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Deoria News: पेट में दर्द आज अल्ट्रासाउंड पंद्रह दिन बाद, बाहर से कराई एक हजार रुपये में जांच
Sat, 03 Jun 2023 11:57 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
Updated Sat, 03 Jun 2023 11:57 PM IST
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मेडिकल कॉलेज के ओपीडी में मरीज व तिमारदारो की लगी भीड़।संवाद
रेडियोलाॅजिस्ट के छुट्टी पर होने से नहीं हो पाती है जांच, मरीजों को मजबूरी में निजी सेंटरों का लेना पड़ता है सहारा
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रा साउंड के लिए मरीजों को सांसत हो रही है। पेट में दर्द होने पर अल्ट्रा साउंड जांच के लिए पंद्रह दिन बाद का समय दिया जा रहा है। काफी कहने के बाद भी सुनवाई नहीं हो रही है। हर रोज 30 से 35 मरीजों की जांच हो पाती है। रेडियोलाॅजिस्ट के छुट्टी पर जाने पर जांच ठप रहती है। मरीजों को मजबूरी में निजी सेंटरों का सहारा लेना पड़ता है, जहां छह से पंद्रह सौ रुपये कीमत देनी पड़ती है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड जांच कराना टेेढ़ी खीर साबित हो रहा है। यहां दो रेडियोलाॅजिस्ट ही हैं। इसमें पुरुष और महिला अस्पताल में एक-एक हैं। ओपीडी में हर रोज 70 मरीज जांच के लिए आते हैं। पर उनकी जांच नहीं हो पाती है। इसके लिए पंद्रह दिन बाद बुलाया जा रहा है। यहां तक कि इमरजेंसी के मरीज की भी जांच नहीं हो पाती है। इसमें भी कुछ महत्वपूर्ण जांच की सुविधा नहीं है। इसमें घुटने, स्क्रूटम, कलर डाॅप्लर सहित अन्य जांच शामिल हैं। जरूरी होने पर बाहर से जांच करानी पड़ रही है, जहां छह सौ से लेकर पंद्रह सौ रुपये खर्च करने पड़ते हैं। वहीं अस्पताल में मौजूद कुछ लोग मरीजों को चिह्नित सेंटर में जांच के लिए भेज देते हैं। बालकुआं के दीपक राव बेटे, रामलक्षन के मनोज भाई की जांच कराने के लिए परेशान थे। उन्हें थक-हारकर निजी सेंटर की ओर रुख करना पड़ा।
शनिवार को रेडियोलॉजिस्ट के सरकारी कार्य से कोर्ट में जाने के कारण अल्ट्रासाउंड जांच ठप रही। पंद्रह दिन पहले नंबर लगाए शहर व दूर-दराज गांवों से लोग जांच के लिए पहुंचे तो जांच न होने की सूचना मिलने पर निराश होकर चले गए। राघव नगर की सरिता, अलीनगर की जुबैदा, रामपुर कारखाना की मनोरमा मायूस होकर लौट गईं। उधर अस्पताल में मौजूद कुछ लोग चिह्नित सेंटरों पर भेज देते हैं।
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महिला अस्पताल में सुबह 11 बजे के बाद बाहर से करानी पड़ती है जांच
महिला अस्पताल में 30 जांच ही होती है। इसमें 25 ओपीडी व पांच भर्ती गर्भवती की ही जांच होती है। ओपीडी में हर रोज दो सौ से अधिक गर्भवती रूटीन जांच के लिए पहुंचती हैं। इसमें पचास से साठ प्रतिशत की जांच हो पाती है। गर्भवती की तीसरे, छठे व नौवे माह में अल्ट्रासाउंड जांच कराई जाती है। पर यहां जांच कराने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। लोग भोर से ही लाइन लगा देते हैं, लेकिन थोड़ी देर होने पर नंबर भी नहीं लग पता है। कई दिन चक्कर लगाने के बाद भी निराश होना पड़ता है और बाहर का सहारा लेना पड़ता है। रेडियोलाॅजिस्ट भी दो से तीन घंटे जांच कर चले जाते हैं। इसके बाद ओपीडी के मरीजों को बाहर से जांच कराने का सुझाव भी कुछ कर्मी देते हैं। कुछ आशा कार्यकर्ता भी निजी सेंटरों पर जांच के लिए गर्भवती को लेकर पहुंच जाती हैं, जहां कीमत चुकानी पड़ती है। उसरा बाजार की विनीता, भलुअनी की आकांक्षा, पथरदेवा की सविता ने बाहर से जांच कराया।
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अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा ठीक नहीं है। यहां नंबर लगाया जा रहा है। बीमारी आज है और जांच दो सप्ताह बाद होगा तो इलाज कैसे होगा
किशुन चौहान, खोराराम
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- पेट में दर्द से परेशान भाई को लेकर सुबह इमरजेंसी पहुंचा। अल्ट्रासाउंड कराने पहुंचा तो जांच नहीं हुई। मजबूरी में बाहर से करानी पड़ी। इसके लिए 1300 कीमत चुकाना पड़ा।
गौरव मिश्र, सोंदा
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- पत्नी को महिला डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड कराने को कहा। यहां भोर में नंबर लगाना पड़ेगा। गांव से आने में परेशानी होगी।
रंजन बरनवाल, कटियारी
