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स्टाफनर्स और एएनएम की तैनाती के लिए हो रही वसूली
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स्टाफनर्स व एएनएम की तैनाती को हो रही वसूली
- एनएचएम के तहत शासन से संविदा पर हुआ है चयन
- एक माह से तैनाती के लिए कार्यालय का काट रहे चक्कर
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। बाबुओं की कार्यशैली को लेकर सीएमओ कार्यालय अक्सर चर्चा में रहता है। एनएचएम के तहत चयनित हुई स्टाफ नर्स और एएनएम की तैनाती में पैसे की मांग हो रही है। पैसे नहीं देने वालों को समय का अभाव बताकर टाल मटोल बाबू कर रहे हैं। विभाग में यह चर्चा का विषय बना हुआ है।
सीएमओ कार्यालय में तैनात बाबू खुद को किसी अफसर से कम नहीं आंकते हैं। इनके लिए नियम व कानून कोई मायने नहीं रखता। ऊंची रसूख रखने वाले बाबू इतने प्रभावशाली हैं कि विभागीय अफसर भी इनके खिलाफ बोलने से कतराते हैं। एनएचएम के तहत जिले में 30 स्टॉफ नर्स और 180 एएनएम का चयन संविदा पर शासन से हुआ है। सीएचसी और पीएचसी पर इनकी तैनाती होनी थी। चार मार्च को इनकी सूची सीएमओ कार्यालय को मिल गई। उसी दिन से तैनाती के लिए सीएमओ कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो 20 से 30 हजार रुपये तैनाती के नाम पर वसूला जा रहा है। नहीं देने वालों को समय अभाव बताकर टाल मटोल हो रहा है। इसकी शिकायत सीएमओ तक भी पहुंची, लेकिन काई कार्रवाई नहीं हुई। विभाग में तैनाती के लिए रकम वसूली की चर्चाएं जोरों पर है। बाबूओं की मिलीभगत से स्टेशनरी व भोजन के टेंडर नियम को दरकिनार कर चहेते फर्म को कर दिया गया था। मामला डीएम तक पहुंचा तो जांच शुरू हुई और टेंडर निरस्त हुआ था। इस बाबत सीएमओ डॉ.धीरेंद्र कुमार ने बताया कि मार्च का महीना होने के कारण समयाभाव था। इसलिए स्टॉफ नर्स और एएनएम की तैनाती अधर में लटकी है। कुछ स्टॉफ नर्स और एएनएम की तैनाती की गई है। तैनाती के लिए रकम की मांग का मामला संज्ञान में नहीं है। शिकायत की गोपनीय जांच करा ली जाएगी।
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- एनएचएम के तहत शासन से संविदा पर हुआ है चयन
- एक माह से तैनाती के लिए कार्यालय का काट रहे चक्कर
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। बाबुओं की कार्यशैली को लेकर सीएमओ कार्यालय अक्सर चर्चा में रहता है। एनएचएम के तहत चयनित हुई स्टाफ नर्स और एएनएम की तैनाती में पैसे की मांग हो रही है। पैसे नहीं देने वालों को समय का अभाव बताकर टाल मटोल बाबू कर रहे हैं। विभाग में यह चर्चा का विषय बना हुआ है।
सीएमओ कार्यालय में तैनात बाबू खुद को किसी अफसर से कम नहीं आंकते हैं। इनके लिए नियम व कानून कोई मायने नहीं रखता। ऊंची रसूख रखने वाले बाबू इतने प्रभावशाली हैं कि विभागीय अफसर भी इनके खिलाफ बोलने से कतराते हैं। एनएचएम के तहत जिले में 30 स्टॉफ नर्स और 180 एएनएम का चयन संविदा पर शासन से हुआ है। सीएचसी और पीएचसी पर इनकी तैनाती होनी थी। चार मार्च को इनकी सूची सीएमओ कार्यालय को मिल गई। उसी दिन से तैनाती के लिए सीएमओ कार्यालय का चक्कर लगा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो 20 से 30 हजार रुपये तैनाती के नाम पर वसूला जा रहा है। नहीं देने वालों को समय अभाव बताकर टाल मटोल हो रहा है। इसकी शिकायत सीएमओ तक भी पहुंची, लेकिन काई कार्रवाई नहीं हुई। विभाग में तैनाती के लिए रकम वसूली की चर्चाएं जोरों पर है। बाबूओं की मिलीभगत से स्टेशनरी व भोजन के टेंडर नियम को दरकिनार कर चहेते फर्म को कर दिया गया था। मामला डीएम तक पहुंचा तो जांच शुरू हुई और टेंडर निरस्त हुआ था। इस बाबत सीएमओ डॉ.धीरेंद्र कुमार ने बताया कि मार्च का महीना होने के कारण समयाभाव था। इसलिए स्टॉफ नर्स और एएनएम की तैनाती अधर में लटकी है। कुछ स्टॉफ नर्स और एएनएम की तैनाती की गई है। तैनाती के लिए रकम की मांग का मामला संज्ञान में नहीं है। शिकायत की गोपनीय जांच करा ली जाएगी।
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