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निराश किसानों की उम्मीद बनेंगी समूह की महिलाएं
Updated Sun, 21 Oct 2018 11:52 PM IST
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किसानों की उम्मीद बनेंगी समूह की महिलाएं
एनआरएलएम की ओर से महिलाओं को दिलाया जा रहा कृषि प्रशिक्षण
मेसर्स रिसर्च एवं मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड देगी तकनीक, खरीदेगी उत्पाद
बैकुंठनाथ शुक्ल
देवरिया। खेती से निराश किसानों के लिए समूह की महिलाएं नई उम्मीद बनेंगी। इनकी मेहनत से जिले में सब्जी की किल्लत तो दूर होगी ही खेती में रासायनिक उत्पादों पर निर्भरता भी कम होगी। एनआरएलएम (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) के तहत महिलाओं को कृषि क्षेत्र में सशक्त बनाने की मुहिम तेज कर दी गई है। प्रयास सफल रहा तो अगले साल तक जिले का सब्जी और फल उत्पादन में विशेष योगदान होगा।
एनआरएलएम ने कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए मेसर्स रिसर्च एवं मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड को जिम्मेदारी सौंपी है। यह कंपनी गांवों में गठित स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को नो कास्ट पार्टनरशिप के जरिए कम लागत में सब्जी व फल उगाने के लिए प्रशिक्षित कर रही है। अब तक कंपनी विभिन्न ब्लॉकों में 79 समूहों को प्रशिक्षण दे चुकी है। कंपनी के कर्मचारी गांव में जाकर लघु-सीमांत किसानों की मदद से समूह को जमीन उपलब्ध कराएंगे। इस पर महिलाएं एनआरएलएम की ओर से मिले रिवाल्विंग फंड व आपसी सहयोग से खेती करेंगी। खेती से होने वाले लाभ का तीस प्रतिशत अंश भू स्वामी को दिया जाएगा। शेष 70 प्रतिशत लाभ समूह की महिलाओं का होगा। समूह की खेती ज्यादातर जैविक विधि पर निर्भर होगी। इसमें रासायनिक खादों का इस्तेमाल बेहद सीमित मात्रा में किया जाएगा। मेसर्स रिसर्च एवं मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड महिलाओं को तकनीकी उपकरण व दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराएगी। इसके लिए हर ब्लॉक में जैविक परिक्षेत्र पदाधिकारी तैनात किए जा रहे हैं, जो समय-समय पर समूह की खेती का निरीक्षण करेंगे। महिलाओं को फसल सुरक्षा के सुझाव देने के अलावा आवश्यकता अनुसार दवा, उपकरण आदि उपलब्ध कराएंगे।
यह है तैयारी
एनआरएलएम की ओर से रुद्रपुर में 14, भाटपाररानी में 18 व गौरीबाजार में 49 स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। प्रत्येक समूह में 12 महिलाएं शामिल हैं। एक नवंबर से पहले सभी समूहों को ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत रिवाल्विंग फंड जारी कर दिया जाएगा। मेसर्स रिसर्च एवं मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड गांव में जाकर समूह को जमीन उपलब्ध कराने की कवायद में जुटी है। जिन किसानों ने खेती छोड़ दी है पार्टनर बनाकर प्रत्येक समूह को तीन एकड़ भूमि उपलब्ध कराई जा रही है।
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महिलाएं करेंगी 26 प्रकार की खेती
समूह की महिलाएं 26 प्रकार की खेती करेंगी। फलवर्गीय में पपीता, केला व सब्जी वर्गीय में पालक, मेथी, धनिया, सोया, चौराई, बोड़ा, फेंचवीन, ब्रोक्ली, पत्ता सलाद, गाजर, मूली, शलजम, चुकंदर, आलू, करेला, फूल गोभी, पत्ता गोभी, टमाटर, मिर्चा, करैला, लौकी, हरा मटर आदि को बढ़ावा दिया जाएगा।
कोट
स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के जो भी माध्यम मिल रहे हैं, उन तक पहुंचाया जा रहा है। मेसर्स रिसर्च एवं मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड की मदद से महिलाओं को फल व सब्जी की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। 72 समूहों को खेती शुरू करने के लिए रिवाल्विंग फंड जारी कर दिया गया है। बाकी बचे गांवों में भी यह मुहिम आगे बढ़ाई जा रही है।
-गजेंद्र कुमार तिवारी, उपायुक्त, स्वत:रोजगार।
कोट
72 स्वयं सहायता समूहों को खेती शुरू करने के लिए 215 एकड़ जमीन उपलब्ध करा दी गई है। एक नवंबर से फार्मिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। कंपनी के कर्मचारी प्लॉटों पर जाकर जरूरी उपकरण उपलब्ध करा रहे हैं।
