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ठंड की आहट से कांप रहे बेघर
Updated Mon, 18 Dec 2017 11:59 PM IST
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रामेश्वर लाल तिराहे पर दुकाने के सामने बरामदे मे जमीन पर लेटे मजदूर।
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। कहीं तंबू टांगकर तो कहीं झोपड़ी में रह रहे बेघर लोगों को पूस माह की ठंड भरी रात काटनी मुश्किल हो रही है। ठंड के दस्तक देने से खुले आसमान के नीचे रह रहे लोग ठंड से कांप रहे हैं। इनके पास न तो आशियाना है, न ठंड से बचने के लिए पर्याप्त गर्म कपड़े। आधा दिसंबर बीत गया पर अस्थाई रैन बसेरा बनवाने के लिए किसी को फिक्र नहीं। जिला अस्पताल परिसर में बने रैन बसेरा में सोमवार को भी ताला लटका रहा। ऐसे में तीमारदारों को वार्डों में ही रात काटनी पड़ रही है। जबकि नियम है कि एक मरीज के साथ एक ही तीमारदार वार्ड में रह सकता है।
दो दिन पहले तक मौसम काफी खुशनुमा था। दिन के चटक धूप में हॉफ स्वेटर पहनना मुश्किल था। गर्म कपड़ों का बाजार भी ठंडा पड़ा था। गर्म कपड़ों का स्टॉक नहीं निकलने से दुकानदार परेशान थे। खासकर तिब्बत मार्केट के दुकानदार बिक्री को लेकर बेचैन थे। उन्हें इंतजार था कड़ाके की ठंड का। रविवार को दोपहर के बाद अचानक मौसम ने करवट बदली। धुंध के साथ ही ठंड बढ़ने लगी। रात का मौसम तो और ठंडा गया। ऐसे में खुले आसमान के नीचे रहने वालों की मुश्किलें बढ़ गईं। ठंड से बचने के लिए बेघर लोग रेलवे स्टेशन पहुंच गए। सोमवार की सुबह सूर्य के दर्शन ही नहीं हुए। 11.30 बजे सूर्य के दर्शन हुए। इसके बाद फिर बादलों में छिप गया। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. छोटेलाल ने बताया कि रेडक्रॉस सोसायटी के अध्यक्ष के पास रैन बसेरे की चाबी है। कई बार खोलने के लिए बोला गया है। यदि ठंड में भी नहीं खुला है तो गलत बात है। इस संबंध में सीएमओ से बात की जाएगी।
मजदूर बोले, ठंड से बचाने का हो उपाय
गर्मी को कहीं भी कट जाती है, लेकिन ठंड की रात काटनी किसी पहाड़ पर चढ़ने से कम नहीं है। यह कहना है दूरदराज से आकर शहर में मजदूरी करने वालों का। जलपुरवा के सुरेंद्र मजदूरी करते हैं। उनका कहना है कि गर्मी में कहीं भी रात कट जाती थी। रविवार की रात उनके लिए भारी रही। अचानक ठंड बढ़ने पर रेलवे स्टेशन पर रात गुजारने जाना पड़ा। हर दस मिनट पर आरपीएफ और जीआरपी के जवान आकर परेशान करते थे। पहले ठंड में नगर पालिका मालवीय रोड पर रैन बसेरा बनवाया था, लेकिन इस बार अब तक नहीं बना। सलेमपुर के बिंदवलिया के रहने वाले राजेंद्र भी शहर में रहकर मजदूरी करते हैं। यह भी ठंड की रात से परेशान हैं। राजेंद्र का कहना है कि रैन बसेरा बन जाए तो रात आराम से कट जाएगी। दीपक और राहुल का भी यही दर्द है।
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एक सप्ताह में बन जाएगा रैन बसेरा : अलका
नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष अलका सिंह ने कहा कि ईओ लखनऊ मीटिंग में हैं। उनके आते ही रैन बसेरा बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। एक सप्ताह में मालवीय रोड पर रैन बसेरा बन जाएगा। खुले आसमान के नीचे रहने वालों को ठंड में परेशान नहीं होने दिया जाएगा। नगर पालिका परिषद पर्याप्त व्यवस्था करेगी। उन्होंने कहा कि अलाव मंगलवार से जलने लगेंगे। स्टोर में पहले से लकड़ियां हैं। उन्हीं का उपयोग किया जाएगा। चूंकि नगर पालिका परिषद बोर्ड की अभी बैठक नहीं हुई है, इसलिए नीतिगत फैसले नहीं लिए जा सकते हैं। जनवरी के प्रथम सप्ताह में बोर्ड की पहली बैठक होगी। इसके बाद शहर की समस्याओं का एक-एक कर समाधान किया जाएगा।
अलाव की होगी फोटोग्राफी
