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सर्द हवाओं के बीच ट्रेन का इंतजार हुआ मुश्किल
देवरिया
Updated Tue, 06 Dec 2016 10:52 PM IST
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सदर रेलवे स्टेशन पर रात में ठंढ में लेटे यात्री।
- फोटो : अनूप तिवारी
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देवरिया। कोहरे ने ट्रेन की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। देवरिया रेलवे स्टेशन से होकर गुजरी वाली कमोवेश सभी ट्रेन इन दिनों विलंब से चल रही हैं। सर्द हवाओं के बीच प्लेटफॉर्म पर ट्रेन का इंतजार करना यात्रियों को भारी पड़ रहा है। सोमवार की रात ‘अमर उजाला’ की टीम ने रेलवे स्टेशन का दौरा किया।
ठंड की रात में ट्रेन का इंतजार करने में यात्रियों पर क्या गुजरती है, पेश है उन्हीं की जुबानी। रात 9.30 बजे रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के इंतजार में सैकड़ों यात्री मौजूद थे। गोरखपुर की ओर जाने वाली शहीद, बाघ, पाटलीपुत्र, जनसेवा और आम्रपाली एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से घंटों विलंब थीं। कुछ ऐसा ही हाल बिहार की ओर जाने वाली ट्रेनों का था। प्लेटफॉर्म के बाहर टिकट खिड़की के ईद-गिर्द करीब 100 की संख्या में लोग कंबल ओढ़कर लेट थे। यात्री प्रतीक्षालय का भी यही हाल था। पार्सल घर की तरफ से निकलने वाले रास्ते पर कुछ लोग सोते दिखे।
एक परिवार के साथ तीन मासूम बच्चे भी थे। माता-पिता गहरी निंद्रा में सो रहे थे लेकिन बच्चों के बदन से कंबल हट गए थे। ठंड में जब सोने लगे तो पिता की नींद खुली। उसने बच्चों को ढंका, फिर खुद सो गया। देवरिया रेलवे स्टेशन पर तीन प्लेटफॉर्म है। कुशीनगर के खड्डा से बिहार ट्रेन पकड़ने आए सुरेश ने बताया कि वह स्टेशन पर शाम सात बजे आया था।
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ट्रेन रात मेें साढ़े दस बजे है। इतनी जल्दी आने की वजह पूछने पर बताया कि खड्डा काफी दूर है। यदि देर से चलते तो बस नहीं मिलती। बस मिल भी जाती तो ट्रेन छूट जाती। पैंट, शर्ट और जैकेट पहने सुरेश के पास कंबल भी नहीं था। वह सीढ़ी को ओट बनाकर बैठे थे ताकि हवा से बच सके।
रामपुर कारखाना से आईं रेखा ने बताया कि उन्हें शहीद एक्सप्रेस से जाना है। ट्रेन छह घंटे लेट है। उन्होंने कहा कि साथ में बच्चे हैं। ठंड में बच्चों को स्टेशन पर बचना मुश्किल है लेकिन क्या करें मजबूरी है, जाना तो है ही। बनकटा के मोहन वर्मा ने बताया कि स्टेशन वाले ट्रेन लेट होने की सही जानकारी नहीं देते। सूचना पट्टा पर पहले लिखते हैं कि ट्रेन एक घंटे लेट है, जब एक घंटा पूरा हो जाता है तो फिर लिख देते हैं अब दो घंटे बाद ट्रेन आएगी। ऐसे-ऐसे कर ट्रेन लेट होने का समय बढ़ाते जाते हैैं। लिहाजा कहीं जा भी नहीं सकते हैं।
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ठंड की रात में ट्रेन का इंतजार करने में यात्रियों पर क्या गुजरती है, पेश है उन्हीं की जुबानी। रात 9.30 बजे रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के इंतजार में सैकड़ों यात्री मौजूद थे। गोरखपुर की ओर जाने वाली शहीद, बाघ, पाटलीपुत्र, जनसेवा और आम्रपाली एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से घंटों विलंब थीं। कुछ ऐसा ही हाल बिहार की ओर जाने वाली ट्रेनों का था। प्लेटफॉर्म के बाहर टिकट खिड़की के ईद-गिर्द करीब 100 की संख्या में लोग कंबल ओढ़कर लेट थे। यात्री प्रतीक्षालय का भी यही हाल था। पार्सल घर की तरफ से निकलने वाले रास्ते पर कुछ लोग सोते दिखे।
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एक परिवार के साथ तीन मासूम बच्चे भी थे। माता-पिता गहरी निंद्रा में सो रहे थे लेकिन बच्चों के बदन से कंबल हट गए थे। ठंड में जब सोने लगे तो पिता की नींद खुली। उसने बच्चों को ढंका, फिर खुद सो गया। देवरिया रेलवे स्टेशन पर तीन प्लेटफॉर्म है। कुशीनगर के खड्डा से बिहार ट्रेन पकड़ने आए सुरेश ने बताया कि वह स्टेशन पर शाम सात बजे आया था।
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ट्रेन रात मेें साढ़े दस बजे है। इतनी जल्दी आने की वजह पूछने पर बताया कि खड्डा काफी दूर है। यदि देर से चलते तो बस नहीं मिलती। बस मिल भी जाती तो ट्रेन छूट जाती। पैंट, शर्ट और जैकेट पहने सुरेश के पास कंबल भी नहीं था। वह सीढ़ी को ओट बनाकर बैठे थे ताकि हवा से बच सके।
रामपुर कारखाना से आईं रेखा ने बताया कि उन्हें शहीद एक्सप्रेस से जाना है। ट्रेन छह घंटे लेट है। उन्होंने कहा कि साथ में बच्चे हैं। ठंड में बच्चों को स्टेशन पर बचना मुश्किल है लेकिन क्या करें मजबूरी है, जाना तो है ही। बनकटा के मोहन वर्मा ने बताया कि स्टेशन वाले ट्रेन लेट होने की सही जानकारी नहीं देते। सूचना पट्टा पर पहले लिखते हैं कि ट्रेन एक घंटे लेट है, जब एक घंटा पूरा हो जाता है तो फिर लिख देते हैं अब दो घंटे बाद ट्रेन आएगी। ऐसे-ऐसे कर ट्रेन लेट होने का समय बढ़ाते जाते हैैं। लिहाजा कहीं जा भी नहीं सकते हैं।