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प्रशिक्षु लेखपालों को नोटिस जारी
Updated Thu, 12 Jul 2018 11:25 PM IST
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कलेक्ट्रेट में लेखपाल संघ का धरना जारी।
- फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। बार-बार हिदायतों के बाद भी काम पर नहीं लौटने वाले लेखपालों पर प्रशासन और सख्त हो गया है। हड़ताल में शामिल प्रशिक्षु लेखपालों को नोटिस दी गई है। उन्हें तत्काल काम पर लौटने का निर्देश देते हुए चेताया गया है कि अगर इसकी अवहेलना की तो उनके विरुद्ध केस दर्ज करते हुए बर्खास्तगी की कार्रवाई होगी। इसके अलावा 149 पुराने लेखपालों को भी बस्ता जमा करने का आदेश जारी हुआ है। जिले की पांच तहसीलों में कुल 473 लेखपाल कार्यरत हैं। इसमें 324 लेखपाल अभी प्रशिक्षण अवधि में है। आठ सूत्री मांगों को लेकर चल रही हड़ताल में प्रशिक्षु लेखपाल सक्रिय भूमिका में हैं। प्रशासन का मानना है कि अगर बड़ी संख्या वाले प्रशिक्षु लेखपाल ही हड़ताल से वापस हो जाएं तो उनकी मुश्किलें काफी हद तक दूर हो जाएगी। गुरुवार को सभी तहसीलों में एसडीएम ने नोटिस जारी कर दी। इसमें कहा गया है कि अभी वह प्रशिक्षण अवधि में है, लिहाजा कोई भी अनुशासनहीनता करेंगे तो उन पर कार्रवाई पक्की है। नोटिस के बाद प्रशिक्षु लेखपालों में हड़कंप है। पूरे दिन वह अगली रणनीति तैयार करने में जुटे रहे। हालांकि ज्यादातर ने किसी भी हाल में हड़ताल को बीच में छोड़ काम पर नहीं लौटने पर सहमति जताई। डीएम सुजीत कुमार का कहना था कि प्रशिक्षु लेखपालों को नोटिस दी गई है। शुक्रवार से वह काम पर नहीं आए तो सेवा समाप्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। पुराने लेखपालों को भी बस्ता जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। अवहेलना करने वालों पर केस दर्ज कराया जाएगा।
लेखपाल बोले, प्राण जाए, पर बस्ता न जाए
देवरिया। प्रशासन की नोटिस के बावजूद लेखपाल गुरुवार को पूरे उत्साह के साथ आंदोलन पर डटे रहे। कलेक्ट्रेट में मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष चंद्रभूषण पांडेय ने कहा कि लेखपालों के लिए बस्ता ही सब कुछ है। किसी भी हाल में वह बस्ता जमा नहीं करेंगे, भले ही प्राण क्यों न देना पड़े। उन्होंने कहा कि सभी नए लेखपाल दो साल का प्रशिक्षण पूरा कर पूर्णकालिक हो चुके हैं। लिहाजा अब उन पर सेवा समाप्ति की कार्रवाई नहीं हो सकती। प्रशासन के उत्पीड़न से लेखपाल डरने वाले नहीं है। धरना देने वालों में अमरेंद्र तिवारी, राजकुमार मिश्र, नर्वदेश्वर मिश्र, दिग्विजय मिश्र, गणेश शंकर तिवारी, नागेश पति, रामलाल सैंथवार, संतोष कुमार, बसंत राज सिंह, अवधेश दुबे, रवि पटेल, हरिश्चंद्र पांडेय आदि शामिल रहे। उधर, गुरुवार को पूर्वांचल छात्र मोर्चा के जिलाध्यक्ष सुधांशु रंजन, मंडल अध्यक्ष अरविंद गिरी, पंचायत प्रतिनिधि महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. चतुरानन ओझा, बृजेंद्र मणि त्रिपाठी, राजस्व निरीक्षक, संग्रह अमीन संघ आदि ने पहुंचकर लेखपालों के आंदोलन को समर्थन का ऐलान किया।
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लेखपाल बोले, प्राण जाए, पर बस्ता न जाए
देवरिया। प्रशासन की नोटिस के बावजूद लेखपाल गुरुवार को पूरे उत्साह के साथ आंदोलन पर डटे रहे। कलेक्ट्रेट में मांगों के समर्थन में नारेबाजी की। लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष चंद्रभूषण पांडेय ने कहा कि लेखपालों के लिए बस्ता ही सब कुछ है। किसी भी हाल में वह बस्ता जमा नहीं करेंगे, भले ही प्राण क्यों न देना पड़े। उन्होंने कहा कि सभी नए लेखपाल दो साल का प्रशिक्षण पूरा कर पूर्णकालिक हो चुके हैं। लिहाजा अब उन पर सेवा समाप्ति की कार्रवाई नहीं हो सकती। प्रशासन के उत्पीड़न से लेखपाल डरने वाले नहीं है। धरना देने वालों में अमरेंद्र तिवारी, राजकुमार मिश्र, नर्वदेश्वर मिश्र, दिग्विजय मिश्र, गणेश शंकर तिवारी, नागेश पति, रामलाल सैंथवार, संतोष कुमार, बसंत राज सिंह, अवधेश दुबे, रवि पटेल, हरिश्चंद्र पांडेय आदि शामिल रहे। उधर, गुरुवार को पूर्वांचल छात्र मोर्चा के जिलाध्यक्ष सुधांशु रंजन, मंडल अध्यक्ष अरविंद गिरी, पंचायत प्रतिनिधि महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. चतुरानन ओझा, बृजेंद्र मणि त्रिपाठी, राजस्व निरीक्षक, संग्रह अमीन संघ आदि ने पहुंचकर लेखपालों के आंदोलन को समर्थन का ऐलान किया।
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