-मोहन मुरारी सिंह, सीईओ, मेसर्स रिसर्च एवं मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड।
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एनआरएलएम की ओर से महिलाओं को दिलाया जा रहा कृषि प्रशिक्षण
मेसर्स रिसर्च एवं मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड देगी तकनीक, खरीदेगी उत्पाद
बैकुंठनाथ शुक्ल
देवरिया। खेती से निराश किसानों के लिए समूह की महिलाएं नई उम्मीद बनेंगी। इनकी मेहनत से जिले में सब्जी की किल्लत तो दूर होगी ही खेती में रासायनिक उत्पादों पर निर्भरता भी कम होगी। एनआरएलएम (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) के तहत महिलाओं को कृषि क्षेत्र में सशक्त बनाने की मुहिम तेज कर दी गई है। प्रयास सफल रहा तो अगले साल तक जिले का सब्जी और फल उत्पादन में विशेष योगदान होगा।
एनआरएलएम ने कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए मेसर्स रिसर्च एवं मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड को जिम्मेदारी सौंपी है। यह कंपनी गांवों में गठित स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को नो कास्ट पार्टनरशिप के जरिए कम लागत में सब्जी व फल उगाने के लिए प्रशिक्षित कर रही है। अब तक कंपनी विभिन्न ब्लॉकों में 79 समूहों को प्रशिक्षण दे चुकी है। कंपनी के कर्मचारी गांव में जाकर लघु-सीमांत किसानों की मदद से समूह को जमीन उपलब्ध कराएंगे। इस पर महिलाएं एनआरएलएम की ओर से मिले रिवाल्विंग फंड व आपसी सहयोग से खेती करेंगी। खेती से होने वाले लाभ का तीस प्रतिशत अंश भू स्वामी को दिया जाएगा। शेष 70 प्रतिशत लाभ समूह की महिलाओं का होगा। समूह की खेती ज्यादातर जैविक विधि पर निर्भर होगी। इसमें रासायनिक खादों का इस्तेमाल बेहद सीमित मात्रा में किया जाएगा। मेसर्स रिसर्च एवं मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड महिलाओं को तकनीकी उपकरण व दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराएगी। इसके लिए हर ब्लॉक में जैविक परिक्षेत्र पदाधिकारी तैनात किए जा रहे हैं, जो समय-समय पर समूह की खेती का निरीक्षण करेंगे। महिलाओं को फसल सुरक्षा के सुझाव देने के अलावा आवश्यकता अनुसार दवा, उपकरण आदि उपलब्ध कराएंगे।
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यह है तैयारी
एनआरएलएम की ओर से रुद्रपुर में 14, भाटपाररानी में 18 व गौरीबाजार में 49 स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को प्रशिक्षण दिया गया है। प्रत्येक समूह में 12 महिलाएं शामिल हैं। एक नवंबर से पहले सभी समूहों को ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत रिवाल्विंग फंड जारी कर दिया जाएगा। मेसर्स रिसर्च एवं मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड गांव में जाकर समूह को जमीन उपलब्ध कराने की कवायद में जुटी है। जिन किसानों ने खेती छोड़ दी है पार्टनर बनाकर प्रत्येक समूह को तीन एकड़ भूमि उपलब्ध कराई जा रही है।
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महिलाएं करेंगी 26 प्रकार की खेती
समूह की महिलाएं 26 प्रकार की खेती करेंगी। फलवर्गीय में पपीता, केला व सब्जी वर्गीय में पालक, मेथी, धनिया, सोया, चौराई, बोड़ा, फेंचवीन, ब्रोक्ली, पत्ता सलाद, गाजर, मूली, शलजम, चुकंदर, आलू, करेला, फूल गोभी, पत्ता गोभी, टमाटर, मिर्चा, करैला, लौकी, हरा मटर आदि को बढ़ावा दिया जाएगा।
कोट
स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के जो भी माध्यम मिल रहे हैं, उन तक पहुंचाया जा रहा है। मेसर्स रिसर्च एवं मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड की मदद से महिलाओं को फल व सब्जी की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। 72 समूहों को खेती शुरू करने के लिए रिवाल्विंग फंड जारी कर दिया गया है। बाकी बचे गांवों में भी यह मुहिम आगे बढ़ाई जा रही है।
-गजेंद्र कुमार तिवारी, उपायुक्त, स्वत:रोजगार।
कोट
72 स्वयं सहायता समूहों को खेती शुरू करने के लिए 215 एकड़ जमीन उपलब्ध करा दी गई है। एक नवंबर से फार्मिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। कंपनी के कर्मचारी प्लॉटों पर जाकर जरूरी उपकरण उपलब्ध करा रहे हैं।
-मोहन मुरारी सिंह, सीईओ, मेसर्स रिसर्च एवं मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड।