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डीआईजी ने दी शहीद की पत्नी को सांत्वना
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शहीद विजय कुमार मौर्या को सीआरपीएफ के जवानो ने फायरिंग कर गार्ड ऑफ आनर दिया ।
- फोटो : अमर उजाला
देवरिया। शहीद का जब पार्थिव शरीर दरवाजे पर पहुंचा तो तिरंगा लहराते हुए लोगों ने देशभक्ति नारा लगाया। शव के साथ आए सीआरपीएफ प्रयागराज के डीआईजी आर. डुडॉन ने शहीद की मासूम बेटी को पुचकारा और पत्नी को धैर्य से काम लेने की बात कही। रोते हुए विजयलक्ष्मी बोली कि साहब मेरी शादी सिर्फ नौकरी देखकर हुई थी, इनके पास न तो रहने के लिए घर था और न ही जमीन। अब मेरे पास बचा ही क्या है। यह लफ्ज सुनने के बाद डीएम अमित किशोर और साथ में आए सेना के जवान भावुक हो गए। कमरे से जब ताबूत दरवाजे पर पहुंचा तो विजयलक्ष्मी कमरे से बाहर आई और ताबूत से लिपट गईं। सीएम को बुलाने पर अड़ी शहीद की पत्नी किसी अधिकारी को ताबूत छूने नहीं दे रही थीं। गम और गुस्से के बीच लोग ‘विजय अमर रहे’ का नारा लगा रहे थे। विरोध के बीच सेना के जवान और पुलिस वालों ने गार्ड ऑफ ऑनर और सलामी दी। दरवाजे पर पुलिस और नारेबाजी कर रहे युवाओं के बीच कई बार धक्का-मुक्की हुई। नाराजगी को देखते हुए पुलिस बैकफुट पर रही।
जब रो पड़े डीएम
पार्थिव शरीर आने के बाद सेना के जवान, सत्ता पक्ष के नेता और डीएम, एसपी शहीद की पत्नी विजयलक्ष्मी के पास पहुंचे। अफसरों को देख शहीद की पत्नी बिलखने लगीं। पूरा कमरा महिलाओं के करुण क्रंदन से गूंज उठा। यह देख डीएम अमित किशोर रोते हुए विजयलक्ष्मी से हाथ जोड़कर बोले चुप रहो, सब व्यर्थ हो गया और बेटी को गले से लगा लिया।
बेटियों की पढ़ाई का खर्च उठाएंगे विधायक
शहीद की इकलौती बेटी अराध्या को बरहज के विधायक सुरेश तिवारी ने गोद लेने की बात कही। विजयलक्ष्मी से मिलकर उन्होंने कहा कि विजय मौर्य सिर्फ आपके परिवार का नहीं, बल्कि हम लोगों का भी बेटा था। उनकी शहादत पर हमें गर्व है। अराध्या की पढ़ाई का पूरा खर्च मैं उठाऊंगा। इसे डॉक्टर, इंजीनियर चाहे जो कुछ भी बनाना हो, मुझे बताना। वहीं रामपुर कारखाना विधायक कमलेेश शुक्ला ने शहीद के विधवा भाभी के दोनों बेटियों की पढ़ाई का खर्च उठाने की बात कही।
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रेलवे ट्रैक जाम करने वाले 200 लोगों पर केस
शहीद के शहादत पर नाराज लोगों ने शुक्रवार को भटनी-छपरा रेलमार्ग के 115 नंबर रेलवे ट्रैक जाम कर दिया। करीब एक घंटे तक इस रूट पर ट्रेनों का आवागमन ठप रहा। आरपीएफ ने रेलवे बोर्ड के आदेश पर शनिवार को रेल अधिनियम के तहत 200 अज्ञात लोगों पर केस दर्ज किया है।
शहादत पर गर्व, बस कठोर कार्रवाई करे सरकार
शहीद विजय के बड़ा भाई अशोक गुजरात से घर पहुंच गए हैं, लेकिन अभी उनका परिवार नहीं आया है। अशोक ने कहा कि भाई की शहादत पर मुझे गर्व है, लेकिन सरकार को ऐसी घटना के प्रति कठोर कदम उठाना चाहिए। घर में दो विधवा महिलाएं हैं। इनको योग्यता के अनुसार नौकरी दी जाए।
