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आयुष्मान : अभी हर तीसरा पात्र कार्ड से दूर, पंजीकरण के लिए भी इंतजार
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देवरिया। पांच लाख रुपये तक मुफ्त इलाज की सुविधा देने वाली आयुष्मान योजना का सुरक्षा कवच जिले के सभी पात्र लाभार्थियों तक अब तक नहीं पहुंच सका है। जिले में 14,03,587 पात्र लाभार्थियों में से 8,81,404 ने ही आयुष्मान कार्ड के लिए आवेदन कराया है।
5,22,183 पात्र अभी कार्ड की प्रक्रिया से बाहर हैं। यानी कुल पात्र लाभार्थियों में 37.21 प्रतिशत ने अब तक कार्ड के लिए आवेदन नहीं कराया है। ऐसे में अभी भी हर तीसरा पात्र आयुष्मान कार्ड से दूर है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक पात्र लाभार्थियों के मुकाबले कार्ड के लिए आवेदन की उपलब्धि 62.79 प्रतिशत है।
कार्ड बनाने की प्रक्रिया में आधार उपलब्ध न होना, सूची में दर्ज पते पर लाभार्थी का नहीं मिलना और दस्तावेजों के सत्यापन जैसी दिक्कतें सामने आ रही हैं। कार्ड बनने के बाद अस्पताल पहुंचने पर पंजीकरण और सत्यापन में लगने वाला समय भी कई लाभार्थियों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है।
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व्यक्तिगत लाभार्थियों के मुकाबले परिवार स्तर पर योजना की तस्वीर बेहतर है। जिले में 2,98,591 पात्र परिवार हैं। इनमें 2,67,433 परिवारों के कम से कम एक सदस्य का आयुष्मान कार्ड बन चुका है। यह 89.56 प्रतिशत है।
वहीं 31,158 पात्र परिवार ऐसे हैं, जिनमें एक भी सदस्य का आयुष्मान कार्ड नहीं बना है। इससे परिवार और व्यक्तिगत स्तर पर योजना की पहुंच में बड़ा अंतर सामने आता है।
करीब 90 प्रतिशत पात्र परिवारों में कम से कम एक सदस्य का कार्ड बनने के बावजूद कुल पात्र लाभार्थियों में 37.21 प्रतिशत अभी कार्ड की प्रक्रिया से बाहर हैं। आधार और पता बना बड़ी बाधा : कार्ड बनाने में आधार कार्ड का उपलब्ध न होना भी बड़ी समस्या है। अगस्त में जनता दर्शन में पहुंचे सेहुड़ा निवासी 80 वर्षीय प्रभुनाथ यादव ने आयुष्मान कार्ड नहीं बनने की शिकायत जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी के सामने रखी थी।
स्वास्थ्य विभाग से जानकारी लेने पर आवश्यक आधार कार्ड उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई। इसके बाद जिलाधिकारी ने संबंधित ब्लॉक के अधिकारियों से समन्वय कर प्राथमिकता के आधार पर कार्ड बनवाने का निर्देश दिया था। दिसंबर 2025 में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान करीब सवा लाख लाभार्थी सूची में दर्ज पते पर नहीं मिले थे।
उस समय जिले में करीब साढ़े तीन लाख कार्ड बनने बाकी बताए गए थे।
पुराने या गलत पते और लाभार्थियों के स्थान बदलने से सूची के सत्यापन और कार्ड बनाने में विभाग को परेशानी हुई।
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5,22,183 पात्र अभी कार्ड की प्रक्रिया से बाहर हैं। यानी कुल पात्र लाभार्थियों में 37.21 प्रतिशत ने अब तक कार्ड के लिए आवेदन नहीं कराया है। ऐसे में अभी भी हर तीसरा पात्र आयुष्मान कार्ड से दूर है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक पात्र लाभार्थियों के मुकाबले कार्ड के लिए आवेदन की उपलब्धि 62.79 प्रतिशत है।
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कार्ड बनाने की प्रक्रिया में आधार उपलब्ध न होना, सूची में दर्ज पते पर लाभार्थी का नहीं मिलना और दस्तावेजों के सत्यापन जैसी दिक्कतें सामने आ रही हैं। कार्ड बनने के बाद अस्पताल पहुंचने पर पंजीकरण और सत्यापन में लगने वाला समय भी कई लाभार्थियों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है।
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व्यक्तिगत लाभार्थियों के मुकाबले परिवार स्तर पर योजना की तस्वीर बेहतर है। जिले में 2,98,591 पात्र परिवार हैं। इनमें 2,67,433 परिवारों के कम से कम एक सदस्य का आयुष्मान कार्ड बन चुका है। यह 89.56 प्रतिशत है।
वहीं 31,158 पात्र परिवार ऐसे हैं, जिनमें एक भी सदस्य का आयुष्मान कार्ड नहीं बना है। इससे परिवार और व्यक्तिगत स्तर पर योजना की पहुंच में बड़ा अंतर सामने आता है।
करीब 90 प्रतिशत पात्र परिवारों में कम से कम एक सदस्य का कार्ड बनने के बावजूद कुल पात्र लाभार्थियों में 37.21 प्रतिशत अभी कार्ड की प्रक्रिया से बाहर हैं। आधार और पता बना बड़ी बाधा : कार्ड बनाने में आधार कार्ड का उपलब्ध न होना भी बड़ी समस्या है। अगस्त में जनता दर्शन में पहुंचे सेहुड़ा निवासी 80 वर्षीय प्रभुनाथ यादव ने आयुष्मान कार्ड नहीं बनने की शिकायत जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी के सामने रखी थी।
स्वास्थ्य विभाग से जानकारी लेने पर आवश्यक आधार कार्ड उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई। इसके बाद जिलाधिकारी ने संबंधित ब्लॉक के अधिकारियों से समन्वय कर प्राथमिकता के आधार पर कार्ड बनवाने का निर्देश दिया था। दिसंबर 2025 में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान करीब सवा लाख लाभार्थी सूची में दर्ज पते पर नहीं मिले थे।
उस समय जिले में करीब साढ़े तीन लाख कार्ड बनने बाकी बताए गए थे।
पुराने या गलत पते और लाभार्थियों के स्थान बदलने से सूची के सत्यापन और कार्ड बनाने में विभाग को परेशानी हुई।