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दुर्दशा के शिकार हैं नगर क्षेत्र के परिषदीय विद्यालय
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दुर्दशा के शिकार हैं नगर क्षेत्र के परिषदीय विद्यालय
- नहीं हो रहा सुधार, कुल 28 शिक्षकों में तीन 31 मार्च को हो जाएंगे सेवानिवृत्त
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। गौरा बरहज एवं देवरिया नगर क्षेत्र के परिषदीय विद्यालय संसाधनों के अभाव में दुर्दशा झेल रहे हैं। कुल 28 अध्यापकों, 32 शिक्षामित्र एवं नौ अनुदेशकों के भरोसे यह विद्यालय चल रहा है। जबकि इनमें करीब चार हजार से अधिक यहां नामांकित छात्र हैं। शासन एवं प्रशासन की ओर से ध्यान नहीं दिए जाने से यहां शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। खास बात तो यह है कि इनकी दशा सुधारने के लिए जिम्मेदारों की ओर से भी कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है।
नगर क्षेत्र के प्राथमिक व जूनियर विद्यालयों की दशा और दिशा को सुधारने के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। प्राइवेट विद्यालयों से नजदीक होने एवं नगर क्षेत्र में स्थित होने से यहां छात्रों का नामांकन बढ़ाना चुनौती के समान है। देवरिया नगर क्षेत्र में वर्तमान में कुल 21 विद्यालय हैं। 23 शिक्षक 32 शिक्षामित्र, अनुदेशक नौ के जिम्मे ही इनके संचालन की जिम्मेदारी है। वहीं गौरा बरहज क्षेत्र में पांच विद्यालय, पांच शिक्षक, 15 शिक्षामित्र एवं पांच अनुदेशकों की तैनाती है। 31 मार्च को नगर क्षेत्रों के तीन शिक्षक सेवानिवृत्त जाएंगे। वर्ष 1993 के बाद से ही यहां अध्यापकों की तैनाती बंद है। अध्यापकों की कमी के चलते यहां एक ही शिक्षक या शिक्षामित्र व अनुदेशक के भरोसे पठन-पाठन चलने से शहरी क्षेत्र के अधिकांश अभिभावक भी यहां की गुणवत्ता देखकर अपने पाल्यों का नामांकन कराने में रुचि नहीं रखते हैं। नगर क्षेत्र के खंड शिक्षाधिकारी ज्ञानचंद मिश्रा ने बताया कि अधिकांश विद्यालयों में प्रशिक्षु शिक्षकों को बुलाकर पठन-पाठन पूरा कराया जा रहा है। वर्ष 2011 के बाद कोई नया अध्यापक नहीं आया है। इसके पहले ग्रामीण क्षेत्रों के कुछ अध्यापकों को नगर क्षेत्र में रखा गया था। उच्चाधिकारियों को समस्या से कई बार अगवत कराया गया है। उधर, बीएसए संतोष कुमार राय ने बताया कि नगर क्षेत्र के विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती के लिए शासन को पत्र लिखा गया है।
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- नहीं हो रहा सुधार, कुल 28 शिक्षकों में तीन 31 मार्च को हो जाएंगे सेवानिवृत्त
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। गौरा बरहज एवं देवरिया नगर क्षेत्र के परिषदीय विद्यालय संसाधनों के अभाव में दुर्दशा झेल रहे हैं। कुल 28 अध्यापकों, 32 शिक्षामित्र एवं नौ अनुदेशकों के भरोसे यह विद्यालय चल रहा है। जबकि इनमें करीब चार हजार से अधिक यहां नामांकित छात्र हैं। शासन एवं प्रशासन की ओर से ध्यान नहीं दिए जाने से यहां शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। खास बात तो यह है कि इनकी दशा सुधारने के लिए जिम्मेदारों की ओर से भी कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है।
नगर क्षेत्र के प्राथमिक व जूनियर विद्यालयों की दशा और दिशा को सुधारने के लिए कोई प्रयास नहीं किया जा रहा है। प्राइवेट विद्यालयों से नजदीक होने एवं नगर क्षेत्र में स्थित होने से यहां छात्रों का नामांकन बढ़ाना चुनौती के समान है। देवरिया नगर क्षेत्र में वर्तमान में कुल 21 विद्यालय हैं। 23 शिक्षक 32 शिक्षामित्र, अनुदेशक नौ के जिम्मे ही इनके संचालन की जिम्मेदारी है। वहीं गौरा बरहज क्षेत्र में पांच विद्यालय, पांच शिक्षक, 15 शिक्षामित्र एवं पांच अनुदेशकों की तैनाती है। 31 मार्च को नगर क्षेत्रों के तीन शिक्षक सेवानिवृत्त जाएंगे। वर्ष 1993 के बाद से ही यहां अध्यापकों की तैनाती बंद है। अध्यापकों की कमी के चलते यहां एक ही शिक्षक या शिक्षामित्र व अनुदेशक के भरोसे पठन-पाठन चलने से शहरी क्षेत्र के अधिकांश अभिभावक भी यहां की गुणवत्ता देखकर अपने पाल्यों का नामांकन कराने में रुचि नहीं रखते हैं। नगर क्षेत्र के खंड शिक्षाधिकारी ज्ञानचंद मिश्रा ने बताया कि अधिकांश विद्यालयों में प्रशिक्षु शिक्षकों को बुलाकर पठन-पाठन पूरा कराया जा रहा है। वर्ष 2011 के बाद कोई नया अध्यापक नहीं आया है। इसके पहले ग्रामीण क्षेत्रों के कुछ अध्यापकों को नगर क्षेत्र में रखा गया था। उच्चाधिकारियों को समस्या से कई बार अगवत कराया गया है। उधर, बीएसए संतोष कुमार राय ने बताया कि नगर क्षेत्र के विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती के लिए शासन को पत्र लिखा गया है।
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