ता में बदलाव के कारण बिगड़ गई है।
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डॉक्टर इन मरीजों का परीक्षण कर दवाइयों के साथ एहतियात बरतने की सलाह दे रहे हैं।
बंद कमरे में ब्लोअर चलाने से बचें, धुआं जानलेवा : डॉक्टर ने बताया कि मरीज अपनी निर्धारित दवाइयों और इन्हेलर को नियमित रूप से लेने की आदत डालें। किसी भी स्थिति में इसको न छोड़ें। बंद कमरे में ब्लोअर (हीटर) का प्रयोग न करें।
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ऐसा करने से कमरे की हवा शुष्क हो जाती है और ऑक्सीजन का स्तर घट जाता है, जो सांस के रोगियों के लिए खतरा बन सकता है।
साथ ही किसी भी प्रकार का धुआं (लकड़ी का, सिगरेट का, या प्रदूषण का) अस्थमा के मरीजों की नसों में सिकुड़न पैदा करता है, इसलिए धुएं वाले वातावरण से तुरंत बचें।