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बोर्ड की बैठक का बहिष्कार, गेट पर जड़ा ताला
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जिला पंचायत के चैनल का ताला बंद कर धरने पर बैठे जिला पंचायत सदस्य।
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। जिला पंचायत अध्यक्ष के अधिकार त्रिस्तरीय समिति की बजाए डीएम को सौंपने पर सदस्य आक्रोशित हो गए। लोकतंत्र की हत्या बताते हुए सदस्यों ने शनिवार को बोर्ड की बैठक का बहिष्कार किया और जिला पंचायत कार्यालय के गेट पर ताला जड़ते हुए धरने पर बैठ गए। एएमए के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। करीब एक घंटे तक तालाबंदी के दौरान वार्ता के लिए आए एएमए से सदस्यों की नोकझोंक भी हुई। कोरम के अभाव में बैठक रद्द करने के एलान के सदस्यों ने ताला खोला। चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, वह बोर्ड की बैठक और जिला पंचायत का संचालन नहीं होने देंगे।
वित्तीय वर्ष 2018-19 के पुनरीक्षित और वर्ष 2019-20 के प्रस्तावित बजट पर मंजूरी के लिए शनिवार को जिला पंचायत बोर्ड की बैठक आयोजित थी। दोपहर 12 बजे से होने वाली बैठक का सदस्यों ने एक स्वर में बहिष्कार कर दिया। वह पहले कार्यालय सामने धरने पर बैठे और फिर दोपहर एक बजे गेट पर ताला जड़ दिया। एएमए पर मनमानी का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की। प्रदर्शन में सत्ताधारी दल से जुड़े भी कई सदस्य शामिल रहे। सदस्यों का कहना था कि अध्यक्ष रामप्रवेश यादव के जेल जाने के बाद से प्रशासक के तौर पर आठ माह से डीएम कार्यभार देख रहे हैं। अब नियमानुसार त्रिस्तरीय कमेटी गठित होनी चाहिए, लेकिन शासन ने फिर से डीएम को ही अध्यक्ष की शक्तियां सौंप दी गई। यह लोकतंत्र का हनन है। तालाबंदी की सूचना पर पहुंचे एएएम उमेश चंद्र पटेल ने वार्ता कर ताला खुलवाने का प्रयास किया तो सदस्य भड़क उठे। एएमए से उनकी तीखी झड़प हुई। दोपहर दो बजे बैठक स्थगित करने के एलान के बाद ताला खोला गया।
त्रिस्तरीय कमेटी गठन तक होगा विरोध
विरोध प्रदर्शन में शामिल सदस्य राजन यादव, अखंड प्रताप सिंह, शकुंतला भारती, कृष्ण मणि तिवारी, शांति देवी, राजेंद्र यादव, धर्मेंद्र सिंह, इंद्रदेव अंबेडकर, मुन्ना प्रसाद, सुभावती देवी, धर्मदेव यादव, उपेंद्र, बुद्धदेव कुमार, कांति सिंह, सावित्री देवी, प्रेमलता सिंह, रानी देवी, सिकंदर यादव, फेकनी, रामप्रकाश आदि का कहना था कि अध्यक्ष की अनुपस्थिति में सदन के संचालन की जिम्मेदारी त्रिस्तरीय कमेटी को मिलनी चाहिए। प्रशासक विशेष परिस्थितियों में चंद दिनों के लिए तैनात होते हैं, मगर यहां लोकतंत्र की हत्या कर पूरा दायित्व ही डीएम को सौंप दिया गया है।
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इन मुद्दों पर होनी थी बैठक
बैठक में सात बिंदुओं पर चर्चा होनी थी। इसमें चार बिंदू महत्वपूर्ण थे। जिला पंचायत के वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए पुनरीक्षित बजट व 2019-20 के प्रस्तावित बजट की स्वीकृति, जिला पंचायत स्वामित्व के भूमि, भवन, गोदाम के मासिक लाइसेंस शुल्क से 25 प्रतिशत बढ़ोत्तरी पर चर्चा, जिला पंचायत सभागार के आरक्षण शुल्क निर्धारित करने पर विचार और पीएमजीएसवाई-तृतीय के अंतर्गत सीयूसी पीएल की सूची के अनुमोदन के प्रस्तावों पर बैठक में चर्चा होनी थी।
मेरी परीक्षा ड्यूटी है, मुझे तो जाने दीजिए
जिला पंचायत कार्यालय परिसर में ही सेल टैक्स, ग्रामोद्योग, आयुर्वेद विभाग के भी ऑफिस हैं। गेट पर करीब एक घंटे तक तालाबंदी के दौरान इन विभागों के अफसर-कर्मचारी अंदर ही फंसे रहे। वह बाहर निकलने के लिए परेशान रहे। एक शिक्षक अपनी परीक्षा ड्यूटी का हवाला देते हुए सदस्यों से गेट खोलने की मिन्नतें करते रहे। उनका कहना था कि अगर समय से नहीं पहुंचे तो कार्रवाई हो जाएगा। कृपया उन्हें जाने दीजिए। उनका तो इस मामले से कोई लेना-देना भी नहीं है। एक अन्य महिला भी गेट खोलने की विनती करती रही। जिला पंचायत की महिला सदस्य अपने पति और बच्चे के साथ अंदर पहुंच गई थी। जब बाहर आना हुआ तो ताला देखकर वह परेशान रही। सदस्य भी उनके अंदर जाने से नाराज थे। बीएसए माधवजी तिवारी, पीडी महेश नारायण पांडेय, डीपीआरओ ओमप्रकाश पांडेय, डीपीओ प्रभात कुमार सहित अन्य विभागों के अफसर भी अंदर ही बंद रहे।
