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Deoria News: 25 साल पुराने गैंगस्टर केस में आरोपी साक्ष्य के अभाव में बरी
Sun, 18 Oct 2026 02:08 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sun, 18 Oct 2026 02:08 AM IST
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देवरिया। विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी के आरोप से जुड़े करीब 25 साल पुराने गैंगस्टर केस में कोर्ट ने आरोपी को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। अपर सत्र न्यायाधीश एवं विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट कक्ष संख्या पांच नरेंद्र नाथ त्रिपाठी ने अभियोजन पक्ष की ओर से आरोप साबित नहीं कर पाने पर यह फैसला सुनाया।
खामपार थाना क्षेत्र के ततायर खुर्द निवासी अलियर उर्फ वशीर अहमद के खिलाफ वर्ष 2001 में भाटपाररानी थाने में गैंगस्टर एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अभियोजन के अनुसार, वर्ष 2000 में मलेशिया में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से 65,500 रुपये तक लिए गए थे। आरोप था कि लोगों को बैंकॉक के रास्ते मलेशिया भेजा गया, जहां उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ा और जेल भी जाना पड़ा।
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने छह गवाह पेश किए। बचाव पक्ष ने दलील दी कि मूल मामले में गवाहों ने आरोपी की संलिप्तता की पुष्टि नहीं की थी। कोर्ट ने पाया कि गवाहों के बयानों से आरोपी के गिरोह संचालित करने और अनुचित आर्थिक लाभ अर्जित करने के आरोप साबित नहीं हुए। अभियोजन पक्ष लगातार आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता के आवश्यक तथ्य भी प्रमाणित नहीं कर सका। ऐसे में न्यायालय ने संदेह का लाभ देते हुए आरोपी को बरी कर दिया।
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खामपार थाना क्षेत्र के ततायर खुर्द निवासी अलियर उर्फ वशीर अहमद के खिलाफ वर्ष 2001 में भाटपाररानी थाने में गैंगस्टर एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अभियोजन के अनुसार, वर्ष 2000 में मलेशिया में नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से 65,500 रुपये तक लिए गए थे। आरोप था कि लोगों को बैंकॉक के रास्ते मलेशिया भेजा गया, जहां उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ा और जेल भी जाना पड़ा।
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मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने छह गवाह पेश किए। बचाव पक्ष ने दलील दी कि मूल मामले में गवाहों ने आरोपी की संलिप्तता की पुष्टि नहीं की थी। कोर्ट ने पाया कि गवाहों के बयानों से आरोपी के गिरोह संचालित करने और अनुचित आर्थिक लाभ अर्जित करने के आरोप साबित नहीं हुए। अभियोजन पक्ष लगातार आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता के आवश्यक तथ्य भी प्रमाणित नहीं कर सका। ऐसे में न्यायालय ने संदेह का लाभ देते हुए आरोपी को बरी कर दिया।
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