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Deoria News: माेटी रकम वसूल कर गुमराह करने का आराेप
Sat, 03 May 2025 11:46 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sat, 03 May 2025 11:46 PM IST
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देवरिया। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की मिली भगत से कार्यालय में तैनात एक बाबू (क्लर्क) ने कूटरचित तरीके से फर्जी प्रमाण तैयार करा लिया। नौकरी के एवज में मोटी रकम की वसूली कर फर्जी प्रमाण पत्र संलग्न कर बड़ी सफाई के साथ नौकरी भी दिला दी।
यह आरोप लगाते हुए क्षेत्र क रहने वाले विनोद तिवारी ने 2020 में शिकायत की। इससे जिले से लेकर लखनऊ तक हड़कंप मच गया। जांच में शिकायत सही पाए जाने पर आवश्यक प्रक्रिया के तहत कुल सात फर्जी शिक्षकों पर केस दर्ज कराया गया। वेतन वसूली का आदेश भी जारी हुआ।
लेकिन, इसी बीच उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर न्यायालय में सुनवाई और स्थगन आदेश जारी होने का हवाला देने लगा। जबकि शिकायतकर्ता का कहना है कि न्यायालय ने दोबारा जांच का काेई आदेश जारी ही नहीं हुआ है। वहीं, इस मामले में कुछ दिन पहले एक आरोपी की फिर से नियुक्ति कर दी गई है। वह वेतन भी ले रही हैं।
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जिले के तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी और कार्यालय में तैनात बाबू की मिलीभगत से शिक्षकों की भर्ती के विज्ञापन व नियुक्ति से जुड़े आवश्यक पात्रता दस्तावेज में कूट रचित तरीके से फर्जीवाड़ा कर धन उगाही कर नौकरी दे दी गई।
25 अप्रैल, 2019 को विशेष सचिव, उत्तर प्रदेश, बेसिक शिक्षा विभाग अनुभाग, लखनऊ ने मामले का गंभीरता से संज्ञान लिया। शिकायत के संदर्भ की जांच के लिए शिक्षा निदेशक (बेसिक) मंडल, गोरखपुर को जांच अधिकारी बनाया। प्रारंभिक जांच में त्रुटि उजागर होने पर नगर के बीईओ को सरोज यादव का सत्यापन होने तक तत्काल प्रभाव से वेतन रोकने के निर्देश दिए। 15 जनवरी, 2020 सचिव कार्यालय से इस बात को सार्वजनिक किया गया कि सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) की तरफ से शिकायत के संदर्भ की सम्यक रूप से जांच की गई।
सुनवाई के पश्चात जांच अधिकारी की तरफ से कार्यालय को प्रेषित जांच आख्या, 11 दिसंबर, 2019 को शासन को प्राप्त हुई, जिसमें उनके विरुद्ध फर्जी प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर नौकरी प्राप्त करने की शिकायत को पुष्टि करते हुए नियमानुसार संस्तुति की गई है।
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यह आरोप लगाते हुए क्षेत्र क रहने वाले विनोद तिवारी ने 2020 में शिकायत की। इससे जिले से लेकर लखनऊ तक हड़कंप मच गया। जांच में शिकायत सही पाए जाने पर आवश्यक प्रक्रिया के तहत कुल सात फर्जी शिक्षकों पर केस दर्ज कराया गया। वेतन वसूली का आदेश भी जारी हुआ।
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लेकिन, इसी बीच उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर न्यायालय में सुनवाई और स्थगन आदेश जारी होने का हवाला देने लगा। जबकि शिकायतकर्ता का कहना है कि न्यायालय ने दोबारा जांच का काेई आदेश जारी ही नहीं हुआ है। वहीं, इस मामले में कुछ दिन पहले एक आरोपी की फिर से नियुक्ति कर दी गई है। वह वेतन भी ले रही हैं।
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जिले के तत्कालीन बेसिक शिक्षा अधिकारी और कार्यालय में तैनात बाबू की मिलीभगत से शिक्षकों की भर्ती के विज्ञापन व नियुक्ति से जुड़े आवश्यक पात्रता दस्तावेज में कूट रचित तरीके से फर्जीवाड़ा कर धन उगाही कर नौकरी दे दी गई।
25 अप्रैल, 2019 को विशेष सचिव, उत्तर प्रदेश, बेसिक शिक्षा विभाग अनुभाग, लखनऊ ने मामले का गंभीरता से संज्ञान लिया। शिकायत के संदर्भ की जांच के लिए शिक्षा निदेशक (बेसिक) मंडल, गोरखपुर को जांच अधिकारी बनाया। प्रारंभिक जांच में त्रुटि उजागर होने पर नगर के बीईओ को सरोज यादव का सत्यापन होने तक तत्काल प्रभाव से वेतन रोकने के निर्देश दिए। 15 जनवरी, 2020 सचिव कार्यालय से इस बात को सार्वजनिक किया गया कि सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) की तरफ से शिकायत के संदर्भ की सम्यक रूप से जांच की गई।
सुनवाई के पश्चात जांच अधिकारी की तरफ से कार्यालय को प्रेषित जांच आख्या, 11 दिसंबर, 2019 को शासन को प्राप्त हुई, जिसमें उनके विरुद्ध फर्जी प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर नौकरी प्राप्त करने की शिकायत को पुष्टि करते हुए नियमानुसार संस्तुति की गई है।