{"_id":"48496","slug":"Deoria-48496-68","type":"story","status":"publish","title_hn":"35 बीघा जमीन को लेकर चल रहा खूनी खेल ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
35 बीघा जमीन को लेकर चल रहा खूनी खेल
Deoria
Updated Tue, 11 Sep 2012 12:00 PM IST
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मईल/भागलपुर। सपा नेता बीडीसी सदस्य राजेश यादव पर हुए जानलेवा हमले और उसके चालक कोमल यादव की हत्या के तार मटरू हत्याकांड से जुड़े हैं। मटरू की हत्या के बाद करीब 35 बीघा जमीन पर राजेश का कब्जा बताया जा रहा है। चरचा है कि लाखों रुपये की प्रापर्टी पर वर्चस्व को लेकर खूनी खेल को अंजाम दिया गया। घटना ऐसे समय में अंजाम दिया हुई जब भागलपुर ब्लाक प्रमुख की कुर्सी अविश्वास प्रस्ताव के जरिए छीनने के बाद राजेश का राजनैतिक कद बढ़ गया था।
मटरू हत्याकांड के बारे में जान लें। मईल थाना क्षेत्र के नरसिंहडांड़ निवासी मटरू उर्फ रामदुलारे यादव पुत्र सूर्यदेव यादव की माता शांति देवी वर्ष 2000 में ग्राम प्रधान थीं। उसी समय राजेश से उनका जमीन विवाद शुरू हो गया। इसमें आठ फरवरी 2000 को मटरू की हत्या कर दी गई। हत्या में राजेश यादव, उसका पिता राम मूरत यादव एवं विजेंद्र पुत्र राम केवल का नाम आया। मटरू अपने मां बाप का इकलौता था। उसकी हत्या के बाद घर का चिराग बुझ गया। उसकी बहन की शादी मऊ जिले के मधुवन थाना क्षेत्र के जयराम गिरी परसिया गांव निवासी सिपाही विनय यादव के साथ हुई थी। अपने साले की हत्या हो जाने के बाद विनय ने उसकी बीवी की दूसरी शादी अपने छोटे भाई राम आसरे से करा दी। बताते हैं कि घटना के बाद राजेश एवं उसके परिजनों ने मटरू की करीब 35 बीघा जमीन पर कब्जा कर लिया। जमीन मटरू की मां एवं पूर्व प्रधान शांति देवी के नाम बताई जा रही है। जिसकी कीमत लाखों में है। अपनी सास के नाम पैतृक संपत्ति पर राजेश का कब्जा होने के कारण विनय एवं राम आसरे बेचैन हो गए। उसकी इस जमीन पर लंबे समय से निगाह थी। लेकिन राजेश के भय से वे कुछ करने में खुद को असमर्थ पा रहे थे। राजेश उनकी निगाहों में वर्षों से खटक रहा था। उसके चलते वह अपने मंसूबों में सफल नहीं हो पा रहे थे। पुलिस सूत्रों की मानें तो इधर ब्लाक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आने के बाद अच्छा मौका देखकर राम आसरे ने अपने साथियों एवं रिश्तेदार के साथ राजेश को रास्ते से हटाने की योजना बना डाली। उनकी मंशा थी कि राजेश जब नहीं रहेगा तो जमीन पर कब्जा आसानी से हो जाएगा और मटरू के हत्या का बदला भी ले लिया जाएगा।
घटना के दिन सटीक हुई थी मुखबिरी
बताते हैं कि घटना के दिन राजेश यादव की एक-एक पल की मुखबिरी हो रही थी। राजेश घटना के दिन खुद गाड़ी चलाकर भागलपुर जा रहे थे। देवसिया गांव के पास चालक कोमल ने उनसे गाड़ी चलाने के लिए ले ली। पुलिस सूत्रों की मानें तो मुुखबिर ने बदमाशों को बताया था कि गाड़ी खुद राजेश चला रहा है। इसलिए घटना के समय बदमाशों ने कोमल को राजेश समझा और उसे टारगेट पर ले लिया। बाद में राजेश के असलहा निकालने पर बदमाशों ने उस पर भी गोली दाग दी।
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घटना के विरोध में दुकानें बंद रही