बोर्ड की बैठक कोरम पूरा न होने से स्थगित कर दी गई है। जल्द ही अगली तिथि तय कर ली जाएगी। सदस्यों के सभी आरोप निराधार हैं। वह अपने कार्यों के लिए दबाव बनाना चाहते हैं, लेकिन यहां नियम-कानून को दरकिनार कर कोई काम नहीं किया जाएगा। मामले से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
-उमेश चंद्र पटेल, एएमए, जिला पंचायत
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वित्तीय वर्ष 2018-19 के पुनरीक्षित और वर्ष 2019-20 के प्रस्तावित बजट पर मंजूरी के लिए शनिवार को जिला पंचायत बोर्ड की बैठक आयोजित थी। दोपहर 12 बजे से होने वाली बैठक का सदस्यों ने एक स्वर में बहिष्कार कर दिया। वह पहले कार्यालय सामने धरने पर बैठे और फिर दोपहर एक बजे गेट पर ताला जड़ दिया। एएमए पर मनमानी का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की। प्रदर्शन में सत्ताधारी दल से जुड़े भी कई सदस्य शामिल रहे। सदस्यों का कहना था कि अध्यक्ष रामप्रवेश यादव के जेल जाने के बाद से प्रशासक के तौर पर आठ माह से डीएम कार्यभार देख रहे हैं। अब नियमानुसार त्रिस्तरीय कमेटी गठित होनी चाहिए, लेकिन शासन ने फिर से डीएम को ही अध्यक्ष की शक्तियां सौंप दी गई। यह लोकतंत्र का हनन है। तालाबंदी की सूचना पर पहुंचे एएएम उमेश चंद्र पटेल ने वार्ता कर ताला खुलवाने का प्रयास किया तो सदस्य भड़क उठे। एएमए से उनकी तीखी झड़प हुई। दोपहर दो बजे बैठक स्थगित करने के एलान के बाद ताला खोला गया।
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त्रिस्तरीय कमेटी गठन तक होगा विरोध
विरोध प्रदर्शन में शामिल सदस्य राजन यादव, अखंड प्रताप सिंह, शकुंतला भारती, कृष्ण मणि तिवारी, शांति देवी, राजेंद्र यादव, धर्मेंद्र सिंह, इंद्रदेव अंबेडकर, मुन्ना प्रसाद, सुभावती देवी, धर्मदेव यादव, उपेंद्र, बुद्धदेव कुमार, कांति सिंह, सावित्री देवी, प्रेमलता सिंह, रानी देवी, सिकंदर यादव, फेकनी, रामप्रकाश आदि का कहना था कि अध्यक्ष की अनुपस्थिति में सदन के संचालन की जिम्मेदारी त्रिस्तरीय कमेटी को मिलनी चाहिए। प्रशासक विशेष परिस्थितियों में चंद दिनों के लिए तैनात होते हैं, मगर यहां लोकतंत्र की हत्या कर पूरा दायित्व ही डीएम को सौंप दिया गया है।
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इन मुद्दों पर होनी थी बैठक
बैठक में सात बिंदुओं पर चर्चा होनी थी। इसमें चार बिंदू महत्वपूर्ण थे। जिला पंचायत के वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए पुनरीक्षित बजट व 2019-20 के प्रस्तावित बजट की स्वीकृति, जिला पंचायत स्वामित्व के भूमि, भवन, गोदाम के मासिक लाइसेंस शुल्क से 25 प्रतिशत बढ़ोत्तरी पर चर्चा, जिला पंचायत सभागार के आरक्षण शुल्क निर्धारित करने पर विचार और पीएमजीएसवाई-तृतीय के अंतर्गत सीयूसी पीएल की सूची के अनुमोदन के प्रस्तावों पर बैठक में चर्चा होनी थी।
मेरी परीक्षा ड्यूटी है, मुझे तो जाने दीजिए
जिला पंचायत कार्यालय परिसर में ही सेल टैक्स, ग्रामोद्योग, आयुर्वेद विभाग के भी ऑफिस हैं। गेट पर करीब एक घंटे तक तालाबंदी के दौरान इन विभागों के अफसर-कर्मचारी अंदर ही फंसे रहे। वह बाहर निकलने के लिए परेशान रहे। एक शिक्षक अपनी परीक्षा ड्यूटी का हवाला देते हुए सदस्यों से गेट खोलने की मिन्नतें करते रहे। उनका कहना था कि अगर समय से नहीं पहुंचे तो कार्रवाई हो जाएगा। कृपया उन्हें जाने दीजिए। उनका तो इस मामले से कोई लेना-देना भी नहीं है। एक अन्य महिला भी गेट खोलने की विनती करती रही। जिला पंचायत की महिला सदस्य अपने पति और बच्चे के साथ अंदर पहुंच गई थी। जब बाहर आना हुआ तो ताला देखकर वह परेशान रही। सदस्य भी उनके अंदर जाने से नाराज थे। बीएसए माधवजी तिवारी, पीडी महेश नारायण पांडेय, डीपीआरओ ओमप्रकाश पांडेय, डीपीओ प्रभात कुमार सहित अन्य विभागों के अफसर भी अंदर ही बंद रहे।
बोर्ड की बैठक कोरम पूरा न होने से स्थगित कर दी गई है। जल्द ही अगली तिथि तय कर ली जाएगी। सदस्यों के सभी आरोप निराधार हैं। वह अपने कार्यों के लिए दबाव बनाना चाहते हैं, लेकिन यहां नियम-कानून को दरकिनार कर कोई काम नहीं किया जाएगा। मामले से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है।
-उमेश चंद्र पटेल, एएमए, जिला पंचायत