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आधी खेती, आधी बारी की तर्ज पर पूर्व प्रमुख
Deoria
Updated Thu, 05 Jun 2014 05:30 AM IST
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रुद्रपुर। पूर्व ब्लॉक प्रमुख सुरेंद्र प्रताप सिंह बाढ़ से प्रभावित दोआबा क्षेत्र में आधी खेती, आधा बारी की पुरानी कहानी को चरितार्थ करने में लगे हैं। उन्होंने हर वर्ष दो एकड़ भू भाग पर पौधरोपण का संकल्प लिया है। वह चार वर्षों से नदी के तटवर्ती क्षेत्र में पर्यावरण के संरक्षण में योगदान दे रहे हैं।
पूर्व प्रमुख अब तक छह एकड़ भूभाग पर पौधरोपण करा चुके हैं। चार एकड़ में लगे यूकेलिप्टस के 5200 वृक्ष चार वर्ष में तैयार हो जाएंगे। चार साल बाद प्रमुख को पौधरोपण से एक करोड़ 56 लाख की पूंजी तैयार हो जाएगी। हर साल बाढ़ की विभीषिका से हरियालीविहीन हो चुके क्षेत्र को हराभरा करने में जुटे प्रमुख से प्रेरणा लेकर दोआबा के छोटे-बड़े सैकड़ों किसान पौधरोपण कराना शुरू कर दिए। गोर्रा नदी के तटवर्ती क्षेत्र में पौधरोपण तेज होने से कटान का खतरा भी कम होता जा रहा है। पूर्व ब्लॅाक प्रमुख का नदी के किनारे करीब 20 एकड़ का चक है। वह हर साल दो एकड़ में पौधरोपण कराते हैं। प्रमुख ने छह एकड़ में यूकेलिप्टस, आम और बांस का रोपण कराकर पूरी तलहटी को हराभरा कर दिया है। इन पौधों के बीच में वह हरी सब्जियों को भी उगा रहे हैं। ब्लॉक प्रमुख ने कहा पौधरोपण से किसान शारीरिक और आर्थिक दोनों रूप में संपन्न हो सकता है। हर साल बाढ़ के पानी से डूब जाने वाली भूमि अब पौधरोपण से सोना उगलने लगी है। उन्होंने कहा कि जीते जी हर साल दो एकड़ भूमि पर पौधरोपण का संकल्प पूरा करेंगे।
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पूर्व प्रमुख अब तक छह एकड़ भूभाग पर पौधरोपण करा चुके हैं। चार एकड़ में लगे यूकेलिप्टस के 5200 वृक्ष चार वर्ष में तैयार हो जाएंगे। चार साल बाद प्रमुख को पौधरोपण से एक करोड़ 56 लाख की पूंजी तैयार हो जाएगी। हर साल बाढ़ की विभीषिका से हरियालीविहीन हो चुके क्षेत्र को हराभरा करने में जुटे प्रमुख से प्रेरणा लेकर दोआबा के छोटे-बड़े सैकड़ों किसान पौधरोपण कराना शुरू कर दिए। गोर्रा नदी के तटवर्ती क्षेत्र में पौधरोपण तेज होने से कटान का खतरा भी कम होता जा रहा है। पूर्व ब्लॅाक प्रमुख का नदी के किनारे करीब 20 एकड़ का चक है। वह हर साल दो एकड़ में पौधरोपण कराते हैं। प्रमुख ने छह एकड़ में यूकेलिप्टस, आम और बांस का रोपण कराकर पूरी तलहटी को हराभरा कर दिया है। इन पौधों के बीच में वह हरी सब्जियों को भी उगा रहे हैं। ब्लॉक प्रमुख ने कहा पौधरोपण से किसान शारीरिक और आर्थिक दोनों रूप में संपन्न हो सकता है। हर साल बाढ़ के पानी से डूब जाने वाली भूमि अब पौधरोपण से सोना उगलने लगी है। उन्होंने कहा कि जीते जी हर साल दो एकड़ भूमि पर पौधरोपण का संकल्प पूरा करेंगे।
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