बीडीसी सदस्य राजेश यादव पर जानलेवा हमला और चालक कोमल यादव की हत्या के विरोध में सोमवार को भागलपुर की सभी दुकानें बंद रहीं। दुकानदारों ने घटना के प्रति रोष जताया। व्यापारियाें ने नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। व्यापारियों ने कहा कि चौराहे पर दिनदहाड़े इस वारदात से दहशत व्याप्त हो गई। व्यापारियों ने मामले में निष्पक्ष जांच और चौराहे पर पुलिस पिकेट का इंतजाम करने की मांग की। मांग करने वालों में रोशन यादव, राजेश्वर जायसवाल, शंभू सिंह, सुनील मद्धेशिया, भरत तिवारी आदि शामिल रहे।
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मटरू हत्याकांड के बारे में जान लें। मईल थाना क्षेत्र के नरसिंहडांड़ निवासी मटरू उर्फ रामदुलारे यादव पुत्र सूर्यदेव यादव की माता शांति देवी वर्ष 2000 में ग्राम प्रधान थीं। उसी समय राजेश से उनका जमीन विवाद शुरू हो गया। इसमें आठ फरवरी 2000 को मटरू की हत्या कर दी गई। हत्या में राजेश यादव, उसका पिता राम मूरत यादव एवं विजेंद्र पुत्र राम केवल का नाम आया। मटरू अपने मां बाप का इकलौता था। उसकी हत्या के बाद घर का चिराग बुझ गया। उसकी बहन की शादी मऊ जिले के मधुवन थाना क्षेत्र के जयराम गिरी परसिया गांव निवासी सिपाही विनय यादव के साथ हुई थी। अपने साले की हत्या हो जाने के बाद विनय ने उसकी बीवी की दूसरी शादी अपने छोटे भाई राम आसरे से करा दी। बताते हैं कि घटना के बाद राजेश एवं उसके परिजनों ने मटरू की करीब 35 बीघा जमीन पर कब्जा कर लिया। जमीन मटरू की मां एवं पूर्व प्रधान शांति देवी के नाम बताई जा रही है। जिसकी कीमत लाखों में है। अपनी सास के नाम पैतृक संपत्ति पर राजेश का कब्जा होने के कारण विनय एवं राम आसरे बेचैन हो गए। उसकी इस जमीन पर लंबे समय से निगाह थी। लेकिन राजेश के भय से वे कुछ करने में खुद को असमर्थ पा रहे थे। राजेश उनकी निगाहों में वर्षों से खटक रहा था। उसके चलते वह अपने मंसूबों में सफल नहीं हो पा रहे थे। पुलिस सूत्रों की मानें तो इधर ब्लाक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आने के बाद अच्छा मौका देखकर राम आसरे ने अपने साथियों एवं रिश्तेदार के साथ राजेश को रास्ते से हटाने की योजना बना डाली। उनकी मंशा थी कि राजेश जब नहीं रहेगा तो जमीन पर कब्जा आसानी से हो जाएगा और मटरू के हत्या का बदला भी ले लिया जाएगा।
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घटना के दिन सटीक हुई थी मुखबिरी
बताते हैं कि घटना के दिन राजेश यादव की एक-एक पल की मुखबिरी हो रही थी। राजेश घटना के दिन खुद गाड़ी चलाकर भागलपुर जा रहे थे। देवसिया गांव के पास चालक कोमल ने उनसे गाड़ी चलाने के लिए ले ली। पुलिस सूत्रों की मानें तो मुुखबिर ने बदमाशों को बताया था कि गाड़ी खुद राजेश चला रहा है। इसलिए घटना के समय बदमाशों ने कोमल को राजेश समझा और उसे टारगेट पर ले लिया। बाद में राजेश के असलहा निकालने पर बदमाशों ने उस पर भी गोली दाग दी।
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घटना के विरोध में दुकानें बंद रही
बीडीसी सदस्य राजेश यादव पर जानलेवा हमला और चालक कोमल यादव की हत्या के विरोध में सोमवार को भागलपुर की सभी दुकानें बंद रहीं। दुकानदारों ने घटना के प्रति रोष जताया। व्यापारियाें ने नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। व्यापारियों ने कहा कि चौराहे पर दिनदहाड़े इस वारदात से दहशत व्याप्त हो गई। व्यापारियों ने मामले में निष्पक्ष जांच और चौराहे पर पुलिस पिकेट का इंतजाम करने की मांग की। मांग करने वालों में रोशन यादव, राजेश्वर जायसवाल, शंभू सिंह, सुनील मद्धेशिया, भरत तिवारी आदि शामिल रहे।