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महिला अस्पताल में नहीं हुआ सीजर, तीमारदारों का हंगामा
Updated Tue, 19 Dec 2017 10:59 PM IST
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महिला अस्पताल की ओटी में सीजर के इंतजार में बैठी महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। दर्द से कराह रहीं गर्भवती महिलाओं को घंटों इंतजार के बाद ऑपरेशन नहीं हुआ। इसकी वजह अचानक सर्जन की नसबंदी कैंप में ड्यूटी लगना बताई जा रही है। इससे नाराज तीमारदारों ने अस्पताल में हंगामा किया। आनन-फानन में घरवाले गर्भवती महिलाओं को निजी अस्पतालों में ले गए।
जनपद के इकलौते महिला अस्पताल का बुरा हाल है। किसी तरह ओपीडी में आने वाली महिलाओं का इलाज हो रहा है, लेकिन ऑपरेशन का कार्य चार दिनों से प्रभावित है। इसका खामियाजा अस्पताल में ऑपरेशन के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है। मंगलवार को देसही ब्लॉक के दिघवा पवटवा गांव की संगीता, लार ब्लॉक के सजांव गांव निवासी संध्या देवी, मागा कोरड़ा गांव निवासी वंदना देवी, रामपुर लाला गांव निवास आरती देवी, तवकलपुर गांव की रोशनी खातून ऑपरेशन कराने के इंतजार में अपने घरवालों के साथ बैठी थीं। ड्यूटी पर तैनात डॉ. अल्पना रानी की ड्यूटी थी। उन्होंने गर्भवती महिलाओं को ऑपरेशन करने का आश्वासन दिया था। अचानक 10 बजे सीएमओ कार्यालय से पत्र आया और इनकी ड्यूटी नसबंदी कैंप में लगा दी गई। एक घंटे तक इसको लेकर माथापच्ची चला, लेकिन ऑपरेशन नहीं हुआ। दोपहर में इसकी जानकारी जब गर्भवती महिलाओं के घरवालों को हुई तो हंगामा करने लगे। ऑपरेशन के लिए आई गर्भवती महिलाएं दर्द से परेशान थी। घरवालों का आरोप है कि शुक्रवार से महिला अस्पताल में ऑपरेशन नहीं हो रहा है। डॉक्टर और कर्मचारी अगले दिन आने की बात कह रहे हैं। इस बाबत प्रभारी सीएमएस डॉ. एसके सिन्हा ने बताया कि अस्पताल में गायनी सर्जन सिर्फ दो हैं। यहीं लोग ऑपरेशन करती हैं। सीएमओ कार्यालय से इनकी ड्यूटी राष्ट्रीय कार्यक्रमों और नसबंदी में लगा दी जाती है। इसके चलते ऑपरेशन कार्य प्रभावित हो रहा है।
नौ डॉक्टरों की है तैनाती, अटैच डॉक्टर करतीं हैं मनमानी
महिला अस्पताल मेें दो गायनी सर्जन डॉ. अल्पना रानी और श्वेता मिश्रा की तैनाती है। इसके अलावा डॉ. पूनम बाला, डॉ. दीपा गुप्ता, डॉ. प्रियंबदा मौर्या को अटैच किया गया है। इसमें एक डॉक्टर प्रशिक्षण पर हैं और दो छुट्टी पर हैं। वहीं सीएमएस माला सिन्हा, सतीश सिन्हा, रीता सिंह आंचल गुप्ता की तैनाती है। लेकिन डॉक्टरों की मनमानी के चलते महिला अस्पताल की व्यवस्था लड़खड़ाती जा रही है।
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जनपद के इकलौते महिला अस्पताल का बुरा हाल है। किसी तरह ओपीडी में आने वाली महिलाओं का इलाज हो रहा है, लेकिन ऑपरेशन का कार्य चार दिनों से प्रभावित है। इसका खामियाजा अस्पताल में ऑपरेशन के लिए आने वाली गर्भवती महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है। मंगलवार को देसही ब्लॉक के दिघवा पवटवा गांव की संगीता, लार ब्लॉक के सजांव गांव निवासी संध्या देवी, मागा कोरड़ा गांव निवासी वंदना देवी, रामपुर लाला गांव निवास आरती देवी, तवकलपुर गांव की रोशनी खातून ऑपरेशन कराने के इंतजार में अपने घरवालों के साथ बैठी थीं। ड्यूटी पर तैनात डॉ. अल्पना रानी की ड्यूटी थी। उन्होंने गर्भवती महिलाओं को ऑपरेशन करने का आश्वासन दिया था। अचानक 10 बजे सीएमओ कार्यालय से पत्र आया और इनकी ड्यूटी नसबंदी कैंप में लगा दी गई। एक घंटे तक इसको लेकर माथापच्ची चला, लेकिन ऑपरेशन नहीं हुआ। दोपहर में इसकी जानकारी जब गर्भवती महिलाओं के घरवालों को हुई तो हंगामा करने लगे। ऑपरेशन के लिए आई गर्भवती महिलाएं दर्द से परेशान थी। घरवालों का आरोप है कि शुक्रवार से महिला अस्पताल में ऑपरेशन नहीं हो रहा है। डॉक्टर और कर्मचारी अगले दिन आने की बात कह रहे हैं। इस बाबत प्रभारी सीएमएस डॉ. एसके सिन्हा ने बताया कि अस्पताल में गायनी सर्जन सिर्फ दो हैं। यहीं लोग ऑपरेशन करती हैं। सीएमओ कार्यालय से इनकी ड्यूटी राष्ट्रीय कार्यक्रमों और नसबंदी में लगा दी जाती है। इसके चलते ऑपरेशन कार्य प्रभावित हो रहा है।
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नौ डॉक्टरों की है तैनाती, अटैच डॉक्टर करतीं हैं मनमानी
महिला अस्पताल मेें दो गायनी सर्जन डॉ. अल्पना रानी और श्वेता मिश्रा की तैनाती है। इसके अलावा डॉ. पूनम बाला, डॉ. दीपा गुप्ता, डॉ. प्रियंबदा मौर्या को अटैच किया गया है। इसमें एक डॉक्टर प्रशिक्षण पर हैं और दो छुट्टी पर हैं। वहीं सीएमएस माला सिन्हा, सतीश सिन्हा, रीता सिंह आंचल गुप्ता की तैनाती है। लेकिन डॉक्टरों की मनमानी के चलते महिला अस्पताल की व्यवस्था लड़खड़ाती जा रही है।
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