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34 जिला पंचायत सदस्यों ने अध्यक्ष के खिलाफ खोला मोर्चा
Updated Tue, 22 May 2018 10:49 PM IST
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जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ जिलाधिकारी को जिला पंचायत सदस्यो ने अविश्वास प्रस्ताव सौपा।
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। जिला पंचायत अध्यक्ष रामप्रवेश यादव के खिलाफ 34 जिला पंचायत लामबंद हो गए हैं। मंगलवार को डीएम से मिलकर अविश्वास प्रस्ताव के लिए नोटिस दिया। कई महिला सदस्यों के प्रतिनिधि पहुंचे थे। इसकी वजह से करीब 20 सदस्यों के प्रतिनिधि पहुंचे थे। सभी सदस्यों को सामने हस्ताक्षर के लिए बुधवार को चार बजे डीएम ने दुबारा बुलाया है।
दीपक का अपहरण कर करोड़ों की प्रापर्टी बैनामा कराने वाले आरोपी जिला पंचायत अध्यक्ष रामप्रवेश यादव एक मई से फरार चल रहा है। जिला पंचायत सदस्यों का एक खेमा अविश्वास लाने की कोशिश में कई दिनों से जिला पंचायत सदस्यों से संपर्क कर रहा था। मंगलवार की शाम 4.45 बजे 34 जिला पंचायत सदस्य डीएम के यहां पहुंचे। अविश्वास के लिए नोटिस दिया। इसमें महिला जिला पंचायत सदस्यों की जगह उनके प्रतिनिधि पहुंचे थे। इसकी वजह से इनका डीएम के सामने हस्ताक्षर नहीं हो सका। इसका नेतृत्व सपा के जिलाध्यक्ष रामइकबाल यादव के बेटे अजय यादव कर रहे थे। हस्ताक्षर सहित नोटिस मिलने के बाद डीएम ने जांच की तो मौके पर करीब 20 सदस्यों के प्रतिनिधि मौजूद थे। इसे मानने से डीएम ने इन्कार कर दिया और बुधवार की शाम चार बजे सभी सदस्यों को बुलाने और सामने हस्ताक्षर कराने का निर्देश दिया है। साथ में आधार कार्ड भी लेकर आना अनिवार्य है। सदस्यों ने कहा कि अध्यक्ष की कार्यशैली से जिले के प्रथम नागरिक की कुर्सी दागदार हो गई है, जो इस कुर्सी पर बैठने लायक नहीं रहा गया। डीएम सुजीत कुमार ने बताया कि 34 सदस्यों ने अविश्वास के लिए नोटिस दिया है। इसमें कई सदस्य नहीं आए थे। इस लिए दुबारा चार बजे सदस्यों को हस्ताक्षर के लिए बुलाया गया है। इसके बाद अविश्वास के लिए तिथि तय की जाएगी।
अविश्वास के लिए 29 सदस्यों की जरूरत
जिले में 56 जिला पंचायत सदस्य है। अविश्वास के लिए 29 की जरूरत है। लेकिन 34 सदस्य अध्यक्ष रामप्रवेश यादव के खिलाफ लामबंद हो गए हैं और अविश्वास के लिए अपना समर्थन दे दिया है। वहीं फरार चल रहे अध्यक्ष रामप्रवेश के समर्थक लामबंद हुए सदस्यों को तोड़ने के लिए जोड़ तोड़ में लगे हैं। अब यह देखना है कि ऊंट किस करवट बैठता है।
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कौन बनेगा अध्यक्ष रहस्य बरकरार
जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए जिलाध्यक्ष रामइकबाल यादव के बेटे अजय यादव, गिरेंद्र यादव और वीरेंद्र यादव सपा से टिकट मांग रहे थे। लेकिन इन राजनीतिक धुरंधरों पर रामप्रवेश यादव भारी पड़ा। प्रशासन के दबाव की वजह से रामप्रवेश के अलावा किसी ने जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए पर्चा तक नहीं खरीदा। गिरेंद्र यादव पर्चा खरीदने का प्रयास किए तो पुलिस इनके घर व ईट भट्ठे पर छापामारी शुरू कर दी। इस कारण बबलू निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए। इन दिनों सभी धुरंधर एक हुए है और कौन अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठेगा अभी तस्वीर साफ नहीं है। अविश्वास आने के बाद पता चलेगा।
प्रशासन नियुक्त करने के लिए नहीं आया आदेश
