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2105 एग्रीकल्चर मार्केटिंग हब बनेंगे
Deoria
Updated Tue, 20 Nov 2012 12:00 PM IST
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सलेमपुर। प्रदेश के किसानों की आय दोगुना करने के उद्देश्य से प्रत्येक 100 वर्ग किलोमीटर पर एक मंडी/उपमंडी स्थल स्थापित किया जाना है। इसके लिए जमीन क्रय न करके ग्रामीण अंचलों में स्थित अन्य विभागों की संपत्तियों में रिक्त स्थानों पर ही उपमंडी स्थापित किया जाना प्रस्तावित है। प्रदेश में चार वर्षों में 2105 एग्रीकल्चर मार्केटिंग हब स्थापित किए जाएंगे।
आयुक्त एवं निदेशक राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद राजीव अग्रवाल ने डीएम को लिखे पत्र में कहा है कि 13वें वित्त आयोग के अंतर्गत ‘एग्रीकल्चर मार्केटिंग हब’ (एएमएच) नामक एक बहुआयामी योजना संचालित की जा रही है। इसके लिए भूमि क्रय न करके ग्रामीण अंचलों में स्थित अन्य विभाग जैसे पंचायतीराज, सहकारिता, ग्राम्य विकास, भूमि विकास एवं कृषि विभाग की परियोजनाओं में रिक्त स्थानों पर ही उपमंडी स्थल स्थापित किया जाना प्रस्तावित है। शासन द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत भूमि संबंधित विभाग के ही स्वामित्व में रहेगी। संबंधित विभाग व मंडी समिति के मध्य एमओयू निष्पादित होगा। इसके बाद मंडी परिषद इस पर एग्रीकल्चर मार्केटिंग हब का निर्माण कराएगी। एग्रीकल्चर मार्केटिंग हब के लिए ऐसी परिसंपत्तियों का चयन किया जाना है। इसके लिए पहुंच मार्ग होने के साथ साथ किसानों की आवाजाही सुगमता पूर्वक हो और उस स्थल पर व्यापार तथा ग्रामीण हाट-पैट बाजार की संभावना भी हो।
यह है जिले की मंडियों का हाल
मंडी समिति देवरिया क्षेत्रांतर्गत मुख्य मंडी देवरिया, तरकुलवा, पड़री, बरहज, रुद्रपुर, बंगरा बाजार पूर्व से ही उपमंडी घोषित है। जिसमें देवरिया, तरकुलवा, पड़री बाजार में मंडी निर्मित है। बरहज बाजार में भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई चल रही है। उक्त योजना के अंतर्गत भीमपुर, बेलकुंडा, पुरैना में उपमंडी निर्मित हो चुके हैं। महेन में बेसिक शिक्षा विभाग से अनुमति की कार्रवाई चल रही है।
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बारह स्थान हैं उपयुक्त : सीडीओ
आयुक्त एवं निदेशक राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद का पत्र आते ही डीएम के निर्देश पर सीडीओ ने रिक्त परिसंपत्तियों का विवरण प्राप्त करने के लिए जिला प्रबंधक पीसीएफ/ सहायक निबंधन सहकारी समितियां, जिला पंचायती राज अधिकारी, जिला कृषि अधिकारी को पत्र लिख है। पत्र में कहा है कि मंडी समिति ने बरियारपुर, लाहिलपार, देसही देवरिया, पथरदेवा, रामपुर कारखाना, बनकटा, भलुअनी, भागलपुर/मईल, गौरीबाजार, लार, सलेमपुर, भटनी में रिक्त स्थलों को अपने स्तर से एग्रीकल्चर मार्केटिंग हब के लिए उपयुक्त दर्शाया है। उक्त स्थलों में उपयुक्त स्थल व भूमि उपलब्ध हो तो सूचित कर समझौता ज्ञापन तैयार कर प्रेषित करावें।
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आयुक्त एवं निदेशक राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद राजीव अग्रवाल ने डीएम को लिखे पत्र में कहा है कि 13वें वित्त आयोग के अंतर्गत ‘एग्रीकल्चर मार्केटिंग हब’ (एएमएच) नामक एक बहुआयामी योजना संचालित की जा रही है। इसके लिए भूमि क्रय न करके ग्रामीण अंचलों में स्थित अन्य विभाग जैसे पंचायतीराज, सहकारिता, ग्राम्य विकास, भूमि विकास एवं कृषि विभाग की परियोजनाओं में रिक्त स्थानों पर ही उपमंडी स्थल स्थापित किया जाना प्रस्तावित है। शासन द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अंतर्गत भूमि संबंधित विभाग के ही स्वामित्व में रहेगी। संबंधित विभाग व मंडी समिति के मध्य एमओयू निष्पादित होगा। इसके बाद मंडी परिषद इस पर एग्रीकल्चर मार्केटिंग हब का निर्माण कराएगी। एग्रीकल्चर मार्केटिंग हब के लिए ऐसी परिसंपत्तियों का चयन किया जाना है। इसके लिए पहुंच मार्ग होने के साथ साथ किसानों की आवाजाही सुगमता पूर्वक हो और उस स्थल पर व्यापार तथा ग्रामीण हाट-पैट बाजार की संभावना भी हो।
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यह है जिले की मंडियों का हाल
मंडी समिति देवरिया क्षेत्रांतर्गत मुख्य मंडी देवरिया, तरकुलवा, पड़री, बरहज, रुद्रपुर, बंगरा बाजार पूर्व से ही उपमंडी घोषित है। जिसमें देवरिया, तरकुलवा, पड़री बाजार में मंडी निर्मित है। बरहज बाजार में भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई चल रही है। उक्त योजना के अंतर्गत भीमपुर, बेलकुंडा, पुरैना में उपमंडी निर्मित हो चुके हैं। महेन में बेसिक शिक्षा विभाग से अनुमति की कार्रवाई चल रही है।
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बारह स्थान हैं उपयुक्त : सीडीओ
आयुक्त एवं निदेशक राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद का पत्र आते ही डीएम के निर्देश पर सीडीओ ने रिक्त परिसंपत्तियों का विवरण प्राप्त करने के लिए जिला प्रबंधक पीसीएफ/ सहायक निबंधन सहकारी समितियां, जिला पंचायती राज अधिकारी, जिला कृषि अधिकारी को पत्र लिख है। पत्र में कहा है कि मंडी समिति ने बरियारपुर, लाहिलपार, देसही देवरिया, पथरदेवा, रामपुर कारखाना, बनकटा, भलुअनी, भागलपुर/मईल, गौरीबाजार, लार, सलेमपुर, भटनी में रिक्त स्थलों को अपने स्तर से एग्रीकल्चर मार्केटिंग हब के लिए उपयुक्त दर्शाया है। उक्त स्थलों में उपयुक्त स्थल व भूमि उपलब्ध हो तो सूचित कर समझौता ज्ञापन तैयार कर प्रेषित करावें।