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बढ़या बुजुर्ग में आग लगने से दो बच्चों की मौत
Deoria
Updated Sat, 14 Dec 2013 05:42 AM IST
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देवरिया। सदर कोतवाली क्षेत्र के बढ़या बुजुर्ग के तिवारी टोला में गुरुवार की रात ढिबरी से एक मकान में आग लग गई। इसमें दो मासूमों की जलकर मौत हो गई। इस हादसे में तीसरे बच्चे की हालत गंभीर बताई जा रही है। जानकारी होते ही सीओ नगर मौके पर पहुंच गए। हादसे के बाद गांव के लोग गमगीन हैं।
कोतवाली क्षेत्र के बढ़या बुजुर्ग गांव के तिवारी टोला निवासी गुड्डू विश्वकर्मा अपने परिवार के साथ रहते हैं। ठंड से बचने के लिए उनकी पत्नी सरिता जमीन पर पुआल का बिस्तर बनाकर अपने बच्चों का सुलाती थी। गुरुवार की रात भोजन करने के बाद घर के बाकी सदस्य दूसरे मकान में सोने चले गए थे। सरिता अपने तीन बच्चे अकिंता (9), अमन (5), निशा (3) के साथ घर पर थी। परिवार के लोगों ने बताया कि जिस कमरे में तीनों बच्चे सो रहे थे, उस कमरे में उजाला करने के लिए सरिता ने एक ढिबरी जला रखी थी। ताकि अंधेरी रात में बच्चों को कोई परेशानी न हो। बताया जाता कि रात में सरिता बच्चों को सुलाकर बाहर से कमरे का दरवाजा बंद कर आगे अलाव तापने लगी। रात दस बजे के करीब कमरे में धुआं और बच्चों के चिल्लाने की आवाज सुनकर वह जब अपने कमरे की तरफ देखी। वह पागल होकर बच्चों को बचाने की कोशिश करने लगी। आसपास के लोग किसी तरह कमरे में पहुंचे तो बिस्तर जल गया था। तीन बच्चे गंभीर रूप से झुलस गए थे। उन्हें उपचार के लिए जिला अस्पताल लाया गया। हालत गंभीर होने के कारण सभी को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। जहां उपचार के दौरान अंकिता और निशा की मौत हो गई। अमन की हालत गंभीर बताई जा रही है। हादसे के बाद गांव के लोग गमगीन हैं। आंखों के सामने बच्चे की मौत के बाद मां का रोते-रोते बुरा हाल है। वह खुद को उनकी मौत को दोषी बता रही थी।
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कोतवाली क्षेत्र के बढ़या बुजुर्ग गांव के तिवारी टोला निवासी गुड्डू विश्वकर्मा अपने परिवार के साथ रहते हैं। ठंड से बचने के लिए उनकी पत्नी सरिता जमीन पर पुआल का बिस्तर बनाकर अपने बच्चों का सुलाती थी। गुरुवार की रात भोजन करने के बाद घर के बाकी सदस्य दूसरे मकान में सोने चले गए थे। सरिता अपने तीन बच्चे अकिंता (9), अमन (5), निशा (3) के साथ घर पर थी। परिवार के लोगों ने बताया कि जिस कमरे में तीनों बच्चे सो रहे थे, उस कमरे में उजाला करने के लिए सरिता ने एक ढिबरी जला रखी थी। ताकि अंधेरी रात में बच्चों को कोई परेशानी न हो। बताया जाता कि रात में सरिता बच्चों को सुलाकर बाहर से कमरे का दरवाजा बंद कर आगे अलाव तापने लगी। रात दस बजे के करीब कमरे में धुआं और बच्चों के चिल्लाने की आवाज सुनकर वह जब अपने कमरे की तरफ देखी। वह पागल होकर बच्चों को बचाने की कोशिश करने लगी। आसपास के लोग किसी तरह कमरे में पहुंचे तो बिस्तर जल गया था। तीन बच्चे गंभीर रूप से झुलस गए थे। उन्हें उपचार के लिए जिला अस्पताल लाया गया। हालत गंभीर होने के कारण सभी को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। जहां उपचार के दौरान अंकिता और निशा की मौत हो गई। अमन की हालत गंभीर बताई जा रही है। हादसे के बाद गांव के लोग गमगीन हैं। आंखों के सामने बच्चे की मौत के बाद मां का रोते-रोते बुरा हाल है। वह खुद को उनकी मौत को दोषी बता रही थी।
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