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पशु निस्तारण केंद्र के मलबे ने बना दिया मौत का तालाब
Sat, 26 Oct 2019 03:19 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
अमर उजाला ब्यूरो, वाराणसी
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 26 Oct 2019 03:19 AM IST
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दलदल में धंसकर मासूम की मौत के लिए सीधे तौर पर जिला प्रशासन और नगर निगम जिम्मेदार हैं। हुकुलगंज स्थित पशु निस्तारण केंद्र में मृत पशुओं के अवशेष को यहां बने गड्ढों में फेंका जाता है, जबकि प्रशासन ने इस पर प्रतिबंध लगाते हुए इसे करसड़ा शिफ्ट करने का आदेश दिया था।
लेकिन लापरवाह नगर निगम ने उस आदेश को दरकिनार कर दिया। हालात यह है कि हालही में आई बाढ़ के कारण गड्ढों में पानी भर गया और ये गड्ढे दलदल का रूप लेकर तालाब अब कब्रगाह बन गए हैं।
दरअसल, हुकुलगंज के डगरहवा घाट के पास शुक्रवार को सात साल के बच्चे की पशुओं के अवशेष से बने दलदल में धंसने से मौत हो गई। इस दलदल को लेकर पिछले कई महीनों से लोग लगातार प्रदर्शन कर रहे थे। यहां बता दें कि वाराणसी में भले ही स्लाटर हाउस प्रतिबंधित किए गए हैं।
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मगर, पशु निस्तारण केंद्रों से ही हर दिन अवशेष निकलता है। मृत पशुओं के अवशेष को निपटाने की प्रक्रिया का पालन किए बिना इन्हीं गड्ढों में उसे फेंक दिया जाता है। ऐसा केवल हुकुलगंज में ही नहीं बल्कि शहर में कई और जगहों पर किया जाता है।
अन्य केंद्रों में पर बरती जा रही लापरवाही
शहर में हुकुलगंज के अलावा कमल गड़हा और अर्दली बाजार में भी पशु निस्तारण केंद्र हैं। यहां भी गड्ढों में उनके अवशेष डाले जाते हैं। ऐसे में जरा सी लापरवाही पर यहां भी हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। हाल ही आए बाढ़ से आए पानी के बाद इन इलाकों में स्थिति विकराल है। मगर, प्रशासन की ओर से सफाई या मलबे को हटाने का कोई प्रयास नहीं किए गए हैं।
अवैध कटान का मलबा भी इन्हीं गड्ढों में
भले ही प्रशासन बूचड़खानों पर पूरी तरह रोक का दावा करे, मगर वाराणसी में कई जगहों पर अवैध स्लाटर हाउस संचालित है। अवैध कटान के बाद उसके मलबे को भी इन्हीं गड्डों में चोरी छिपे डाला जाता है।
यह गंभीर मामला है और इसमें लापरवाह अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। प्रशासन के प्रतिबंध के बाद पशु निस्तारण केंद्र को शिफ्ट नहीं करने पर जवाब तलब किया जाएगा।
दीपक अग्रवाल, मंडलायुक्त
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लेकिन लापरवाह नगर निगम ने उस आदेश को दरकिनार कर दिया। हालात यह है कि हालही में आई बाढ़ के कारण गड्ढों में पानी भर गया और ये गड्ढे दलदल का रूप लेकर तालाब अब कब्रगाह बन गए हैं।
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दरअसल, हुकुलगंज के डगरहवा घाट के पास शुक्रवार को सात साल के बच्चे की पशुओं के अवशेष से बने दलदल में धंसने से मौत हो गई। इस दलदल को लेकर पिछले कई महीनों से लोग लगातार प्रदर्शन कर रहे थे। यहां बता दें कि वाराणसी में भले ही स्लाटर हाउस प्रतिबंधित किए गए हैं।
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मगर, पशु निस्तारण केंद्रों से ही हर दिन अवशेष निकलता है। मृत पशुओं के अवशेष को निपटाने की प्रक्रिया का पालन किए बिना इन्हीं गड्ढों में उसे फेंक दिया जाता है। ऐसा केवल हुकुलगंज में ही नहीं बल्कि शहर में कई और जगहों पर किया जाता है।
अन्य केंद्रों में पर बरती जा रही लापरवाही
शहर में हुकुलगंज के अलावा कमल गड़हा और अर्दली बाजार में भी पशु निस्तारण केंद्र हैं। यहां भी गड्ढों में उनके अवशेष डाले जाते हैं। ऐसे में जरा सी लापरवाही पर यहां भी हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। हाल ही आए बाढ़ से आए पानी के बाद इन इलाकों में स्थिति विकराल है। मगर, प्रशासन की ओर से सफाई या मलबे को हटाने का कोई प्रयास नहीं किए गए हैं।
अवैध कटान का मलबा भी इन्हीं गड्ढों में
भले ही प्रशासन बूचड़खानों पर पूरी तरह रोक का दावा करे, मगर वाराणसी में कई जगहों पर अवैध स्लाटर हाउस संचालित है। अवैध कटान के बाद उसके मलबे को भी इन्हीं गड्डों में चोरी छिपे डाला जाता है।
यह गंभीर मामला है और इसमें लापरवाह अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। प्रशासन के प्रतिबंध के बाद पशु निस्तारण केंद्र को शिफ्ट नहीं करने पर जवाब तलब किया जाएगा।
दीपक अग्रवाल, मंडलायुक्त