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यहां काबा और काशी करते हैं आलिंगन
Deoria
Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
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सलेमपुर। भीमपुर एक ऐसा गांव है जहां 150 वर्षों से हिंदू लोग मोहर्रम की रवायतें बदस्तूर निभाते आ रहे हैं। इन दिनों उस गांव उत्सव जैसा माहौल है। हर रोज सुबह और शाम चौक पर ढोल तासों की आवाज से पूरा गांव गूंज रहा है। ढोल तासा और ताजिया के बीच वे सारी रस्में निभाई जाती है जिसमें हिंदू लोग शिद्दत से जुड़े हैं। मोहर्रम पर ताजिए रखने की परंपरा गहरी आस्था से जुड़ी है।
गांव के तूफन चौहान 82, नंदलाल चौहान, बिजली चौहान, रमेश्वर चौहान, बृजेश चौहान कहते हैं कि हमारे परिवार में लोग विकलांग हुआ करते थे। हम लोगों के बुजुर्गों ने कर्बला पर जाकर मन्नत मांगी थी कि अगर परिवार और गांव में कोई विकलांग पैदा नहीं होगा तो हम ताजिया रखेंगे। मन्नत पूरी होने के बाद चौहान टोले पर ताजिया रखने का सिलसिला शुरू हो गया। नौवीं को ताजिया पूरे गांव में घुमाई जाती है। तूफन चौहान ने अपनी पुश्तैनी जमीन महज चार हजार में कर्बला के लिए दे दिया। इस कर्बला पर हरनही के मुसलमानों का भी ताजिया आता है। ताजिया मिलान होने के बाद कर्बला में दफन किया जाता है। दोनों गांव के हिंदू मुस्लिम समुदाय के लोग करतब भी दिखाते हैं। मोपर्रम की सारी रवायतें वे उसी शिद्दत के साथ मनाते हैं। प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी तूफन चौहान के दरवाजे पर चौक बनाया गया है। चौक पर रोज शाम और भोर में तासे और ढोल बजने शुरू हो जाते हैं। कर्बला पर गांव के ताजियादारों ने बताया कि इस बार ताजिया मझौलीराज नगर से खरीद कर आएगी। कारीगरों के अभाव में गांव में ताजिया नहीं बन पाई है। गांव वालों का विश्वास है कि चौक पर मांगी गई मन्नत पूरी होती है।
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गांव के तूफन चौहान 82, नंदलाल चौहान, बिजली चौहान, रमेश्वर चौहान, बृजेश चौहान कहते हैं कि हमारे परिवार में लोग विकलांग हुआ करते थे। हम लोगों के बुजुर्गों ने कर्बला पर जाकर मन्नत मांगी थी कि अगर परिवार और गांव में कोई विकलांग पैदा नहीं होगा तो हम ताजिया रखेंगे। मन्नत पूरी होने के बाद चौहान टोले पर ताजिया रखने का सिलसिला शुरू हो गया। नौवीं को ताजिया पूरे गांव में घुमाई जाती है। तूफन चौहान ने अपनी पुश्तैनी जमीन महज चार हजार में कर्बला के लिए दे दिया। इस कर्बला पर हरनही के मुसलमानों का भी ताजिया आता है। ताजिया मिलान होने के बाद कर्बला में दफन किया जाता है। दोनों गांव के हिंदू मुस्लिम समुदाय के लोग करतब भी दिखाते हैं। मोपर्रम की सारी रवायतें वे उसी शिद्दत के साथ मनाते हैं। प्रत्येक वर्ष की तरह इस बार भी तूफन चौहान के दरवाजे पर चौक बनाया गया है। चौक पर रोज शाम और भोर में तासे और ढोल बजने शुरू हो जाते हैं। कर्बला पर गांव के ताजियादारों ने बताया कि इस बार ताजिया मझौलीराज नगर से खरीद कर आएगी। कारीगरों के अभाव में गांव में ताजिया नहीं बन पाई है। गांव वालों का विश्वास है कि चौक पर मांगी गई मन्नत पूरी होती है।
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