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दो महिलाओं की चोटी कटी
Updated Mon, 07 Aug 2017 11:00 PM IST
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रामलक्षन/पकड़ी बाजार। क्षेत्र में चोटी कटने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार को चौहटा वार्ड में एक महिला की चोटी कटने के बाद सोमवार को रामलक्षन और पकड़ी बाजार क्षेत्र में भी दो महिलाओं की चोटी कट गई। ठाकुरदेवा गांव के रहने वाले रवि राजभर की पत्नी संगीता देवी ने बताया कि वह रात में छत पर सो रही थी कि किसी ने उनकी चोटी काट ली। वहीं लक्ष्मीपुर में श्रीराम टोले के दुर्गा प्रसाद की पत्नी मोना की सोमवार को दिन में तीन बजे चोटी कट गई। चोटी कटने से आहत मोना अचेत हो गई। उसका इलाज निजी चिकित्सालय में हुआ। चोटी कटने घटना की अफवाह तेजी से फैल रही है। लोग इससे बचने को तरह तरह का टोटका आजमाने लगे हैं। दोनों घटनाओं में पुलिस मौके पर पहुंच कर लोगों को अफवाहों से बचने की नसीहत दी। इस बाबत सीओ ब्रजेंद्र राय ने कहा कि शरारतीतत्व सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाएं फैला रहे हैं। पुलिस इस तरह का अफवाह फैलाने वालों को चिन्हित कर कार्रवाई करने जा रही है।
हर बार जानलेवा साबित हुई अफवाहें
धरकोसवा, मुंहनोचवा के बाद चोटिकटवा का खौफ
रुद्रपुर में चोटी बचाने को शुरू हो गया टोटका
सुरेंद्र वत्स
रुद्रपुर। अफवाहों के पीछे लोगों को ‘लकीर का फकीर’ बनना आम बात हो गई है। कई बार जानलेवा साबित होने के बाद भी लोग अफवाहों से सबक नही लेते। पूर्वांचल में धरकोसवा, मुंहनोचवा के बाद अब चोटिकटवा का खौफ पसरा है। चोटी बचाने को महिलाएं तरह-तरह का टोटका आजमाने लगी हैं। लोग सोखा-ओझा और मुल्ला-मौलवी की शरण में जा रहे हैं। रुद्रपुर में चोटी कटने की घटना के बाद लोग घरों पर हल्दी से हाथ का थप्पा और दरवाजे पर नीम की डाली टांग रहे हैं।
यहां का अफवाहों से पुराना नाता रहा है। अस्सी के दशक में धरकोसवा का खौफ लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा था। तब धरकोसवा छोटे बच्चों को शिकार बनाता था। वह बच्चों को झोली में लेकर भाग जाता था। नब्बे के दशक में पूर्वांचल में बुढ़िया के प्याज मांगने की चरचा थी। कहते हैं कि बुढ़िया जिस घर में प्याज मांगने चली जाती उस घर में कोई न कोई अनिष्ट होना तय था। धरकोसवा के चक्कर में कई राहगीरों को भीड़ का शिकार होना पड़ा था। लोग टोली बनाकर धरकोसवा को पकड़ने के लिए रातभर जागते थे। प्याज मांगने वाली बुढ़िया और धरकोसवा के अफवाह में कुछ बुजुर्ग विक्षिप्तों की जान चली गई। 2001 में दिल्ली से उठी ‘मंकी मैन’ की अफवाह पूर्वांचल में आकर मुंहनोचवां बन गई। चेहरे पर नाखून मारने का खौफ हर तरफ तारी था। मुंहनोचवा के डर से कई महिलाएं छत से कूद गईं। कई गांवों में मुंहनोचवा के भ्रम में राहगीरों की पिटाई हो गई। पुलिस प्रशासन के जांच-पड़ताल के बाद मंकी मैन, मुंहनोचवा, धरकोसवा सब कपोल कल्पित साबित हुए। फिर भी लोगों के अफवाहों के पीछे भागने की लत नहीं छूटी।
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हर बार जानलेवा साबित हुई अफवाहें
धरकोसवा, मुंहनोचवा के बाद चोटिकटवा का खौफ
रुद्रपुर में चोटी बचाने को शुरू हो गया टोटका
सुरेंद्र वत्स
रुद्रपुर। अफवाहों के पीछे लोगों को ‘लकीर का फकीर’ बनना आम बात हो गई है। कई बार जानलेवा साबित होने के बाद भी लोग अफवाहों से सबक नही लेते। पूर्वांचल में धरकोसवा, मुंहनोचवा के बाद अब चोटिकटवा का खौफ पसरा है। चोटी बचाने को महिलाएं तरह-तरह का टोटका आजमाने लगी हैं। लोग सोखा-ओझा और मुल्ला-मौलवी की शरण में जा रहे हैं। रुद्रपुर में चोटी कटने की घटना के बाद लोग घरों पर हल्दी से हाथ का थप्पा और दरवाजे पर नीम की डाली टांग रहे हैं।
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यहां का अफवाहों से पुराना नाता रहा है। अस्सी के दशक में धरकोसवा का खौफ लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा था। तब धरकोसवा छोटे बच्चों को शिकार बनाता था। वह बच्चों को झोली में लेकर भाग जाता था। नब्बे के दशक में पूर्वांचल में बुढ़िया के प्याज मांगने की चरचा थी। कहते हैं कि बुढ़िया जिस घर में प्याज मांगने चली जाती उस घर में कोई न कोई अनिष्ट होना तय था। धरकोसवा के चक्कर में कई राहगीरों को भीड़ का शिकार होना पड़ा था। लोग टोली बनाकर धरकोसवा को पकड़ने के लिए रातभर जागते थे। प्याज मांगने वाली बुढ़िया और धरकोसवा के अफवाह में कुछ बुजुर्ग विक्षिप्तों की जान चली गई। 2001 में दिल्ली से उठी ‘मंकी मैन’ की अफवाह पूर्वांचल में आकर मुंहनोचवां बन गई। चेहरे पर नाखून मारने का खौफ हर तरफ तारी था। मुंहनोचवा के डर से कई महिलाएं छत से कूद गईं। कई गांवों में मुंहनोचवा के भ्रम में राहगीरों की पिटाई हो गई। पुलिस प्रशासन के जांच-पड़ताल के बाद मंकी मैन, मुंहनोचवा, धरकोसवा सब कपोल कल्पित साबित हुए। फिर भी लोगों के अफवाहों के पीछे भागने की लत नहीं छूटी।
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