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हरितालिका तीज व्रत रखकर सुहागिनों ने मांगा अखंड सौभाग्य
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दुग्धेश्वरनाथ मंदिर में पूजा करतीं महिलाएं।
- फोटो : DEORIA
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हरितालिका तीज : अखंड सौभाग्य के लिए सुहागिनों ने की कामना
धार्मिक श्रद्धा और विश्वास के साथ शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना कर किया पुण्य दान
व्रत उपवास करनेवाली महिलाएं आज शुभ मुहूर्त में करेंगी पारण
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। जनपद में हरितालिका तीज का त्योहार पारंपरिक रीति रिवाज व धार्मिक श्रद्धा के साथ शुक्रवार को मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने व्रत रखकर शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना की। कुमकुम, सिंदूर, हल्दी, चंदन, चूड़ी, पुष्प, रीबन, पैर के लिए महावर, वस्त्र, आभूषण, फल आदि चढ़ाकर गौरी से सदैव सुहागिन बने रहने की कामना की। पूजन के बाद उन्होंने दान-पुण्य भी किया। कई जगहों पर कोरोना संक्रमण के चलते व्रतधारियों ने समूह में पूजन करने से परहेज किया।
तीज व्रत के दिन सुहागिन महिलाओं में धार्मिक उत्साह बना रहा। सुहागिनों ने हाथों में मेंहदी रचाई तथा भोर में ही कई महिलाएं स्नान-ध्यान कर पूजा- अर्चना की तैयारी में जुटी रहीं। पूरे साज श्रृंगार के साथ शिवालयों में पहुंचकर मां पार्वती की पूजा की। जिन महिलाओं ने व्रत रखा था, उन्होंने अपराह्न से पूजा -अर्चना शुरू की। पहले गौरी का श्रृंगार कर उन्हें विविध प्रसाद सामग्रियों का भोग लगाया। मां -पार्वती को चढ़ाई चीजों में से सिंदूर का प्रसाद ग्रहण किया। शिवालयों में सोशल डिस्टेंसिंग के बीच व्रतधारियों ने पूजा- अर्चना की और व्रत के महात्म्य से संबंधित कथा भी सुनी। हालांकि कोरोना महामारी को देखते हुए अधिकतर महिलाओं ने घर में ही रहकर पूजन पाठ करना ज्यादा उचित समझा। ज्योतिषाचार्य विवेक उपाध्याय व पं.शरद चंद्र मिश्र ने बताया कि हरितालिका तीज का सीधा संबंध मां पार्वती की विशेष आराधना से है। तीज का व्रत रहने वाली महिलाएं शनिवार सुबह शुभ मुहूर्त में पारण करेंगी।
सुहाग कीसुख-समृद्धि के लिए महिलाओं ने किया निर्जला व्रत
सलेमपुर में अखंड सौभाग्य की कामना को लेकर सुहागिन महिलाओं ने बृहस्पतिवार को निर्जला व्रत रखा। इस दौरान महिलाओं ने प्रात: उठकर स्नान-ध्यान किया और पति की दीर्घायु व सुख समृद्धि के लिए 24 घंटे निर्जला उपवास रखा। शाम को स्नान करने के बाद नए वस्त्र धारण किया और केले का मंडप बनाकर भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना की। हरितालिका तीज के अवसर पर व्रती महिलाओं ने नदी, सरोवर, तालाब आदि में स्नान किया। नए वस्त्र धारण कर हाथ में मेहंदी, पैर में महावर समेत सोलहों श्रृंगार किया। इसके बाद नगर के मुरली मनोहर मंदिर व बंजरिया मंदिर में तीज व्रती महिलाओं ने पूजन अर्चन किया। वहीं ग्रामीण इलाकों में नजदीक के शिवालयों और घरों में केले का मंडप बनाकर भगवान शिव और मां पार्वती का चित्र स्थापित किया। सामर्थ्य के अनुसार फल-फूल, मिष्ठान, गंगाजल आदि चढ़ाया और पुरोहित से हरितालिका व्रत की कथा श्रवण की। कथा सुनने के बाद पुरोहित से आशीर्वाद ग्रहण कर दान-पुण्य किया।