अध्यक्ष रामप्रवेश यादव के फरार होने से जिला पंचायत का विकास कार्य ठप पड़ा है। ठेकेदारों का डंप पड़े करोड़ों रुपये का जहां भुगतान नहीं हो रहा है। वहीं कर्मचारियों का वेतन फंसा है। डीएम ने इसका हवाला देते हुए दस दिन पूर्व शासन को पत्र भेजकर प्रशासक नियुक्त करने के लिए मार्गदर्शन मांगा था। दुबारा रिमाइंडर भी इसका भेजा गया। लेकिन अभी तक शासन की ओर से कोई जवाब नहीं आ सका।
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दीपक का अपहरण कर करोड़ों की प्रापर्टी बैनामा कराने वाले आरोपी जिला पंचायत अध्यक्ष रामप्रवेश यादव एक मई से फरार चल रहा है। जिला पंचायत सदस्यों का एक खेमा अविश्वास लाने की कोशिश में कई दिनों से जिला पंचायत सदस्यों से संपर्क कर रहा था। मंगलवार की शाम 4.45 बजे 34 जिला पंचायत सदस्य डीएम के यहां पहुंचे। अविश्वास के लिए नोटिस दिया। इसमें महिला जिला पंचायत सदस्यों की जगह उनके प्रतिनिधि पहुंचे थे। इसकी वजह से इनका डीएम के सामने हस्ताक्षर नहीं हो सका। इसका नेतृत्व सपा के जिलाध्यक्ष रामइकबाल यादव के बेटे अजय यादव कर रहे थे। हस्ताक्षर सहित नोटिस मिलने के बाद डीएम ने जांच की तो मौके पर करीब 20 सदस्यों के प्रतिनिधि मौजूद थे। इसे मानने से डीएम ने इन्कार कर दिया और बुधवार की शाम चार बजे सभी सदस्यों को बुलाने और सामने हस्ताक्षर कराने का निर्देश दिया है। साथ में आधार कार्ड भी लेकर आना अनिवार्य है। सदस्यों ने कहा कि अध्यक्ष की कार्यशैली से जिले के प्रथम नागरिक की कुर्सी दागदार हो गई है, जो इस कुर्सी पर बैठने लायक नहीं रहा गया। डीएम सुजीत कुमार ने बताया कि 34 सदस्यों ने अविश्वास के लिए नोटिस दिया है। इसमें कई सदस्य नहीं आए थे। इस लिए दुबारा चार बजे सदस्यों को हस्ताक्षर के लिए बुलाया गया है। इसके बाद अविश्वास के लिए तिथि तय की जाएगी।
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अविश्वास के लिए 29 सदस्यों की जरूरत
जिले में 56 जिला पंचायत सदस्य है। अविश्वास के लिए 29 की जरूरत है। लेकिन 34 सदस्य अध्यक्ष रामप्रवेश यादव के खिलाफ लामबंद हो गए हैं और अविश्वास के लिए अपना समर्थन दे दिया है। वहीं फरार चल रहे अध्यक्ष रामप्रवेश के समर्थक लामबंद हुए सदस्यों को तोड़ने के लिए जोड़ तोड़ में लगे हैं। अब यह देखना है कि ऊंट किस करवट बैठता है।
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कौन बनेगा अध्यक्ष रहस्य बरकरार
जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए जिलाध्यक्ष रामइकबाल यादव के बेटे अजय यादव, गिरेंद्र यादव और वीरेंद्र यादव सपा से टिकट मांग रहे थे। लेकिन इन राजनीतिक धुरंधरों पर रामप्रवेश यादव भारी पड़ा। प्रशासन के दबाव की वजह से रामप्रवेश के अलावा किसी ने जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए पर्चा तक नहीं खरीदा। गिरेंद्र यादव पर्चा खरीदने का प्रयास किए तो पुलिस इनके घर व ईट भट्ठे पर छापामारी शुरू कर दी। इस कारण बबलू निर्विरोध अध्यक्ष चुने गए। इन दिनों सभी धुरंधर एक हुए है और कौन अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठेगा अभी तस्वीर साफ नहीं है। अविश्वास आने के बाद पता चलेगा।
प्रशासन नियुक्त करने के लिए नहीं आया आदेश
अध्यक्ष रामप्रवेश यादव के फरार होने से जिला पंचायत का विकास कार्य ठप पड़ा है। ठेकेदारों का डंप पड़े करोड़ों रुपये का जहां भुगतान नहीं हो रहा है। वहीं कर्मचारियों का वेतन फंसा है। डीएम ने इसका हवाला देते हुए दस दिन पूर्व शासन को पत्र भेजकर प्रशासक नियुक्त करने के लिए मार्गदर्शन मांगा था। दुबारा रिमाइंडर भी इसका भेजा गया। लेकिन अभी तक शासन की ओर से कोई जवाब नहीं आ सका।