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आशा वर्करों का धरना
अमर उजाला ब्यूरो/देवरिया
Updated Sat, 30 Jan 2016 11:45 PM IST
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आशा कार्यकताओं ने शनिवार को अस्पताल और तहसील का घेराव कर मृत आशा बहन के परिवार वालों को मुआवजा दिलाने की मांग की।
अस्पताल गेट पर तीन घंटे तक धरना देने के बाद उन्होंने तहसील पर प्रदर्शन कर डिप्टी सीएमओ डॉ एके चौधरी को ज्ञापन सौपा।
आशा बहने अपने साथी की मौत के बाद मुआवजे को लेकर आंदोलित है। उन्होंने सीएमओ के खिलाफ नारेबाजी की।
आशा कार्यकर्ताओं ने दुर्घटना में आशा चंद्रवाती की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया।
रुद्रप़ुर आशा संघ की नेता बिंदा सिंह ने कहा कि खोपा की आशा कार्यकर्ता चंद्रवाती की दुर्घटना में मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग बेपरवाह बना रहा।
आशा बहनों की वजह से स्वास्थ्य विभाग का हर कार्यक्रम सफल होता है। जिस दिन चंद्रवती की मौत हुई वह पोषण मिशन के तहत काम पर गई थी।
दिन-रात विभाग की सेवा में लगी आशा पर कोई आपदा विपदा आने पर विभाग किनारा कस ले रहा है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जब सीएमओ से बात की गई तो उनका व्यवहार अमानवीय था।
उन्होंने मृत आशा को स्वास्थ्य विभाग का मानने से इंकार कर दिया। आशा कार्यकर्ताओं ने दुर्घटना में मरी आशा के परिवार को न्याय नहीं मिलने तक आंदोलन जारी रखने को कहा।
उन्होंने कहा कि मृत आशा के परिवार को 25 लाख की आर्थिक सहायता नहीं मिला तो सभी आशा कार्य बहिष्कार कर सीएमओ कार्यालय का घेराव करेंगी।
आशा कार्यकर्ताओं ने डिप्टी सीएमओ को ज्ञापन सौंपकर दुर्घटना में मृत्यु होने पर आशा के परिवार को 10 लाख आर्थिक सहायता देने, गंभीर बीमारी में नि.शुल्क इलाज की सुविधा देने, आशा कार्यकर्ता का सामूहिक बीमा कराने तथा उन्हें प्रतिमाह पांच हजार रुपये मानदेय निर्धारित करने की मांग की।
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धरना प्रदर्शन के दौरान सरोज देवी, मालती, शीला,सुमन, माया, फुलमती, बिमला सहित सैकड़ों आशा कार्यकर्ता मौजूद रहीं।
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अस्पताल गेट पर तीन घंटे तक धरना देने के बाद उन्होंने तहसील पर प्रदर्शन कर डिप्टी सीएमओ डॉ एके चौधरी को ज्ञापन सौपा।
आशा बहने अपने साथी की मौत के बाद मुआवजे को लेकर आंदोलित है। उन्होंने सीएमओ के खिलाफ नारेबाजी की।
आशा कार्यकर्ताओं ने दुर्घटना में आशा चंद्रवाती की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया।
रुद्रप़ुर आशा संघ की नेता बिंदा सिंह ने कहा कि खोपा की आशा कार्यकर्ता चंद्रवाती की दुर्घटना में मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग बेपरवाह बना रहा।
आशा बहनों की वजह से स्वास्थ्य विभाग का हर कार्यक्रम सफल होता है। जिस दिन चंद्रवती की मौत हुई वह पोषण मिशन के तहत काम पर गई थी।
दिन-रात विभाग की सेवा में लगी आशा पर कोई आपदा विपदा आने पर विभाग किनारा कस ले रहा है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में जब सीएमओ से बात की गई तो उनका व्यवहार अमानवीय था।
उन्होंने मृत आशा को स्वास्थ्य विभाग का मानने से इंकार कर दिया। आशा कार्यकर्ताओं ने दुर्घटना में मरी आशा के परिवार को न्याय नहीं मिलने तक आंदोलन जारी रखने को कहा।
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उन्होंने कहा कि मृत आशा के परिवार को 25 लाख की आर्थिक सहायता नहीं मिला तो सभी आशा कार्य बहिष्कार कर सीएमओ कार्यालय का घेराव करेंगी।
आशा कार्यकर्ताओं ने डिप्टी सीएमओ को ज्ञापन सौंपकर दुर्घटना में मृत्यु होने पर आशा के परिवार को 10 लाख आर्थिक सहायता देने, गंभीर बीमारी में नि.शुल्क इलाज की सुविधा देने, आशा कार्यकर्ता का सामूहिक बीमा कराने तथा उन्हें प्रतिमाह पांच हजार रुपये मानदेय निर्धारित करने की मांग की।
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धरना प्रदर्शन के दौरान सरोज देवी, मालती, शीला,सुमन, माया, फुलमती, बिमला सहित सैकड़ों आशा कार्यकर्ता मौजूद रहीं।