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धार्मिक श्रद्धा और विश्वास के साथ शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना कर किया पुण्य दान
व्रत उपवास करनेवाली महिलाएं आज शुभ मुहूर्त में करेंगी पारण
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। जनपद में हरितालिका तीज का त्योहार पारंपरिक रीति रिवाज व धार्मिक श्रद्धा के साथ शुक्रवार को मनाया गया। सुहागिन महिलाओं ने व्रत रखकर शिव-पार्वती की पूजा-अर्चना की। कुमकुम, सिंदूर, हल्दी, चंदन, चूड़ी, पुष्प, रीबन, पैर के लिए महावर, वस्त्र, आभूषण, फल आदि चढ़ाकर गौरी से सदैव सुहागिन बने रहने की कामना की। पूजन के बाद उन्होंने दान-पुण्य भी किया। कई जगहों पर कोरोना संक्रमण के चलते व्रतधारियों ने समूह में पूजन करने से परहेज किया।
तीज व्रत के दिन सुहागिन महिलाओं में धार्मिक उत्साह बना रहा। सुहागिनों ने हाथों में मेंहदी रचाई तथा भोर में ही कई महिलाएं स्नान-ध्यान कर पूजा- अर्चना की तैयारी में जुटी रहीं। पूरे साज श्रृंगार के साथ शिवालयों में पहुंचकर मां पार्वती की पूजा की। जिन महिलाओं ने व्रत रखा था, उन्होंने अपराह्न से पूजा -अर्चना शुरू की। पहले गौरी का श्रृंगार कर उन्हें विविध प्रसाद सामग्रियों का भोग लगाया। मां -पार्वती को चढ़ाई चीजों में से सिंदूर का प्रसाद ग्रहण किया। शिवालयों में सोशल डिस्टेंसिंग के बीच व्रतधारियों ने पूजा- अर्चना की और व्रत के महात्म्य से संबंधित कथा भी सुनी। हालांकि कोरोना महामारी को देखते हुए अधिकतर महिलाओं ने घर में ही रहकर पूजन पाठ करना ज्यादा उचित समझा। ज्योतिषाचार्य विवेक उपाध्याय व पं.शरद चंद्र मिश्र ने बताया कि हरितालिका तीज का सीधा संबंध मां पार्वती की विशेष आराधना से है। तीज का व्रत रहने वाली महिलाएं शनिवार सुबह शुभ मुहूर्त में पारण करेंगी।
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सुहाग कीसुख-समृद्धि के लिए महिलाओं ने किया निर्जला व्रत
सलेमपुर में अखंड सौभाग्य की कामना को लेकर सुहागिन महिलाओं ने बृहस्पतिवार को निर्जला व्रत रखा। इस दौरान महिलाओं ने प्रात: उठकर स्नान-ध्यान किया और पति की दीर्घायु व सुख समृद्धि के लिए 24 घंटे निर्जला उपवास रखा। शाम को स्नान करने के बाद नए वस्त्र धारण किया और केले का मंडप बनाकर भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना की। हरितालिका तीज के अवसर पर व्रती महिलाओं ने नदी, सरोवर, तालाब आदि में स्नान किया। नए वस्त्र धारण कर हाथ में मेहंदी, पैर में महावर समेत सोलहों श्रृंगार किया। इसके बाद नगर के मुरली मनोहर मंदिर व बंजरिया मंदिर में तीज व्रती महिलाओं ने पूजन अर्चन किया। वहीं ग्रामीण इलाकों में नजदीक के शिवालयों और घरों में केले का मंडप बनाकर भगवान शिव और मां पार्वती का चित्र स्थापित किया। सामर्थ्य के अनुसार फल-फूल, मिष्ठान, गंगाजल आदि चढ़ाया और पुरोहित से हरितालिका व्रत की कथा श्रवण की। कथा सुनने के बाद पुरोहित से आशीर्वाद ग्रहण कर दान-पुण्य किया।
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