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आईपीएस बन माता-पिता के सपनों को साकार करेंगी अंशु
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आईपीएस बन माता-पिता के सपनों को साकार करेंगी अंशु
भटनी(देवरिया)। कोड़रा डाबर गांव निवासी अंशु यादव ने प्रदेश के टॉप टेन मेधावियों की सूची में जगह बनाई है। उसकी सफलता से परिवार, गांव व विद्यालय में खुशी का माहौल है। लेकिन, अंशु को इससे संतुष्टि नहीं मिली है। वह सिविल परीक्षा पास कर आईपीएस बन माता पिता के सपनों को साकार करना चाहती है। उसने अपने सफलता का श्रेय गुरु, माता-पिता, भाई और दोनों बहनों को दिया है। उसने बताया कि बिना कोचिंग के घर पर पढ़ाई मुश्किल भरी रही, लेकिन एक्सपर्ट भाई और बहनों ने कठिन समय में भरपूर सहयोग किया।
बता दें कि अंशु की बड़ी बहन शिवानी यादव, सीमा यादव भी पढ़ने में बहुत होशियार है। भाई हरिओम यादव गोरखपुर विश्वविद्यालय में बीएससी का छात्र है। दिनेश यादव किसान है उनकी आर्थिक हालत ऐसी नहीं है कि वे बच्चों को बड़े स्कूलों में दाखिला दिला पाए, लेकिन उन्होंने अच्छे संस्कार और अनुशासन के साथ बच्चों की परवरिश करते हुए शिक्षा दिलाया। उन्होंने बताया कि कोरोना काल में पढ़ाई के चलते पहली बार परिवार में स्मार्ट फोन लिया गया। बच्चे जरूरत पड़ने पर ही इस्तेमाल करते हैं। वहीं जिले में आठवें स्थान पर रही बंधुनाथ इंटरमीडिएट कॉलेज की पलक पांडेय बड़ा होकर डॉक्टर बनना चाहती हैं। उन्होंने सफलता का श्रेय पिता रत्नेश पांडेय, माता गीता पांडेय, गुरुओं और परिजनों को दिया है।
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भटनी(देवरिया)। कोड़रा डाबर गांव निवासी अंशु यादव ने प्रदेश के टॉप टेन मेधावियों की सूची में जगह बनाई है। उसकी सफलता से परिवार, गांव व विद्यालय में खुशी का माहौल है। लेकिन, अंशु को इससे संतुष्टि नहीं मिली है। वह सिविल परीक्षा पास कर आईपीएस बन माता पिता के सपनों को साकार करना चाहती है। उसने अपने सफलता का श्रेय गुरु, माता-पिता, भाई और दोनों बहनों को दिया है। उसने बताया कि बिना कोचिंग के घर पर पढ़ाई मुश्किल भरी रही, लेकिन एक्सपर्ट भाई और बहनों ने कठिन समय में भरपूर सहयोग किया।
बता दें कि अंशु की बड़ी बहन शिवानी यादव, सीमा यादव भी पढ़ने में बहुत होशियार है। भाई हरिओम यादव गोरखपुर विश्वविद्यालय में बीएससी का छात्र है। दिनेश यादव किसान है उनकी आर्थिक हालत ऐसी नहीं है कि वे बच्चों को बड़े स्कूलों में दाखिला दिला पाए, लेकिन उन्होंने अच्छे संस्कार और अनुशासन के साथ बच्चों की परवरिश करते हुए शिक्षा दिलाया। उन्होंने बताया कि कोरोना काल में पढ़ाई के चलते पहली बार परिवार में स्मार्ट फोन लिया गया। बच्चे जरूरत पड़ने पर ही इस्तेमाल करते हैं। वहीं जिले में आठवें स्थान पर रही बंधुनाथ इंटरमीडिएट कॉलेज की पलक पांडेय बड़ा होकर डॉक्टर बनना चाहती हैं। उन्होंने सफलता का श्रेय पिता रत्नेश पांडेय, माता गीता पांडेय, गुरुओं और परिजनों को दिया है।
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