मौत ऐसी ही मिले जो अमर कर दे
आतंकी हमले में शहीद विजय के अंतिम दर्शन के लिए शनिवार को जनसैलाब उमड़ा पड़ा था। हर तरफ विजय की वीरता और शहादत की चर्चा थी। नम आंखों से लोग श्रद्धांजलि दे रहे थे तो शहादत पर फख्र भी जता रहे थे। लोग कहते रहे कि मौत तो एक दिन सबको ही आनी है, लेकिन ऐसी मौत नसीब वालों को मिलती है। विजय हमेशा के लिए अमर हो गए। सबको रुला कर चले गए। यही जीवन तो सार्थक है।
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जब रो पड़े डीएम
पार्थिव शरीर आने के बाद सेना के जवान, सत्ता पक्ष के नेता और डीएम, एसपी शहीद की पत्नी विजयलक्ष्मी के पास पहुंचे। अफसरों को देख शहीद की पत्नी बिलखने लगीं। पूरा कमरा महिलाओं के करुण क्रंदन से गूंज उठा। यह देख डीएम अमित किशोर रोते हुए विजयलक्ष्मी से हाथ जोड़कर बोले चुप रहो, सब व्यर्थ हो गया और बेटी को गले से लगा लिया।
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बेटियों की पढ़ाई का खर्च उठाएंगे विधायक
शहीद की इकलौती बेटी अराध्या को बरहज के विधायक सुरेश तिवारी ने गोद लेने की बात कही। विजयलक्ष्मी से मिलकर उन्होंने कहा कि विजय मौर्य सिर्फ आपके परिवार का नहीं, बल्कि हम लोगों का भी बेटा था। उनकी शहादत पर हमें गर्व है। अराध्या की पढ़ाई का पूरा खर्च मैं उठाऊंगा। इसे डॉक्टर, इंजीनियर चाहे जो कुछ भी बनाना हो, मुझे बताना। वहीं रामपुर कारखाना विधायक कमलेेश शुक्ला ने शहीद के विधवा भाभी के दोनों बेटियों की पढ़ाई का खर्च उठाने की बात कही।
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रेलवे ट्रैक जाम करने वाले 200 लोगों पर केस
शहीद के शहादत पर नाराज लोगों ने शुक्रवार को भटनी-छपरा रेलमार्ग के 115 नंबर रेलवे ट्रैक जाम कर दिया। करीब एक घंटे तक इस रूट पर ट्रेनों का आवागमन ठप रहा। आरपीएफ ने रेलवे बोर्ड के आदेश पर शनिवार को रेल अधिनियम के तहत 200 अज्ञात लोगों पर केस दर्ज किया है।
शहादत पर गर्व, बस कठोर कार्रवाई करे सरकार
शहीद विजय के बड़ा भाई अशोक गुजरात से घर पहुंच गए हैं, लेकिन अभी उनका परिवार नहीं आया है। अशोक ने कहा कि भाई की शहादत पर मुझे गर्व है, लेकिन सरकार को ऐसी घटना के प्रति कठोर कदम उठाना चाहिए। घर में दो विधवा महिलाएं हैं। इनको योग्यता के अनुसार नौकरी दी जाए।
मौत ऐसी ही मिले जो अमर कर दे
आतंकी हमले में शहीद विजय के अंतिम दर्शन के लिए शनिवार को जनसैलाब उमड़ा पड़ा था। हर तरफ विजय की वीरता और शहादत की चर्चा थी। नम आंखों से लोग श्रद्धांजलि दे रहे थे तो शहादत पर फख्र भी जता रहे थे। लोग कहते रहे कि मौत तो एक दिन सबको ही आनी है, लेकिन ऐसी मौत नसीब वालों को मिलती है। विजय हमेशा के लिए अमर हो गए। सबको रुला कर चले गए। यही जीवन तो सार्थक है।