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Deoria News: शहर से गांव तक हर रोज बिक रहा 80 हजार लीटर पानी

Sun, 28 Dec 2025 11:58 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 28 Dec 2025 11:58 PM IST
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80,000 liters of water is being sold daily from city to village.
सड़क पर जार में आरो पानी भरता प्लांट कर्मी, फोटो
देवरिया। जिले के 17 शहरी और 1122 ग्राम पंचायतों में हर दिन करीब 80 हजार लीटर पानी आरओ प्लांटों के जरिए बेचा जा रहा है। यह स्थिति तब है जबकि अधिकांश जगहों पर पानी की सप्लाई के लिए पाइपलाइन बिछाई गई है। फिर भी शुद्ध पानी के लिए लोग इन आरओ प्लांट पर ही निर्भर हैं। दिक्कत यह है कि इनमें से किसी आरओ प्लांट के पानी की शुद्धता की जांच ही नहीं होती है। लोगों को यह भी नहीं पता कि जो पानी वह खरीदकर पी रहे हैं, उसका टीडीएस (टोटल डिजॉल्व सॉलिड) कितना है, जबकि यह टीडीएस ही पानी की गुणवत्ता का मानक है।
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जिले में हर साल बड़ी संख्या में लोग जल जनित बीमारियों की चपेट में आते हैं। पेचिस, टाइफाइड समेत कई बीमारियां केवल दूषित पेयजल की वजह से ही होती हैं। पिछले कुछ सालों में स्वास्थ्य विभाग की तरफ से लगातार स्वच्छ पेयजल को लेकर जागरूकता अभियान चलाया गया है। स्कूली बच्चों से लेकर बुजुर्गों को शुद्ध पानी का महत्व समझाया जा रहा है। इसका असर यह हुआ है कि लोग अब पानी के लिए पैसा खर्च करने लगे हैं, लेकिन उनकी यह चाह पूरी नहीं हो रही।
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शुद्ध पेयजल की आपूर्ति के नाम पर शहर की गलियों को खोदकर पाइपलाइन बिछा दी गई। घर-घर नल से पानी पहुंचा दिया गया। नगर पंचायतों के अलावा गांवों तक में घर-घर पानी का कनेक्शन देने की कवायद चल रही है। इन सबके बीच आरओ वाटर सप्लाई का कारोबार तेजी पर है। लोग पाइपलाइन से आने वाले पानी की जगह आरओ वाटर प्लांटों पर भरोसा कर रहे हैं। इनकी सप्लाई शहर के घरों से लेकर दुकानों और कार्यालयों तक है। अकेले देवरिया शहर में करीब 20 से अधिक आरओ वाटर प्लांट अलग-अलग मोहल्लों में पानी सप्लाई करते हैं। कुछ आरओ प्लांट संचालक पानी की बड़ी टंकी को लोडर पर रखकर ग्राहक के घर के सामने जाकर आपूर्ति देते हैं। वहीं कुछ लोग स्वयं भी आरओ प्लांट पर जाकर जार में भरकर पानी ले आते हैं। औसतन एक सप्लायर 200 जार प्रतिदिन आपूर्ति देता है। एक जार के पानी कीमत 20 रुपये है। इस हिसाब से हर दिन जिले भर में 16 लाख रुपये के पानी बिक रहे हैं। महीने भर का आंकड़ा चार करोड़ 80 लाख और साल का लगभग 58 करोड़ रुपये पानी पर खर्च हो रहे हैं। इसके बावजूद लोग अशुद्ध पानी पीकर बीमार हो रहे हैं।
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फिल्टर खोलकर करते हैं आपूर्ति
आरओ प्लांट संचालक प्रति लीटर एक रुपये की दर से पानी बेच रहे हैं। इसके बाद भी कई जगह इनके बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा होती है। ऐसी स्थिति में वे रेट कम कर देते हैं। आरओ संचालक अंश मद्धेशिया ने बताया कि पानी शुद्ध करने में सबसे अधिक खर्च फिल्टर पर आता है। अच्छी क्वालिटी के फिल्टर की कीमत करीब 2200 रुपये है। हर छह महीने में एक बार फिल्टर बदलना होता है। एक हजार लीटर पानी को शुद्ध करने में चार घंटे का समय लगता है। कुछ आरओ प्लांट संचालक खपत घटाने के लिए फिल्टर को साल भर में एक बार ही बदलते हैं। वहीं कुछ ऐसे भी हैं जो लगन के सीजन में मांग बढ़ने पर फिल्टर ही निकालकर अलग कर देते हैं। फिल्टर हटाने पर बोरिंग का पानी सीधे टंकी में भरते हैं और उसे ही सप्लाई कर दिया जाता है।
जांच के लिए कोई विभाग नहीं है जिम्मेदार
आरओ वाटर प्लांट से होने वाले पानी की सप्लाई की जांच कोई विभाग नहीं करता है। जल निगम से लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग तक को इसकी कोई चिंता नहीं है। न ही किसी विभाग पर इसकी जवाबदेही है। जल निगम शहरी के अधिशासी अभियंता अनूप सिंह ने बताया कि अगर कोई व्यक्ति या संस्था पानी की जांच कराना चाहता है तो वह जल निगम के लैब में सैंपल देकर जांच करा सकता है। निगम स्वयं पहल कर जांच नहीं करता है। वहीं खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजीव मिश्र का कहना है कि खुले आरओ वाटर की सप्लाई हमारे जांच की परिधि में नहीं आता है। इसके लिए नियम नहीं है। कोई बोतलबंद पानी बेच रहा तो उसकी हम जांच करते हैं।

200 से कम टीडीएस का पानी है खतरनाक

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आप आरओ का पानी पी रहे हैं तो इस बात का ख्याल रखें कि फिल्टर किए पानी में 200 से 250 मिलीग्राम प्रति लीटर की दर से घुले हुए ठोस पदार्थ शामिल रहें। मतलब यह कि पानी का टीडीएस 200 से 250 के बीच हो। ऐसा करने पर कैल्शियम और मैग्नीशियम सहित सभी आवश्यक खनिजों की सप्लाई शरीर को होती रहेगी। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. रितेश बताते हैं कि कम टीडीएस का पानी पीने से कैल्शियम की कमी हो जाती है, जिससे हड्डियां कमजोर हो जाती हैं।
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