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- ओपीडी में गर्भवती पत्नी को दिखाने के बाद अल्ट्रासाउंड जांच के लिए पहुंचा तो कक्ष बंद था। सुबह 25 लोगों का ही नंबर लगेगा और उनकी जांच होगी।
अर्जुन विश्वकर्मा, रामगुलाम टोला
-- -- -- -- -- -- रेडियोलाॅजिस्ट की कमी है। शासन से मांग की गई है। पुरुष अस्पताल के रेडियोलाॅजिस्ट को अल्ट्रासाउंड जांच के अलावा मेडिगोलीगल के लिए एक्स-रे की रिपोर्ट भी तैयार करनी पड़ती है। अस्पताल में दो जगह नियमित जांच होती है और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
-डॉ. एचके मिश्रा सीएमएस
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रा साउंड के लिए मरीजों को सांसत हो रही है। पेट में दर्द होने पर अल्ट्रा साउंड जांच के लिए पंद्रह दिन बाद का समय दिया जा रहा है। काफी कहने के बाद भी सुनवाई नहीं हो रही है। हर रोज 30 से 35 मरीजों की जांच हो पाती है। रेडियोलाॅजिस्ट के छुट्टी पर जाने पर जांच ठप रहती है। मरीजों को मजबूरी में निजी सेंटरों का सहारा लेना पड़ता है, जहां छह से पंद्रह सौ रुपये कीमत देनी पड़ती है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड जांच कराना टेेढ़ी खीर साबित हो रहा है। यहां दो रेडियोलाॅजिस्ट ही हैं। इसमें पुरुष और महिला अस्पताल में एक-एक हैं। ओपीडी में हर रोज 70 मरीज जांच के लिए आते हैं। पर उनकी जांच नहीं हो पाती है। इसके लिए पंद्रह दिन बाद बुलाया जा रहा है। यहां तक कि इमरजेंसी के मरीज की भी जांच नहीं हो पाती है। इसमें भी कुछ महत्वपूर्ण जांच की सुविधा नहीं है। इसमें घुटने, स्क्रूटम, कलर डाॅप्लर सहित अन्य जांच शामिल हैं। जरूरी होने पर बाहर से जांच करानी पड़ रही है, जहां छह सौ से लेकर पंद्रह सौ रुपये खर्च करने पड़ते हैं। वहीं अस्पताल में मौजूद कुछ लोग मरीजों को चिह्नित सेंटर में जांच के लिए भेज देते हैं। बालकुआं के दीपक राव बेटे, रामलक्षन के मनोज भाई की जांच कराने के लिए परेशान थे। उन्हें थक-हारकर निजी सेंटर की ओर रुख करना पड़ा।
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शनिवार को रेडियोलॉजिस्ट के सरकारी कार्य से कोर्ट में जाने के कारण अल्ट्रासाउंड जांच ठप रही। पंद्रह दिन पहले नंबर लगाए शहर व दूर-दराज गांवों से लोग जांच के लिए पहुंचे तो जांच न होने की सूचना मिलने पर निराश होकर चले गए। राघव नगर की सरिता, अलीनगर की जुबैदा, रामपुर कारखाना की मनोरमा मायूस होकर लौट गईं। उधर अस्पताल में मौजूद कुछ लोग चिह्नित सेंटरों पर भेज देते हैं।
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महिला अस्पताल में सुबह 11 बजे के बाद बाहर से करानी पड़ती है जांच
महिला अस्पताल में 30 जांच ही होती है। इसमें 25 ओपीडी व पांच भर्ती गर्भवती की ही जांच होती है। ओपीडी में हर रोज दो सौ से अधिक गर्भवती रूटीन जांच के लिए पहुंचती हैं। इसमें पचास से साठ प्रतिशत की जांच हो पाती है। गर्भवती की तीसरे, छठे व नौवे माह में अल्ट्रासाउंड जांच कराई जाती है। पर यहां जांच कराने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ती है। लोग भोर से ही लाइन लगा देते हैं, लेकिन थोड़ी देर होने पर नंबर भी नहीं लग पता है। कई दिन चक्कर लगाने के बाद भी निराश होना पड़ता है और बाहर का सहारा लेना पड़ता है। रेडियोलाॅजिस्ट भी दो से तीन घंटे जांच कर चले जाते हैं। इसके बाद ओपीडी के मरीजों को बाहर से जांच कराने का सुझाव भी कुछ कर्मी देते हैं। कुछ आशा कार्यकर्ता भी निजी सेंटरों पर जांच के लिए गर्भवती को लेकर पहुंच जाती हैं, जहां कीमत चुकानी पड़ती है। उसरा बाजार की विनीता, भलुअनी की आकांक्षा, पथरदेवा की सविता ने बाहर से जांच कराया।
अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा ठीक नहीं है। यहां नंबर लगाया जा रहा है। बीमारी आज है और जांच दो सप्ताह बाद होगा तो इलाज कैसे होगा
किशुन चौहान, खोराराम
- पेट में दर्द से परेशान भाई को लेकर सुबह इमरजेंसी पहुंचा। अल्ट्रासाउंड कराने पहुंचा तो जांच नहीं हुई। मजबूरी में बाहर से करानी पड़ी। इसके लिए 1300 कीमत चुकाना पड़ा।
गौरव मिश्र, सोंदा
- पत्नी को महिला डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड कराने को कहा। यहां भोर में नंबर लगाना पड़ेगा। गांव से आने में परेशानी होगी।
रंजन बरनवाल, कटियारी
- ओपीडी में गर्भवती पत्नी को दिखाने के बाद अल्ट्रासाउंड जांच के लिए पहुंचा तो कक्ष बंद था। सुबह 25 लोगों का ही नंबर लगेगा और उनकी जांच होगी।
अर्जुन विश्वकर्मा, रामगुलाम टोला
-डॉ. एचके मिश्रा सीएमएस