नगर पालिका और नगर पंचायतों में ठंड से बचाव के लिए अलाव के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग नहीं हो पाएगा। डीएम सुजीत कुमार ने सभी ईओ को अलाव जलवाने का फोटोग्राफी कराना होगा। प्रतिदिन फोटोग्राफ्स डीएम कार्यालय में भेजना पड़ेगा। डीएम ने देवरिया और बरहज नगर पालिका और नौ नगर पंचायतों में ईओ को स्थान चिह्नित कर अलाव जलवाने का निर्देश जारी किया है। अलाव के लिए इस्तेमाल होने वाली लकड़ी सूखी होनी चाहिए। प्रत्येक दिन रात को जलते हुए अलाव का फोटोग्राफी कराना है। इसमें लापरवाही बरतने वाले ईओ और नगर पंचायत कार्यालय कर्मचारियों पर कार्रवाई तय है।
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दो दिन पहले तक मौसम काफी खुशनुमा था। दिन के चटक धूप में हॉफ स्वेटर पहनना मुश्किल था। गर्म कपड़ों का बाजार भी ठंडा पड़ा था। गर्म कपड़ों का स्टॉक नहीं निकलने से दुकानदार परेशान थे। खासकर तिब्बत मार्केट के दुकानदार बिक्री को लेकर बेचैन थे। उन्हें इंतजार था कड़ाके की ठंड का। रविवार को दोपहर के बाद अचानक मौसम ने करवट बदली। धुंध के साथ ही ठंड बढ़ने लगी। रात का मौसम तो और ठंडा गया। ऐसे में खुले आसमान के नीचे रहने वालों की मुश्किलें बढ़ गईं। ठंड से बचने के लिए बेघर लोग रेलवे स्टेशन पहुंच गए। सोमवार की सुबह सूर्य के दर्शन ही नहीं हुए। 11.30 बजे सूर्य के दर्शन हुए। इसके बाद फिर बादलों में छिप गया। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. छोटेलाल ने बताया कि रेडक्रॉस सोसायटी के अध्यक्ष के पास रैन बसेरे की चाबी है। कई बार खोलने के लिए बोला गया है। यदि ठंड में भी नहीं खुला है तो गलत बात है। इस संबंध में सीएमओ से बात की जाएगी।
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मजदूर बोले, ठंड से बचाने का हो उपाय
गर्मी को कहीं भी कट जाती है, लेकिन ठंड की रात काटनी किसी पहाड़ पर चढ़ने से कम नहीं है। यह कहना है दूरदराज से आकर शहर में मजदूरी करने वालों का। जलपुरवा के सुरेंद्र मजदूरी करते हैं। उनका कहना है कि गर्मी में कहीं भी रात कट जाती थी। रविवार की रात उनके लिए भारी रही। अचानक ठंड बढ़ने पर रेलवे स्टेशन पर रात गुजारने जाना पड़ा। हर दस मिनट पर आरपीएफ और जीआरपी के जवान आकर परेशान करते थे। पहले ठंड में नगर पालिका मालवीय रोड पर रैन बसेरा बनवाया था, लेकिन इस बार अब तक नहीं बना। सलेमपुर के बिंदवलिया के रहने वाले राजेंद्र भी शहर में रहकर मजदूरी करते हैं। यह भी ठंड की रात से परेशान हैं। राजेंद्र का कहना है कि रैन बसेरा बन जाए तो रात आराम से कट जाएगी। दीपक और राहुल का भी यही दर्द है।
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एक सप्ताह में बन जाएगा रैन बसेरा : अलका
नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष अलका सिंह ने कहा कि ईओ लखनऊ मीटिंग में हैं। उनके आते ही रैन बसेरा बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। एक सप्ताह में मालवीय रोड पर रैन बसेरा बन जाएगा। खुले आसमान के नीचे रहने वालों को ठंड में परेशान नहीं होने दिया जाएगा। नगर पालिका परिषद पर्याप्त व्यवस्था करेगी। उन्होंने कहा कि अलाव मंगलवार से जलने लगेंगे। स्टोर में पहले से लकड़ियां हैं। उन्हीं का उपयोग किया जाएगा। चूंकि नगर पालिका परिषद बोर्ड की अभी बैठक नहीं हुई है, इसलिए नीतिगत फैसले नहीं लिए जा सकते हैं। जनवरी के प्रथम सप्ताह में बोर्ड की पहली बैठक होगी। इसके बाद शहर की समस्याओं का एक-एक कर समाधान किया जाएगा।
अलाव की होगी फोटोग्राफी
नगर पालिका और नगर पंचायतों में ठंड से बचाव के लिए अलाव के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग नहीं हो पाएगा। डीएम सुजीत कुमार ने सभी ईओ को अलाव जलवाने का फोटोग्राफी कराना होगा। प्रतिदिन फोटोग्राफ्स डीएम कार्यालय में भेजना पड़ेगा। डीएम ने देवरिया और बरहज नगर पालिका और नौ नगर पंचायतों में ईओ को स्थान चिह्नित कर अलाव जलवाने का निर्देश जारी किया है। अलाव के लिए इस्तेमाल होने वाली लकड़ी सूखी होनी चाहिए। प्रत्येक दिन रात को जलते हुए अलाव का फोटोग्राफी कराना है। इसमें लापरवाही बरतने वाले ईओ और नगर पंचायत कार्यालय कर्मचारियों पर कार्रवाई तय है।