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Deoria News: 33 लाख का एमआरएफ सेंटर बना शोपीस
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-आपूर्ति के अभाव में बंद पड़ी कूड़ा संग्रह की मशीनें
संवाद न्यूज एजेंसी
सलेमपुर। लार में बना मैटेरियल रिकवरी सेंटर बेमतलब साबित हो रहा है। बनने के एक वर्ष बाद भी बिजली के अभाव में कूड़ा संग्रह करने वाली मशीनें बंद पड़ी हैं, जिससे कूड़ा एकत्र नहीं हो पा रहा है। जबकि नगर पंचायत प्रशासन का कहना है कि अभी कूड़ा इतना नहीं आ रहा है, जिससे मशीनों की जरुरत पड़े।
शासन के निर्देश पर लार नगर पंचायत ने चौरडीहा गांव के समीप 33 लाख की लागत से एक वर्ष पहले मैटेरियल रिकवरी फैसेलिटी सेंटर बनाया था। अब प्रतिदिन वार्डों से निकलने वाले सूखे व गीले कचरे को वाहनों के माध्यम से सफाई कर्मचारी पहुंचाते हैं। यहां मौजूद कर्मचारी कचरे से निकलने वाले लोहा, टीन, सीसा, प्लास्टिक, पालीथीन सहित अपशिष्ट पदार्थ को अलग अलग कर बैरिकेडिंग में रख स्टोर करते हैं।यहां लगी मशीनों के माध्यम से अपशिष्टों को छांटना था, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। वजह यह है कि लो वोल्टेज की समस्या से मशीनें संचालित नहीं हो पा रही है।वहीं नगर पंचायत प्रशासन ने इसके लिए बिजली निगम को पत्र भेज ट्रांसफार्मर लगवाने की मांग की है। ईओ राजननाथ तिवारी ने बताया कि पर्याप्त बिजली नहीं मिलने की वजह से मशीनें संचालित नहीं हो पा रही हैं। ट्रांसफार्मर लगवाने के लिए निगम को पत्र भेजा गया है। कूड़ा संग्रह का कार्य शुरू हो गया है।
....
नगर पंचायत की आय हुई बाधित
- सूखा कचरे से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों को मशीन के माध्यम से छांट कर बेचना था। इससे हुए आय को नगर के विकास कार्यों में खर्च करना था, लेकिन बनने के एक वर्ष बाद भी ऐसा नहीं हो पा रहा है। जिसकी वजह से नगर पंचायत की आय नहीं हो पा रही है। वहीं सेंटर के अंदर कर्मचारियों के लिए सुलभ शौचालय बनवाया गया है, लेकिन अभी तक टाइल्स नहीं लगा है। वहीं फर्श पर दरारें भी पड़ी है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
सलेमपुर। लार में बना मैटेरियल रिकवरी सेंटर बेमतलब साबित हो रहा है। बनने के एक वर्ष बाद भी बिजली के अभाव में कूड़ा संग्रह करने वाली मशीनें बंद पड़ी हैं, जिससे कूड़ा एकत्र नहीं हो पा रहा है। जबकि नगर पंचायत प्रशासन का कहना है कि अभी कूड़ा इतना नहीं आ रहा है, जिससे मशीनों की जरुरत पड़े।
शासन के निर्देश पर लार नगर पंचायत ने चौरडीहा गांव के समीप 33 लाख की लागत से एक वर्ष पहले मैटेरियल रिकवरी फैसेलिटी सेंटर बनाया था। अब प्रतिदिन वार्डों से निकलने वाले सूखे व गीले कचरे को वाहनों के माध्यम से सफाई कर्मचारी पहुंचाते हैं। यहां मौजूद कर्मचारी कचरे से निकलने वाले लोहा, टीन, सीसा, प्लास्टिक, पालीथीन सहित अपशिष्ट पदार्थ को अलग अलग कर बैरिकेडिंग में रख स्टोर करते हैं।यहां लगी मशीनों के माध्यम से अपशिष्टों को छांटना था, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। वजह यह है कि लो वोल्टेज की समस्या से मशीनें संचालित नहीं हो पा रही है।वहीं नगर पंचायत प्रशासन ने इसके लिए बिजली निगम को पत्र भेज ट्रांसफार्मर लगवाने की मांग की है। ईओ राजननाथ तिवारी ने बताया कि पर्याप्त बिजली नहीं मिलने की वजह से मशीनें संचालित नहीं हो पा रही हैं। ट्रांसफार्मर लगवाने के लिए निगम को पत्र भेजा गया है। कूड़ा संग्रह का कार्य शुरू हो गया है।
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नगर पंचायत की आय हुई बाधित
- सूखा कचरे से निकलने वाले अपशिष्ट पदार्थों को मशीन के माध्यम से छांट कर बेचना था। इससे हुए आय को नगर के विकास कार्यों में खर्च करना था, लेकिन बनने के एक वर्ष बाद भी ऐसा नहीं हो पा रहा है। जिसकी वजह से नगर पंचायत की आय नहीं हो पा रही है। वहीं सेंटर के अंदर कर्मचारियों के लिए सुलभ शौचालय बनवाया गया है, लेकिन अभी तक टाइल्स नहीं लगा है। वहीं फर्श पर दरारें भी पड़ी है।
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