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तालाब में डूबने से मजदूर की मौत
Updated Sun, 27 Aug 2017 12:48 AM IST
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मेहरौनाघाट। तालाब में मछली पकड़ने के दौरान डूबने से एक मजदूर की मौत हो गई। घटना से मृतक के घरवालों में कोहराम मच गया। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को तालाब से बाहर निकलवाया। घरवालों ने पीएम कराने से इंकार करते हुुुए शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
लार क्षेत्र के ठाकुर गौरी के डीह टोला निवासी हीरा राजभर का तीस वर्षीय बेटा सुरेश राजभर शनिवार सुबह रोपन छपरा गांव के तालाब में मछली पकड़ रहा था। इस दौरान वह गहरे पानी में चला गया और डूब गया। वहां मौजूद लोगों ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। सूचना मिलते ही घटनास्थल पर गांव वालों की भीड़ जुट गई। पुलिस ने मछुुआरों की मदद से शव को बाहर निकलवाया और पीएम के लिए शव को कब्जे में ले लिया। घरवाले पीएम कराने को राजी नहीं हुए। इसके बाद पुलिस ने पंचनामा कराकर शव घरवालों को सौंप दिया। पति की मौत से आहत पत्नी पूजा दहाड़े मारकर रो रही थी। बेटी सपना, बेेटा अंश व दीपू के सिर से पिता का साया उठ गया। एसओ भीष्मपाल सिंह ने बताया कि घरवालों की सहमति से शव को सौंप दिया गया।
पिता के सामने उठी बेटे की अर्थी
मेहरौनाघाट। बड़े बेटे की मौत से पिता हीरा और उसकी पत्नी सदमें हैं। जिस बेटे के कंधे पर पिता की अर्थी उठनी चाहिए। वहीं पिता को बेटे की अर्थी को अपने कंघे पर उठाना पड़ा। छोटा बेटा सुरेश मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करता था।
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लार क्षेत्र के ठाकुर गौरी के डीह टोला निवासी हीरा राजभर का तीस वर्षीय बेटा सुरेश राजभर शनिवार सुबह रोपन छपरा गांव के तालाब में मछली पकड़ रहा था। इस दौरान वह गहरे पानी में चला गया और डूब गया। वहां मौजूद लोगों ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। सूचना मिलते ही घटनास्थल पर गांव वालों की भीड़ जुट गई। पुलिस ने मछुुआरों की मदद से शव को बाहर निकलवाया और पीएम के लिए शव को कब्जे में ले लिया। घरवाले पीएम कराने को राजी नहीं हुए। इसके बाद पुलिस ने पंचनामा कराकर शव घरवालों को सौंप दिया। पति की मौत से आहत पत्नी पूजा दहाड़े मारकर रो रही थी। बेटी सपना, बेेटा अंश व दीपू के सिर से पिता का साया उठ गया। एसओ भीष्मपाल सिंह ने बताया कि घरवालों की सहमति से शव को सौंप दिया गया।
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पिता के सामने उठी बेटे की अर्थी
मेहरौनाघाट। बड़े बेटे की मौत से पिता हीरा और उसकी पत्नी सदमें हैं। जिस बेटे के कंधे पर पिता की अर्थी उठनी चाहिए। वहीं पिता को बेटे की अर्थी को अपने कंघे पर उठाना पड़ा। छोटा बेटा सुरेश मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करता था।
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