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जन्म मृत्यु से परे हैं भोलेनाथ: गोपालजी
Fri, 04 Aug 2023 11:43 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Fri, 04 Aug 2023 11:43 PM IST
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सलेमपुर। लार ब्लॉक के सजांव में चल रही सात दिवसीय शिव महापुराण की कथा के दूसरे दिन बृहस्पतिवार की रात कथावाचक गोपाल जी ने शिव अवतरण की कथा सुनाई। कहा कि शिव तो स्वयंभू हैं, इनकी उत्पत्ति स्वयं हुई है। भोलेनाथ जन्म मृत्यु से परे हैं।
कथा वाचक ने कहा कि ब्रह्मा को एक बार बेटे की जरूरत पड़ी, तब उन्होंने तपस्या की। तभी अचानक उनकी गोद में रोते हुए बालक शिव प्रगट हुए। ब्रह्मा ने रोने का कारण पुछा तो बच्चे ने जवाब दिया मैं ब्रह्म नहीं, इसलिए रो रहा हूं। तब उन्होंने रोते हुए बालक का नाम शिव (रूद्र) रखा। शिव के ब्रह्म पुत्र के रूप में जन्म लेने की कथा विष्णु पुराण की पौराणिक कथाओं से प्रमाणित है। एक समय ब्रह्मा, विष्णु दोनों देव सृष्टि की रचना के बारे में बातें कर रहे थे। तब उसी समय शिव प्रगट हुए। ब्रह्मा ने उन्हें पहचानने से इनकार कर दिया। तब शिव के रूठ जाने के भय से विष्णु ने ब्रह्मा को शिव की याद दिलाई। ब्रह्मा को अपनी गलती का अहसास होता है। शिव से क्षमा मांगते हुए उनसे अपने पुत्र के रूप में पैदा होने का आशीर्वाद मांगा। शिव ने ब्रह्म की प्रार्थना स्वीकार करते हुए उन्हें आशीर्वाद दिया। कथा के अंत में यजमान कालिका देवी व राजेश दुबे आरती कर प्रसाद वितरण किया।
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कथा वाचक ने कहा कि ब्रह्मा को एक बार बेटे की जरूरत पड़ी, तब उन्होंने तपस्या की। तभी अचानक उनकी गोद में रोते हुए बालक शिव प्रगट हुए। ब्रह्मा ने रोने का कारण पुछा तो बच्चे ने जवाब दिया मैं ब्रह्म नहीं, इसलिए रो रहा हूं। तब उन्होंने रोते हुए बालक का नाम शिव (रूद्र) रखा। शिव के ब्रह्म पुत्र के रूप में जन्म लेने की कथा विष्णु पुराण की पौराणिक कथाओं से प्रमाणित है। एक समय ब्रह्मा, विष्णु दोनों देव सृष्टि की रचना के बारे में बातें कर रहे थे। तब उसी समय शिव प्रगट हुए। ब्रह्मा ने उन्हें पहचानने से इनकार कर दिया। तब शिव के रूठ जाने के भय से विष्णु ने ब्रह्मा को शिव की याद दिलाई। ब्रह्मा को अपनी गलती का अहसास होता है। शिव से क्षमा मांगते हुए उनसे अपने पुत्र के रूप में पैदा होने का आशीर्वाद मांगा। शिव ने ब्रह्म की प्रार्थना स्वीकार करते हुए उन्हें आशीर्वाद दिया। कथा के अंत में यजमान कालिका देवी व राजेश दुबे आरती कर प्रसाद वितरण किया।
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