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Deoria News: फर्जी प्रमाणपत्र पर काम कर रही आंगनबाड़ी सहायिका की संविदा समाप्त
Sat, 27 Dec 2025 11:34 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sat, 27 Dec 2025 11:34 PM IST
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रामपुर कारखाना। स्थानीय विकास खंड के ग्राम पंचायत करनपुर पचफेड़ा निवासी अलकेंद्र राव की शिकायत पर वहां की आंगनबाड़ी सहायिका की संविदा समाप्त कर दी गई है। यह कार्रवाई जिला कार्यक्रम अधिकारी ने की है। आरोपी सहायिका को अपने प्रमाणपत्रों के सत्यापन के लिए साथ पढ़े किसी व्यक्ति की गवाही दिलानी थी लेकिन वह कोई साक्ष्य नहीं दे पाई।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि करनपुर पचफेड़ा में तैनात आंगनबाड़ी सहायिका उषा देवी पत्नी सुरेश ने वर्ष 2004 में धोखाधड़ी करके जूनियर हाईस्कूल का प्रमाणपत्र प्राप्त किया था और उसी के सहारे आंगनबाड़ी केंद्र में सहायिका की नौकरी पा ली। शिकायत पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की तरफ से जांच कराई गई जिसमें प्रमाणपत्र फर्जी पाया गया।
स्थानांतरण प्रमाणपत्र पर सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी रामपुर कारखाना के फर्जी हस्ताक्षर और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय का काउंटरसाइन भी फर्जी पाया गया। मामले की जांच के दौरान आरोपी उषा देवी को अपना पक्ष रखने के लिए एक अवसर दिया किया गया। उन्हें अपने प्रमाणपत्र को सही साबित करने के लिए अपने किसी सहपाठी जिसने उसी कक्षा में अध्ययन किया है, उसका बयान दर्ज कराने को कहा।
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यह साक्ष्य नहीं मिलने पर एक और अवसर देते हुए उस साल उस विद्यालय में पढ़ने वाले किसी भी व्यक्ति की गवाही के लिए कहा गया। उषा देवी ने 22 दिसंबर तक इस संबंध में न तो अपना लिखित पक्ष प्रस्तुत किया और नहीं कोई भी ऐसा सहपाठी प्रस्तुत किया जिससे स्पष्ट हो सके कि उक्त विद्यालय में उनके साथ किसी ने अध्ययन किया हो। इसके बाद जिला कार्यक्रम अधिकारी आदिश मिश्रा ने सहायिका उषा देवी की संविदा समाप्त कर दी।
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शिकायतकर्ता का आरोप है कि करनपुर पचफेड़ा में तैनात आंगनबाड़ी सहायिका उषा देवी पत्नी सुरेश ने वर्ष 2004 में धोखाधड़ी करके जूनियर हाईस्कूल का प्रमाणपत्र प्राप्त किया था और उसी के सहारे आंगनबाड़ी केंद्र में सहायिका की नौकरी पा ली। शिकायत पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की तरफ से जांच कराई गई जिसमें प्रमाणपत्र फर्जी पाया गया।
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स्थानांतरण प्रमाणपत्र पर सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी रामपुर कारखाना के फर्जी हस्ताक्षर और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय का काउंटरसाइन भी फर्जी पाया गया। मामले की जांच के दौरान आरोपी उषा देवी को अपना पक्ष रखने के लिए एक अवसर दिया किया गया। उन्हें अपने प्रमाणपत्र को सही साबित करने के लिए अपने किसी सहपाठी जिसने उसी कक्षा में अध्ययन किया है, उसका बयान दर्ज कराने को कहा।
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यह साक्ष्य नहीं मिलने पर एक और अवसर देते हुए उस साल उस विद्यालय में पढ़ने वाले किसी भी व्यक्ति की गवाही के लिए कहा गया। उषा देवी ने 22 दिसंबर तक इस संबंध में न तो अपना लिखित पक्ष प्रस्तुत किया और नहीं कोई भी ऐसा सहपाठी प्रस्तुत किया जिससे स्पष्ट हो सके कि उक्त विद्यालय में उनके साथ किसी ने अध्ययन किया हो। इसके बाद जिला कार्यक्रम अधिकारी आदिश मिश्रा ने सहायिका उषा देवी की संविदा समाप्त कर दी।