गौशालाओं में भी गायों का ठिकाना नहीं
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चित्रकूट। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गौरक्षा का चोला पहनकर वसूली करने वालों को आड़े हाथों लिया है। उनके शनिवार को दिए बयान से एक बार फिर गौरक्षा का मुद्दा उछल गया है। पीएम से सख्त रुख से तथाकथित गौरक्षक भी शांत हो गए हैं। पीएम के बयान के बाद जिले में गोसेवा की पड़ताल की गई तो पता चला कि धर्मनगरी में छह पंजीकृत गौशालाएं हैं। कई धार्मिक ट्रस्ट भी इनकी देखभाल कर रहे हैं। बुंदेलखंड में सूखे के दौरान गौवंशीय पशुओं की देखभाल के लिए कोई सामने नहीं आया। इधर-उधर भटकने वाली गायों को अधिकारियों के दखल पर गौशालाओं में रख लिया जाता था लेकिन लेकिन धन की कमी बताकर गौशाला मालिक कुछ दिन रखने के बाद उन्हें छोड़ देते थे। सही देखभाल न होे से कई गायों की मौत भी हो गई।
जिले में गौवंशी पशुओं को रखने व देखभाल के लिए निर्मोही अखाड़ा गौशाला सीतापुर, नन्दी गौशाला नरैना खेड़ा, अगरहुड़ा, अलखनारायण गौशाला गिन्नर आश्रम ग्राम पटापार बरगढ़, परमानंद गौशाला दीनदयाल गनीवा, देवराज गौसेवा सदनरूकमा बुजुर्ग, तुलसी गौशाला तीर्थ राजापुर गौशालाएं हैं। इसमें से रसिन गौशाला बांदा जिले से पंजीकृत है। पशु चिकित्साधिकारी डा. एच एस बबेले ने बताया कि विभाग बधियाकरण कार्यक्रम चला रहा है। 39 हजार 179 गोवंशीय पशुओं का बधियाकरण किया जा चुका है। खराब नस्ल के होने से लोग गायों, बछड़ों को छोड़ देते हैं जिससे यह समस्या बढ़ती ही जा रही है। अच्छे नस्ल के जानवर होने पर गौवंशीय पशुओं की स्थिति में सुधार आएगा। अच्छे नस्ल के साड़ गौशालाओं में भेजे गए हैं।