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अपनों पर करम, गैरों पर सितम
Updated Sun, 30 Jul 2017 10:26 PM IST
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देवरिया। सपा के दो विधायकों को अतिरिक्त सुरक्षा नहीं मिलेगी। शासन की हाईलेवल कमेटी ने सुरक्षा व्यवस्था को पर्याप्त बताया है। इन लोगों ने जान का खतरा बता कर सुरक्षा बढ़ाने की डिमांड की थी। नेताओं ने तंज कसा है, किस मानक के तहत भाजपाइयों को सुरक्षा बढ़ाए जा रही है। उनके पास कौन सा पैमाना है कि विपक्ष के जनप्रतिनिधियों के जान के खतरे की आशंका निराधार बता रही है।
विधानसभा चुनाव-2017 में डॉ. आशुतोष उपाध्याय बबलू ने भाटपाररानी से जीत हासिल की है। यह गोरखपुर मंडल में सपा के इकलौते विधायक हैं जबकि विधान परिषद में मुख्य सचेतक रामसुंदर दास निषाद जिले के निवासी हैं। फिलहाल इन जनप्रतिनिधियों को एक-एक गनर मिला है। इन नेताओं ने प्रदेश सरकार से अतिरिक्त सुरक्षा की डिमांड की थी। उन्होंने सुरक्षा बढ़ाने की शासन से अपील की। इन नेताओं का दावा था कि कानून की लचर स्थिति से जान का खतरा बढ़ गया है। शासन की उच्चस्तरीय समिति के पास आवेदन पहुंचा, लेकिन समिति ने इनके आवेदन को खारिज कर दिया। गृह विभाग के अनुसचिव ने शासन के आदेश से अवगत कराया है। आशुतोष उपाध्याय के लिए कहा है कि जान के खतरे की आशंका निराधार है, जबकि मुख्य सचेतक रामसुंदर दास के संबंध में फिलहाल मिल रही सुरक्षा को पर्याप्त बताया है। बकौल बबलू उपाध्याय, मैं जनता का रक्षक हूं, सरकार को लग रहा है कि विपक्ष के नेताओं को खतरा नहीं है तो कोई बात नहीं। जनता उनकी रक्षा करेगी। अपराध की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। कोट्स
भाजपा जिलाध्यक्ष महेंद्र यादव ने कहा कि किसी को खतरा नहीं है। कानून का पालन कराया जा रहा है। किसी को कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं है। सरकार का निर्णय बेहतर है।
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कोट्स
सपा जिलाध्यक्ष रामइकबाल यादव ने कहा कि सपा नेताओं की सुरक्षा में कटौती हो रही है। जनप्रतिनिधियों की डिमांड के बावजूद सुरक्षा नहीं बढ़ाना समझ से परे है। इससे स्पष्ट है कि सरकार पक्षपात कर रही है। कोट्स
पुलिस की रिपोर्ट पर सुरक्षा बढ़ाने की संस्तुति की जाती है, जैसी रिपोर्ट मिलती है, उसे शासन को भेज दिया जाता है। सुजीत कुमार, डीएम
कोट्स
जिलास्तरीय समिति सुरक्षा को बढ़ाने और घटाने का निर्णय लेती हैं, गुण-दोष के आधार पर निर्णय लिया जाता है। राजीव मल्होत्रा, एसपी
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विधानसभा चुनाव-2017 में डॉ. आशुतोष उपाध्याय बबलू ने भाटपाररानी से जीत हासिल की है। यह गोरखपुर मंडल में सपा के इकलौते विधायक हैं जबकि विधान परिषद में मुख्य सचेतक रामसुंदर दास निषाद जिले के निवासी हैं। फिलहाल इन जनप्रतिनिधियों को एक-एक गनर मिला है। इन नेताओं ने प्रदेश सरकार से अतिरिक्त सुरक्षा की डिमांड की थी। उन्होंने सुरक्षा बढ़ाने की शासन से अपील की। इन नेताओं का दावा था कि कानून की लचर स्थिति से जान का खतरा बढ़ गया है। शासन की उच्चस्तरीय समिति के पास आवेदन पहुंचा, लेकिन समिति ने इनके आवेदन को खारिज कर दिया। गृह विभाग के अनुसचिव ने शासन के आदेश से अवगत कराया है। आशुतोष उपाध्याय के लिए कहा है कि जान के खतरे की आशंका निराधार है, जबकि मुख्य सचेतक रामसुंदर दास के संबंध में फिलहाल मिल रही सुरक्षा को पर्याप्त बताया है। बकौल बबलू उपाध्याय, मैं जनता का रक्षक हूं, सरकार को लग रहा है कि विपक्ष के नेताओं को खतरा नहीं है तो कोई बात नहीं। जनता उनकी रक्षा करेगी। अपराध की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। कोट्स
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भाजपा जिलाध्यक्ष महेंद्र यादव ने कहा कि किसी को खतरा नहीं है। कानून का पालन कराया जा रहा है। किसी को कानून हाथ में लेने की इजाजत नहीं है। सरकार का निर्णय बेहतर है।
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सपा जिलाध्यक्ष रामइकबाल यादव ने कहा कि सपा नेताओं की सुरक्षा में कटौती हो रही है। जनप्रतिनिधियों की डिमांड के बावजूद सुरक्षा नहीं बढ़ाना समझ से परे है। इससे स्पष्ट है कि सरकार पक्षपात कर रही है। कोट्स
पुलिस की रिपोर्ट पर सुरक्षा बढ़ाने की संस्तुति की जाती है, जैसी रिपोर्ट मिलती है, उसे शासन को भेज दिया जाता है। सुजीत कुमार, डीएम
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जिलास्तरीय समिति सुरक्षा को बढ़ाने और घटाने का निर्णय लेती हैं, गुण-दोष के आधार पर निर्णय लिया जाता है। राजीव मल्होत्रा, एसपी