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पॉवर प्लांट : 199 किसानों ने दिया सहमति पत्र
Thu, 07 Feb 2019 05:17 PM IST
हरिशंकर तिवारी
deoria
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Published by: हरिशंकर तिवारी
Updated Thu, 07 Feb 2019 05:17 PM IST
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देवरिया। घाघरा और गंडक के दोआबा में स्थित महाल मंझरिया में सोलर पॉवर प्लांट लगाने की कवायद तेज हो गई है। जिला प्रशासन की पहल पर करीब 199 किसानों ने हस्ताक्षरयुक्त सहमति पत्र डीएम को सौंपा है। जिला प्रशासन ने इसकी रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेज दिया है। बता दें कि पॉवर प्लांट के लिए भूमि की उपलब्धता को बड़ी बाधा माना जा रहा था। अब किसानों के राजी होने से पॉवर प्लांट को मंजूरी मिलने के आसार प्रबल हो गए हैं।
सलेमपुर तहसील अंतर्गत महाल मंझरिया में दोनों नदियों के बीच करीब दस हजार एकड़ भूमि उपलब्ध है। नदी का दोआबा होने के कारण भूमि के अधिकांश हिस्से का कोई विशेष उपयोग नहीं हो पाता है। किसान भी कुछ हिस्से में एक ही फसल उगा पाते हैं। इसी में से 1500 एकड़ भूमि पर एनटीपीसी की ओर से पॉवर प्लांट लगाने का प्रस्ताव है। जिला प्रशासन की पहल पर एनटीपीसी के अफसर भी सोलर पॉवर प्लांट के लिए भूमि को उपयुक्त भी मान चुके हैं। हालांकि अफसरों को आशंका थी कि इतनी मात्रा में भूमि के आवंटन पर कोई अवरोध न हो। कार्य शुरू होने के बाद किसी ने आपत्ति जताई तो फिर पूरा प्रोजेक्ट अधर में चला जाएगा। लिहाजा जिला प्रशासन को किसानों की सहमति लेने के निर्देश दिए गए थे। इससे इतर जब किसानों को पॉवर प्लांट लगाए जाने की जानकारी हुई तो वह स्वत: भूमि देने पर सहमत हो गए। ग्राम प्रधान चुरियां सुग्रीव सिंह, सरोज सिंह के नेतृत्व में 199 किसानों ने राष्ट्रीय हित, जनहित व विकास हित में विद्युत उत्पादन के लिए सोलर पॉवर प्लांट लगाने के मकसद से भूमि देने की सहमति दी है। इस सहमति के बाद अब प्रशासन आगे की कवायद में जुट गया है।
जल प्लावन रोकने के लिए बनेगा बांध
महाल मंझरिया की चिह्नित भूमि पर 660 मेगावाट की तीन इकाइयां लगाई जानी है। पॉवर प्लांट के लिए करीब 17 किमी लंबा बांध बनाए जाने का भी प्रस्ताव है। इससे चिह्नित क्षेत्र में जल प्लावन की स्थिति को रोका जा सकेगा। बंधे की ऊपरी चौड़ाई घाघरा नदी के डिस्चार्ज के मद्देनजर 5.50 मीटर व दोनों तरफ साइड स्लैप के साथ निर्माण कराया जाएगा। बंधे के लिए 25 मीटर चौड़ाई में भूमि उपलब्ध होने के कारण इसके भी अधिग्रहण की जरूरत नहीं होगी।
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सलेमपुर तहसील अंतर्गत महाल मंझरिया में दोनों नदियों के बीच करीब दस हजार एकड़ भूमि उपलब्ध है। नदी का दोआबा होने के कारण भूमि के अधिकांश हिस्से का कोई विशेष उपयोग नहीं हो पाता है। किसान भी कुछ हिस्से में एक ही फसल उगा पाते हैं। इसी में से 1500 एकड़ भूमि पर एनटीपीसी की ओर से पॉवर प्लांट लगाने का प्रस्ताव है। जिला प्रशासन की पहल पर एनटीपीसी के अफसर भी सोलर पॉवर प्लांट के लिए भूमि को उपयुक्त भी मान चुके हैं। हालांकि अफसरों को आशंका थी कि इतनी मात्रा में भूमि के आवंटन पर कोई अवरोध न हो। कार्य शुरू होने के बाद किसी ने आपत्ति जताई तो फिर पूरा प्रोजेक्ट अधर में चला जाएगा। लिहाजा जिला प्रशासन को किसानों की सहमति लेने के निर्देश दिए गए थे। इससे इतर जब किसानों को पॉवर प्लांट लगाए जाने की जानकारी हुई तो वह स्वत: भूमि देने पर सहमत हो गए। ग्राम प्रधान चुरियां सुग्रीव सिंह, सरोज सिंह के नेतृत्व में 199 किसानों ने राष्ट्रीय हित, जनहित व विकास हित में विद्युत उत्पादन के लिए सोलर पॉवर प्लांट लगाने के मकसद से भूमि देने की सहमति दी है। इस सहमति के बाद अब प्रशासन आगे की कवायद में जुट गया है।
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जल प्लावन रोकने के लिए बनेगा बांध
महाल मंझरिया की चिह्नित भूमि पर 660 मेगावाट की तीन इकाइयां लगाई जानी है। पॉवर प्लांट के लिए करीब 17 किमी लंबा बांध बनाए जाने का भी प्रस्ताव है। इससे चिह्नित क्षेत्र में जल प्लावन की स्थिति को रोका जा सकेगा। बंधे की ऊपरी चौड़ाई घाघरा नदी के डिस्चार्ज के मद्देनजर 5.50 मीटर व दोनों तरफ साइड स्लैप के साथ निर्माण कराया जाएगा। बंधे के लिए 25 मीटर चौड़ाई में भूमि उपलब्ध होने के कारण इसके भी अधिग्रहण की जरूरत नहीं होगी।
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